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अल्लाह हर दिल की नीयत से वाक़िफ़ है

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अस्सलामु अलैकुम
या अल्लाह, हमारे ज्ञान, रोज़ी और अमल में बरकत अता फरमा। क़ुरआन पढ़ने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमा। आमीन।

أَعُوذُ بِاللّٰهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ

وَالَّذِيۡنَ اٰمَنُوۡا وَعَمِلُوا الصّٰلِحٰتِ لَـنُدۡخِلَـنَّهُمۡ فِى الصّٰلِحِيۡنَ ۞

अनुवाद:
और जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए, हम उन्हें ज़रूर नेक लोगों में शामिल करेंगे।

وَمِنَ النَّاسِ مَنۡ يَّقُوۡلُ اٰمَنَّا بِاللّٰهِ فَاِذَاۤ اُوۡذِىَ فِى اللّٰهِ جَعَلَ فِتۡنَةَ النَّاسِ كَعَذَابِ اللّٰهِؕ وَلَئِنۡ جَآءَ نَـصۡرٌ مِّنۡ رَّبِّكَ لَيَـقُوۡلُنَّ اِنَّا كُنَّا مَعَكُمۡ‌ؕ اَوَلَـيۡسَ اللّٰهُ بِاَعۡلَمَ بِمَا فِىۡ صُدُوۡرِ الۡعٰلَمِيۡنَ ۞

अनुवाद:
और कुछ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं, “हम अल्लाह पर ईमान लाए।” फिर जब अल्लाह के रास्ते में उन्हें कोई तकलीफ़ पहुँचती है तो वे लोगों की दी हुई तकलीफ़ को अल्लाह के अज़ाब जैसा समझने लगते हैं। और यदि तुम्हारे रब की तरफ़ से कोई मदद आ जाती है तो ये ज़रूर कहेंगे, “हम तो तुम्हारे साथ थे।” क्या अल्लाह उन बातों को नहीं जानता जो सारे जहान के दिलों में छुपी हुई हैं?

तफ़्सीर:
अल्लाह का अज़ाब जितना सख़्त है, ये लोग इंसानों की दी हुई तकलीफ़ को भी उतना ही बड़ा समझते हैं और इस वजह से काफ़िरों की बात मानकर अपने ईमान से फिर जाते हैं।
जब मुसलमानों को जीत मिलती है, तो ये मुनाफ़िक़ (दिखावटी ईमान वाले) उनके साथ होने का दावा करते हैं ताकि जीत के फ़ायदे में शामिल हो सकें। लेकिन अल्लाह हर दिल की नीयत से वाक़िफ़ है।

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Allah is aware of the intentions of every heart


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Imran Siddiqui

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