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रमज़ान की 25वीं रात की पाक दुआ: नाम-ए-अमल दाहिने हाथ में मिले

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रमज़ान की 25वीं रात की पाक दुआ: नाम-ए-अमल दाहिने हाथ में मिले

रमज़ानुल मुबारक की रातें रहमत, मग़फिरत और निजात का पैग़ाम लेकर आती हैं। आख़िरी अशरे की इन क़ीमती रातों में बंदा-ए-मोमिन अपने रब को राज़ी करने की कोशिश करता है। 25वीं रात की यह खास दुआ, क़यामत के दिन कामयाबी की अलामत बन सकती है:

अरबी दुआ:

اللَّهُمَّ اجْعَلْ اسْمِي فِي السُّعَدَاءِ، وَرُوحِي مَعَ الشُّهَدَاءِ، وَإِحْسَانِي فِي عِلِّيِّينَ، وَإِسَاءَتِي مَغْفُورَةً

हिंदी तर्जुमा (उच्चारण):

ऐ अल्लाह! नाम-ए-अमल हमारे दाहिने हाथ में नसीब फरमा, और हमारा नाम नेक लोगों में दर्ज कर, हमारी रूह को शहीदों के साथ कर, हमारी नेकी को ऊँचे दर्जे में दाख़िल फरमा और हमारी खता को माफ़ कर दे।

इस दुआ की अहमियत:

क़ुरआन और हदीस में बताया गया है कि जिनके आमाल उनके दाहिने हाथ में दिए जाएंगे, वही लोग अल्लाह के पसंदीदा होंगे और जन्नत के हक़दार होंगे। इस दुआ में हम अल्लाह से यही मांगते हैं — हमें नेक बंदों में शुमार फरमा, शहादत जैसा ऊँचा मुक़ाम अता कर, और हमारी ग़लतियों को माफ कर दे। रमज़ान की रातों में की गई सच्ची दुआ बेअसर नहीं जाती।

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Imran Siddiqui

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