shafaat vaala darood: barakat, rahamat aur gunaahon kee maaphee paane ka amal(hindi)
(Shafaat Wala Darood: Blessings, Mercy, and Forgiveness of Sins. Hindi)
इस्लाम में दरूद शरीफ को बहुत अहमियत दी गई है। यह एक ऐसा अमल है जिससे रहमत के दरवाजे खुलते हैं, गुनाह माफ होते हैं और नेकियों में बढ़ोतरी होती है। दरूद शरीफ पढ़ने के अनगिनत फायदें बताए गए हैं, जिनमें से कुछ का उल्लेख हम इस लेख में कर रहे हैं।
1. शफ़ाअत वाला दरूद (Shafaat Wala Darood)
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَأَنْزِلْهُ الْمَقْعَدَ الْمُقَرَّبَ عِنْدَكَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ
उच्चारण: अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिन व अन्ज़िल्हुल मक़अद अल-मुक़र्रब अइन्दक यौम अल-क़ियामह।
अर्थ: जो व्यक्ति यह दरूद पाक पढ़ेगा, उसे क़यामत के दिन नबी (ﷺ) की सिफ़ारिश (सिफारिशी मदद) मिलेगी। (Al-Targheeb wa Al-Tarheeb, Volume 2, Page 329, Hadith 31)
2. रहमत के सत्तर (70) दरवाजे (Seventy Doors of Mercy)
صَلَّى اللَّهُ عَلَى مُحَمَّدٍ
उच्चारण: सल्लल्लाहु अला मुहम्मद।
अर्थ: जो यह दरूद शरीफ पढ़ेगा, उसके लिए रहमत के सत्तर (70) दरवाजे खोल दिए जाएंगे। (Al-Qaul Al-Badi, Page 277)

3. शब-ए-जुमा का दरूद (Darood of Shab-e-Jumma)
اللَّهُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ وَبَارِكْ عَلَى سَيِّدِنَا مُحَمَّدٍ النَّبِيِّ الأُمِّيِّ الْحَبِيبِ الْعَالِي الْقَدْرِ الْعَظِيمِ الْجَاهِ
उच्चारण: अल्लाहुम्मा सल्लि व सल्लिम् व बारिक अला सय्यिदिना मुहम्मदिन नबीय्यिल उम्मिय्यिल हबीबिल आलील क़द्रिल अज़ीमिल जाह।
अर्थ: शुक्रवार की रात (शब-ए-जुमा) इस दरूद शरीफ को पढ़ना अत्यंत फायदेमंद है। (Afzal Al-Salawat Ala Sayyid Al-Sadat, Page 151)
4. छः लाख दरूद शरीफ का सवाब (Reward of Six Hundred Thousand Darood)
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى سَيِّدِنَا مُحَمَّدٍ عَدَدَ مَا فِي عِلْمِ اللَّهِ صَلَاةً دَائِمَةً
उच्चारण: अल्लाहुम्मा सल्लि अला सय्यिदिना मुहम्मदिन अददा मा फी इल्मिल्लाह सलातं दाईमः।
अर्थ: इस दरूद शरीफ को एक बार पढ़ने से छः लाख दरूद पढ़ने का सवाब मिलता है। (Afzal Al-Salawat Ala Sayyid Al-Sadat, Page 149)
5. तमाम गुनाह माफ़ (Forgiveness of All Sins)
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى سَيِّدِنَا وَमَوْलَانَا مُहम्मَّدٍ وَعَلَى آلِهِ وَسَلِّمْ
उच्चारण: अल्लाहुम्मा सल्लि अला सय्यिदिना वा मौलाना मुहम्मदिं वा अला आलिहि व सल्लिम।
अर्थ: जो यह दरूद शरीफ पढ़ेगा, उसके पिछले गुनाह माफ कर दिए जाएंगे। (Al-Marza Al-Abideen, Page 65)
6. एक हज़ार दिन की नेकीयाँ (One Thousand Days of Good Deeds)
جَزَى اللَّهُ عَنَّا مُحَمَّدًا مَا هُوَ أَهْلُهُ
उच्चारण: जज़ाल्लाहु अन्ना मुहम्मदं मा हुआ अहलुह।
अर्थ: इस दरूद शरीफ को पढ़ने से सत्तर (70) फरिश्ते एक हज़ार दिन तक नेकियाँ लिखते हैं। (Rafi’ Al-Wasail, Volume 10, Page 254, Hadith 17305)
निष्कर्ष (Conclusion)
दरूद शरीफ पढ़ना इस्लाम में एक महान इबादत मानी गई है। यह न केवल हमें अल्लाह की रहमत और बरकत दिलाती है बल्कि क़यामत के दिन नबी (ﷺ) की सिफ़ारिश का हक़दार भी बनाती है। इसलिए, हमें इसे अपनी रोज़ाना की जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए और अधिक से अधिक दरूद शरीफ पढ़ना चाहिए।
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