* गुरुवार के बजाए रविवार को होगा जुलूस का भव्य आयोजन
* जुलूस में शामिल होने वालों के लिए जरुरी नियमावली जारी
जालना: हुजूर मोहम्मद (सअ) अमन और इंसाफ के पैगंबर बनकर दुनिया में तशरीफ़ लाए थे. आपका दुनिया में आना संपूर्ण इंसानियत के लिए अल्लाह का इनाम है. इसलिए ईद-ए-मिलादुन्नबी पर निकाले जाने वाले जुलूस के जरिए हमें अमन, शांति और इंसाफ का संदेश सभी धर्मों और नागरिकों तक पहुंचाना होगा. यह प्रतिपादन गुलजार मस्जिद के इमाम मौलाना गुलाम जिलानी मिस्बाही ने किया.
जुलूस ए मोहम्मदी को लेकर मौलाना मिस्बाही और गुलजार मस्जिद के सदर महमूद पहलवान कुरैशी ने बताया कि ईद मिलादुन्नबी के उपलक्ष्य में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी शहर में जुलूस का आयोजन होगा. लेकिन इस बार ईद और गणेशोत्सव का त्योहार एक साथ होने की वजह से पुलिस द्वारा की गई अपील पर अमल करते हुए जुलूस ए मोहम्मदी को गुरुवार की बजाए रविवार 1 अक्तूबर को निकाला जाएगा.
जुलूस दोपहर में जोहर की नमाज के बाद मंगल बाजार से निकलेगा तथा चौक मस्जिद, नेहरू रोड, सुभाष रोड, मोती मस्जिद, मामा चौक आदि से होते हुए गरीब शाह बाजार दरगाह के सामने पहुंचेगी. जहां विशेष दुआ होगी.
* जुलूस में शामिल लोगों के लिए नियमावली जारी
जूलस में शामिल होने वालों के नियमावली बनाई गई है जिसमें कहा गया है कि, निहायत पाक साफ, बा अदब, बा वजू, जुलूस में शरीक हो. पुरे रास्ते में जिक्र, नाते नबी और दुरूद व सलाम कसरत से पडे. शोर शराबा हुज्जत तकरार बेवजह बातचीत से परहेज करें. डीसीपीलीन के साथ लाईन लगाकर बड़े ही एहतराम के साथ चले. इस्लामी झंडो के साथ भारतीय तिरंगे झंडे भी अपने जुलूस में शामिल करें. गाना बजाना, नाच गाना, चेहरे रंगना, और एक दुसरे पर रंग उड़ाने से मुकम्मल परहेज करे, क्योंकि ये सख्त हराम और ईस्लामी तालीमात के खिलाफ है. डीजे का इस्तेमाल किये बगैर स्पीकर या फिर अपनी जुबान का ही इस्तेमाल करें. पटाखे न फोडे , पानी ना फेंके. आशिकाने मुस्तफा शरायी और इस्लामी नारे ही लगाये, गैर शरई और गलत नारे जिस से किसी का दिल दुखे ऐसे नारों से बचें. नमाजे पंजगाना की पाबंदी की जाए, सजावट और तैयारी में मसरूफ कुछ नौजवान नमाज के मामले में सुस्ती करते है, हालांकि ईद मिलादुन्नबी मनाना जुलूस व मिलाद करना, सजावट वगैरह का एहतमाम करना सब मुस्तहब काम है, जबकि नमाज फर्ज है इस से किसी सूरत में गफलत बरतना दुरुस्त नही. जुलूस के दरम्यान सडक पर कचरा न फैलने दे, और साथ ही कचरा साफ करने की भी कोशिश करनी चाहिये.
* ईद का जश्न सभी को साथ लेकर मनाए
मौलाना गुलाम जिलानी मिस्बाही न कहा की, अल्लाह पाक ने पसंदीदा दिनो को याद रखने का हुक्म कुरान करीम में दिया है, आम दिनों के मुकाबले अल्लाह पाक के नजदीक सबसे मुकद्दस दिन नबी करीम का यौमे मिलाद है. कयुके इसी दिन की वजह से अन्य दिन बा बरकत हुए है. कुराने मुकद्दस हमे रहमते इलाही पर खुशी मनाने का हुक्म देता है. मौलाना ने कहा की जश्ने विलादत की खुशी मनाना दर असल हुकमे कुरानी पर अमल है, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि, जश्ने विलादत की खुशी में कोई भी ऐसा काम मत कीजिए जो दीन व शरीयत और इस्लाम की असल रूह के खिलाफ हो और जिस से ईमान व इस्लाम और मुसलमानों की गैरत पर आंच आये और जो हुकुकुल इबाद के भी खिलाफ हो.
* इन कामों को किया जाए
ईद ए मिलाद पर जो काम करने चाहिए उनमें सदका खैरात करने, , रोजा रखने, तिलावते कुराने पाक, और नवाफिल की कसरत की जानी चाहिए मसाकीन, बेवा, यतीम, और जरुरत मंदो की जरूरतें पूरी करें. दुकान व मकान, गली कुचे, बाजारों की सजावट, और चिराग करें. नियाज का खाना व दिगर सदकाते नवाफिल के जरिये अपने आप को ईद मिलादुन्नबी की खुशियों में शामिल करें. लेकिन इन कामों के लिये जबरन चंदा ना वसूला जाये, और बिजली की चोरी भी ना करे, और ना ही किसी को तकलीफ पहुंचाई जाए.

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