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कुर्बानी की बरकत से दूर होती हैं बलाएं और बीमारियां

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*बकरीद के दौरान एहतियात बरतने की मौलाना मिस्बाही की अपील.

The blessings of sacrifice keep away troubles and diseases

जालना: इस्लाम में कुर्बानी का बहुत महत्व है. कुर्बानी के दिनों में कुर्बानी करना ही वाजिब है. इसकी बरकत से गुनाह मिटते हैं. मुसीबतें और परेशानियां टलती है तथा बलाएं और बीमारियां भी दूर होती है. इसलिए नागरिक  सरकार के सभी नियमों का पालन कर अपनी कुर्बानियां अल्लाह की राह में पेश करें. सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी करने से बचने की अपील गुलजार मस्जिद के पेश इमाम मौलाना गुलाम जिलानी मिस्बाही ने की है.

मौलाना मिस्बाही ने ईद के उपलक्ष्य में शुक्रवार को जुमा की नमाज के पहले नागरिकों का मार्गदर्शन किया. उन्होंने कहा कि कुर्बानी एक तरह का सदका और फिदिया है. इन दिनों कुछ अफवाह फैलाई जा रही है कि कुर्बानी के रुपए मोहताजों, जरूरतमंदों को दे दिए जाएं, लेकिन याद रखिए, इस तरह की अफवाह गैर इस्लामी है और ऐसा करने से कुर्बानी अदा नहीं होगी. कुर्बानी के दिनों में कुर्बानी करना ही वाजिब है. इसका कोई बदला हो ही नहीं सकता. मौलाना ने कहा कि सावधानी बरतना और एहतियात बरतते हुए हर तरह की जिम्मेदारी को निभाना इस्लामी तौर-तरीके में है. मुसलमानों को चाहिए कि पूरी जिम्मेदारी से एहतियात बरतते हुए अपने इस फरीजा को अंजाम दें. उन्होंने कहा कि अल्लाह पाक से दुआ करें कि दुनिया को खास कर हमारे मुल्क हिंदुस्तान और शहर जालना में अमन शांति सद्भाव बना रहे तथा भाईचारा बढे.

'सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी न करें'
मौलाना गुलाम जिलानी मिस्बाही

मौलाना जिलानी ने कहा कि ईद खुशी की मौका होता है. ऐसे में हमें इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि हमारी वजह से किसी अन्य को परेशानी नहीं हो. हम किसी भी तरह के कानून का उल्लंघन ना करें, क्योंकि इस्लाम कानून का उल्लंघन करने की इजाजत नहीं देता है. रास्तों और सार्वजनिक जगहों पर कुर्बानी न करें, बल्कि बड़े अहातों में कुर्बानी का एहतमाम करें. जिन जानवरों पर कानूनी तौर पर पाबंदी है, उनकी कुर्बानी करने से परहेज करें, साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें. कुर्बानी का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड न किया जाए, जो लोग नफली कुर्बानी का इरादा रखते हैं, बेहतर है कि वे लोग आफ़त में मुब्तिला लोगों की मदद करें, बिरादराने वतन के जज्बात का ख्याल रखे, उन्होंने कहा कि कुर्बानी उम्मत के मालदारों पर वाजिब है, लेकिन अगर कोई गरीब कुर्बानी पेश करें तो वह भी उसी सवाब का हकदार होगा. इसलिए प्यारे रसूल ने फरमाया कि खुशी दिल से कुर्बानी किया करो, सवाब भी मिलेगा और रोजी में भी बरकत होगी.

कुर्बानी की अदायगी में ऐसा काम न करें जिससे भाइयों और देश को तकलीफ हो (मौलाना सैयद मोईन मियां)।

कुर्बानी के दिन सावधानी बरतें ताकि पड़ोसी को तकलीफ न हो। (अल्हाज मुहम्मद सईद नूरी)

While offering sacrifice, do not do anything that causes trouble to your brothers and the country (Maulana Syed Moin Mian).

(स्टाफ रिपोर्टर) छोटा सोनापुर, ईदगाह मैदान, सुन्नी मस्जिद बिलाल में, मोइन अल-मशाइख़ के निमंत्रण पर कुर्बानी के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए देश के उलेमाओं, इमामों और बुद्धिजीवियों ने एक बैठक हुई।

इस बैठक की अध्यक्षता और नेतृत्व पीरे तरीकत मोइनुल मशाइख़, हजरत मौलाना सैयद शाह मोइनुद्दीन अशरफ अल-अशरफ अल-जिलानी, ऑल इंडिया सुन्नी जामियतुल उलमा के अध्यक्ष और तहफ़्फ़ुज़ ए नामुस ए रिसालत के संरक्षक श्री अल्हाज मुहम्मद सईद नूरी ने किया।

उलेमा और इमामों ने इस पवित्र त्योहार को शांतिपूर्ण तरीके से मनाने और कानून और व्यवस्था को खतरे में न डालने और अपने व्यवहार से किसी को नुकसान न पहुंचाने के बारे में अपनी उपयोगी सलाह दी और मोइन अल-मशाइख ने उलेमाओं और इमामों को संबोधित किया और कहा आपकी और हमारी जिम्मेदारी है कि हम लोगों को बताएं कि कुर्बानी के दिन ऐसा कोई काम न करें जिससे भाइयों को कष्ट हो और खून से सने कपड़े में गौश्त न लाए, पारदर्शी प्लास्टिक आदि में लपेटकर न लाएं।

कुर्बानी का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर न डालें, जिस बिल्डिंग या सोसायटी में कुर्बानी दें उसे तुरंत साफ कर लें ताकि वहां रहने वाले लोगों को दिक्कत न हो। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग भी कार्रवाई कर रहा है। प्रशासन भी कुर्बानी के मौके पर अच्छे प्रबंधन के लिए उलमा और जनता के साथ बैठक कर लोगों की सुविधा के लिए बेहतर से बेहतर इंतजाम करें और लोगों को सरकार और पुलिस के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए और कुर्बानी के कर्तव्यों का पालन करना चाहिए.

अहले सुन्नत के नेता श्री अल्हाज मुहम्मद सईद नूरी, आल इंडिया सुन्नी जमीयत उलमा के उपाध्यक्ष ने कहा कि हम ईद अल-कुर्बा के त्योहार को बेहतर बनाने के लिए उलमा और इमामों की एक बैठक आयोजित करने और एहतियाती कदम उठाने के लिए के लिए मोइन अल-मशाइख के आभारी हैं ताकि हम इस्लामी दायरे में रहते हुए कुर्बानी अदा कर सकें और पड़ोसियों का ख्याल रखें और ऐसा कुछ न करें जिससे मुसलमानों की छवि खराब हो, इस्लाम अच्छा काम करते हुए दूसरों को नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं देता है इसलिए हमें शांतिपूर्ण तरीके से कुर्बानी के कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।

उलेमाओं में शामिल मौलाना अब्दुल रहीम अशरफ़ी ने कहा कि हमें साफ़-सफ़ाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा है कि सफ़ाई ईमान का आधा हिस्सा है, सफ़ाई ज़रूरी है। मुफ्ती मुहम्मद इब्राहीम आसी साहब ने कहा कि कुर्बानी के दिन कुर्बानी पर्दे का इंतजाम करें और आसपास के इलाके के साथ-साथ ऊपरी हिस्से को भी ढक दें ताकि ऊंची इमारतों से कोई देख न सके।

अंत में मोईन अल-मशाइख ने देश में अमन-चैन, आस्था में दृढ़ता और आपसी भाईचारा व प्रेम के लिए दुआ की।


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Imran Siddiqui

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