पिछली पोस्ट में हमने लैलतुल कद्र या शबे क़द्र के बारे में बताया था। आज हम इस रात की इबादतों के बारे में बात करेंगे। इस रात की खास इबादत क़ुरान की तिलावत और नफ्ली नमाज़े व ज़िक्र हैं। इसलिए कुछ वक़्त तिलावत में बिताये कुछ नफ्ली नमाज़े पढ़े। और कुछ देर इस रात की खास दुआ अल्लाहुम्मा इन्नका अफुउन तुहिब्बुल अफ़्व फअफ़ो अन्नी पढ़े।
शबे क़द्र की नफ़्ल नमाज़े
4 रकात नमाज़ इस तरह पढ़े की हर रकात में एक बार अल्हम्दो शरीफ एक बार इन्ना अन्ज़लना और 27 बार कुल्हुवल्लाह शरीफ पढ़े। इंशाल्लाह अल्लाह करीम आपको गुनाहो से पाक फरमा देगा।
कम से कम 2 रकात ही खुलूस के साथ इस तरह पढ़े की हर रकात में सूरह फातेहा के बाद 1 बार इन्ना अन्ज़लना और 3 बार कुल्हुवल्लाह शरीफ पढ़े। इंशाल्लाह आपको शबे कद्र की बरकत हासिल होगी।
हज़रत अली शेरे खुदा फरमाते हैं, जो आदमी इस रात 7 बार सूरह अल क़द्र इन्ना अन्ज़लना पढ़ेगा। अल्लाह पाक उसे बलाओं और मुसीबतो से बचाता हैं, और 70 हज़ार फ़रिश्ते उसके लिए जन्नत की दुआ करते हैं।

हज़रत बीबी आइशा फरमाती हैं मैने अर्ज़ किया या रसुल्लाह, शबे क़द्र की रात क्या दुआ माँगे। आपने फ़रमाया अल्लाहुम्मा इन्नका अफुउन तुहिब्बुल अफ़्व फअफ़ो अन्नी।
2 रकात नमाज़ इस तरफ पढ़े की हर रकात में सूरह फातेहा के बाद 7 बार कुल्हुवल्लाह शरीफ और सलाम फेरने के बाद 70 बार अस्तग़फिरउल्लाह व अतूबो इलैहि पढ़े। अल्लाह पाक उसे और उसके माँ बाप के गुनाहो को बक्श देगा।
4 रकात नमाज़ इस तरफ पढ़े की हर रकात में सूरह फातेहा के बाद 3 बार इन्ना अन्ज़लना और 7 बार कुल्हुवल्लाह शरीफ पढ़े। इंशाल्लाह मौत के वक़्त की बेचैनी से महफूज़ रहेंगे।
4 रकात नमाज़ इस तरह पढ़े की हर रकात में अल्हम्दो शरीफ के बाद एक बार इन्ना अन्ज़लना और 27 बार कुल्हुवल्लाह शरीफ पढ़े। इस नमाज़ की बरकत से गुनाह माफ़ हो जायेंगे और अल्लाह पाक आपको जन्नत में आला मक़ाम अता फरमाएगा।
4 रकात नमाज़ इस तरह पढ़े की हर रकात में अल्हम्दो शरीफ के बाद 3 बार इन्ना अन्ज़लना और 50 बार कुल्हुवल्लाह शरीफ पढ़े और सलाम फेरने के बाद सजदे में सर रखकर एक बार सुब्हानल्लाहे वल्हम्दुलिल्लाहे व लाइलाहा इल्लल्लाहो वल्लाहो अकबर पढ़े। इंशाल्लाह आपको इस मुबारक रात की बेपनाह नेअमते नसीब होगी। इस रात 2 रकात तयीहतुल वुदु और 2 रकात तहियतुल मस्जिद पढ़ना भी बहुत सवाब रखता हैं।
इस रात अगर वक़्त मिले तो कम से कम एक बार सलातुल तस्बीह ज़रूर पढ़ने की कोशिश करे यह इतनी फ़ज़ीलत वाली नमाज़ हैं। अगर यह नमाज़ ज़िन्दगी में अगर एक बार भी पढ़ ली तो इसकी फ़ज़ीलत से इंशाल्लाह बन्दे के गुनाह माफ़ हो जाते हैं। लिहाज़ा कोशिश करे की यह नमाज़ रोज़ न पढ़ सके तो हफ्ते में एक बार वो भी न हो तो महीने में एक बार तो ज़रूर पढ़े।

सलातुल तस्बीह नमाज़ का तरीका
4 रकात नफ़्ल नमाज़ की नियत करे और नियत करने के बाद 15 बार सुब्हानल्लाहे वल्हम्दुलिल्लाहे व लाइलाहा इल्लल्लाहो वल्लाहो अकबर पढ़े अल्हम्दो और सूरत पढ़ने के बाद रुकू में जाने पहले यही तस्बीह 10 बार पढ़े रुकू में सुब्हान रब्बियल अज़ीम पढ़ लेने के बाद 10 बार रुकू से उठने के बाद सजदे में जाने से पहले 10 बार सजदे में जाने पर सुब्हान रब्बियल आला पढ़ लेने के बाद 10 बार फिर दूसरे सजदे में 10 बार यही तस्बीह पढ़े इस तरह हर रकात में 75 बार यह तस्बीह पढ़ी जाएगी और 4 रकात में 300 बार हो जाएगी।
अल्लाह पाक हम मुसलमानो को इस मुबारक रात की बरकतो से नवाज़े और अपनी इबादत की तौफीक बक्शे आमीन।
लैलतुल क़द्र या शबे क़द्र क्या हैं? What is Lailatul Qadr or Shabe Qadr
रमज़ान महीने की एक रात को लैलतुल कद्र कहा गया हैं। जो खैर व बरकत के एतबार से हज़ार महीनों से भी अफ़ज़ल रात हैं। उसी लैलतुल कद्र को कहीं कहीं शबे कद्र भी कहा जाता हैं। तो कुछ जगह इसे 27 वी शब भी कहा जाता हैं। हदीस के मुताबिक यह रात रमज़ान की 21, 23, 25, 27, 29 वी रात में से कोई एक रात हैं। कुछ बुज़ुर्गो ने 27 वी रात को ही लैलतुल कद्र माना हैं।

इस रात को लैलतुल कद्र इसलिए फ़रमाया गया हैं क्यूंकि इसी रात साल भर के लिए आर्डर जारी होते हैं। ज़िम्मेदार फ़रिश्ते अपने अपने रजिस्टरों में अगले साल होने वाले सारे काम लिख लेते हैं। और अल्लाह के हुक्म के मुताबिक अपने अपने काम अंजाम देते रहते हैं। इसी रात हज़रत आदम सफ़ीयुल्लाह अलैहिस्सलाम का बदन बनाने का सामान आसमान पर जमा किया जाने लगा। इसी रात हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम आसमान पर उठाये गए और इसी रात बनी इसराइल कौम की तौबा क़बूल हुई।
यह रात इबादत की लिए खास हैं। बुखारी शरीफ की हदीस हैं अल्लाह के रसूल फरमाते हैं जो आदमी ईमान व खुलूस के साथ इस रात जागकर अल्लाह की इबादत करेगा या कहे नमाज़क़ुरान पढ़ेगा। अल्लाह पाक अपने करम से उसके साल भर के गुनाह माफ़ फ़रमा देगा। इस लिए इस कीमती रात को यूं ही नहीं बिताना चाहिए। इस रात इबादत करने वाले को 83 साल 4 महीने से भी ज़्यादा इबादत करने का सवाब मिलता हैं। अल्लाह के रसूल फरमाते हैं जो आदमी इस रात महरूम रह गया या कहे जो आदमी इस रात इबादत नहीं कर सका गोया वह हर तरह के सवाब से महरूम रह गया।

आजकल देखा जाता हैं की कुछ नौजवान इस रात इबादत करने की बजाय सड़को पर तेज़ रफतार में मोटरबाइक दौड़ाते हुए नज़र आते हैं। आमजन को परेशान करते हैं। मस्जिद में इबादत करने की बजाय बाहर बैठकर सिगरेट बीड़ी फूँकते नज़र आते हैं। कुछ नौजवान आस पास की दरगाह में जाकर बेमतलब वक़्त ज़ाया करते हैं। और सेहरी होने तक ऐसे ही पूरी रात निकल लेते हैं। ऐसे लोग अल्लाह की नज़र में बहुत बड़े गुनहगार कहलायेंगे जो इबादत करने की बजाये इस तरह इस रात को इस तरह बर्बाद कर देते है। अल्लाह ऐसे लोगो को हिदायत दे।
इस लिए रमज़ान के मुबारक महीने और इस महीने की इस मुबारक रात की कद्र कीजिये इस रात ज़्यादा से ज़्यादा इबादत करके अपने गुनाहो से माफ़ी मांगे। इस रात बाज़ारो में आवारा गर्दी करने या घूमने की बजाये नौजवानो को मस्जिद या अपने घरों में इबादत करके अल्लाह से अपने गुनाहो की माफ़ी और आगे की ज़िन्दगी अच्छे से गुज़ारने,बीमारियों,मुहताजी से बचने अमन की ज़िन्दगी गुज़ारने की दुआ मांगनी चाहिए। अल्लाह हम सब को इस रात में इबादत करने की तौफीक अता फरमाए आमीन।

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