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मिल्लत ए इस्लामिया अक़ीदे तौहीद पर मजबूती से जम जाए तो पीछे मुडकर नही देखना पड़ेगा – अमीनुल हसन

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* तुम ही सर बुलंद रहोगे अगर तुम मोमिन हो इस विषय पर व्याख्यान संपन्न 

* जालना जिला जमाते इस्लामी हिंद का उपक्रम

जालना: मौजूदा हालात में  मिल्लत ए इस्लामिया को कई तरह की परेशानियों  से गुजरना पड़ रहा है. इन परेशानियों से निजात पाने के लिए कुरान व सीरत की रोशनी में समस्याओं को समझने की जरूरत है तथा उसी के मुताबिक अमल को अपनाने की जरूरत है. हर परेशानी का हल कुरान ए करीम और अंबिया की सीरत से हासिल होती है. मिल्लते इस्लामिया जिस दिन अक़ीदे तौहीद पर जम जाएगी उसे फिर पीछे मुड़कर देखना नहीं पड़ेगा.

Pilgrims in white ihram lining up at the Grand Mosque around the Kaaba under a blue sky with the black Kaaba cloth on the right.

यह प्रतिपादन जमाते इस्लामी हिंद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एस अमीनुल हसन ने किया. रविवार को शहर के डॉ बाबासाहेब आंबेडकर सभागृह में जमाते इस्लामी हिंद जालना द्वारा तुम ही सर बुलंद रहोगे अगर तुम मोमिन हो इस विषय पर व्याख्यान संपन्न हुआ. इस समय वे बोल रहे थे. इस समय मंच पर एकबाल पाशा, अब्दुल हफिज, मोहम्मद अब्दुल्लाह, हुसैन चाऊस, प्रा शकील खान, अब्दुल मुजीब,जमात के राज्य सहसचिव जुबेर अहमद खान, ख्वाजा अमिरुद्दीन, एकबाल कुरैशी आदि उपस्थित थे.

Night sky filled with stars over snow-capped mountains, with large white hand-drawn text reading 'Dhul Al-Qidah' and a subtitle 'Important Events and Dates'.
फोटोरविवार को शहर के डॉ बाबासाहेब आंबेडकर सभागृह में जमाते इस्लामी हिंद जालना द्वारा तुम ही सर बुलंद रहोगे अगर तुम मोमिन हो इस विषय पर व्याख्यान संपन्न हुआ जिसमें जमात के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एस अमीनुल हसन ने मार्गदर्शन किया

एस अमीनुल हसन ने आगे कहा कि,  नेगेटिव इमोशनस यानी मनफी रुझानात का मोमिन की जिंदगी में कोई महत्व नहीं है. उन्होंने पैगंबर मोहम्मद(सअ) की जीवनी का हवाला देते हुए कहा की  अपनी जिंदगी को पूर उम्मीद बनाए और इंसानियत की खिदमत करके हमारे मुल्क को आगे बढ़ाने में सहयोग करें. उन्होंने कहा कि,  मुसलमान कोई आसान नरम खून उम्मत नही है के कोई भी झपट पड़े. मुसलमान लोहे के चने की तरह है जिसे आसानी से दबाया नही जा सकता. जिंदगी में सफल होने के  चार फार्मूले का जिक्र करते हुए अमीनुल हसन ने कहा की  अगर हम इन चार चीजों पर अमल करेंगे तो कामयाब होंगे. इनमें नजरियाती तौर पर मजबूत बनने, अपने अंदर इंसानियत के जज्बे को परवान चढ़ाने, अपने अंदर रूहानियत पैदा करने के साथ ही  दावत ए दीन का फरीजा अंजाम देना जरूरी है. 

उन्होंने नवजवानों से कहा की,  नजरियाती तौर पर मजबूत बने, तौहीद, रिसालत और आखिरत के अक़ीदे पर मजबूती से बने रहते हुए अपनी जिंदगी को उसी तरह ढाल दे.  उन्होंने नवजावानों से अपील करते हुए कहा की २ मिनट वाली रीलस‌् की दुनिया से बाहर निकल जाए वरना जिंदगी के अहम कामों पर फोकस नही कर सकोगे और कुछ भी करने के काबिल नही रहाेगे.

Group of pilgrims in white ihram garments entering a shrine, with women in patterned hijabs nearby near an ornate doorway.

एस अमीनुल हसन ने सभी को  अपने अंदर इंसानियत के जज्बे को परवान चढ़ाने और  आपसी एकतलाफात को खत्म करने की अपील की.  अपने अंदर रूहानियत को पैदा करें और  अपना तालुक अल्लाह तआला से मजबूत से मजबूत तर करने के लिए नवाफील का एहतेमाम करे. इसके लिए जिक्र, असकार, तहज्जुद का एहतेमाम करें.

दावत ए दीन का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि, जिस तरह जमीन में बीज बोया जाता है और वो बीज फल बनकर दुनिया को फायदा पहुंचाता है उसी तरह हम दावत ए दिन का काम करते हुए  इंसानों की  दुनिया व आखिरत के लिए नफा बख्श बने. 

इस कार्यक्रम में ३०० से अधिक लोगों ने शिरकत की. कार्यक्रम की शुरुआत काजी तारिक नदवी द्वारा कुरान की तिलावत से की गई. सूत्रसंचालन डॉ खालिद मोहसिन ने किया. प्रस्तावना  शहराध्यक्षा शेख इस्माइल ने रखी और आभार जिलाध्यक्ष सैय्यद शाकीर ने माना.  


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Imran Siddiqui

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