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मां की गोद से  गोर (कब्र) तक रहनुमाई करता है इस्लाम – सलमान अजहरी

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*जलना में अजीमोशान सुन्नी इज्तेमा और जलसा ए दस्तारबंदी संपन्न

जालना: इस्लाम मुकम्मल दीन है जो मां की गोद से लेकर गोर(कब्र) तक हर जगह हमारी रहनुमाई करता है. जिस दिन हम पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) की सुन्नत पर अमल करेंगे और शरीयत के मुताबिक जिंदगी जिएंगे, हमारी तरक्की का एक नया दौर शुरू होगा. इसलिए युवाओं को नशे, संगीत और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर दिल में खाैफ ए खुदा रखते हुए अहकामें खुदावंदी पर अमल करना चाहीए.

यह बयान इस्लाम के मशहूर स्कॉलर मुंबई के मुफ्ती मोहम्मद सलमान अजहरी ने शुक्रवार रात जालना में आयोजित अजीमोशान सुन्नी इज्तेमा में दिया. इस इज्तेमा का आयोजन दरगाह सैयद अहमद शेर सवार उर्स के मौके किया गया था. इसकी सदारत रज़ा एकेडमी के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सईद नूरी ने की. नांदेड़ के हाफिज और कारी अमानुररब ने बेहतरीन संचालन किया. मुख्य अतिथि के रूप में मौलाना अब्बास रजवी मुंबई, कारी अब्दुल रहमान जियाई मुंबई, हाजी यूसुफ मेमन मुंबई के साथ  दरगाह के मुतवल्ली सैयद जमील मौलाना भी मौजूद थे.

आगे बोलते हुए मुफ्ती मोहम्मद सलमान अजहरी ने कुरान और हदीस की रोशनी में कई उदाहरण देते हुए लोगों से कहा की,  देश के मौजूदा हालात में इत्तेबा ए रसूल पर अमल करें और निडर और बेखौफ जिंदगी जिएं. उन्होंने लोगों को खुदावंद के आदेश का पालन करने की सलाह दी और यह भी कहा कि खौफ ए खुदा हर मर्ज की दवा है. मुसलमान उसवाए रसूल (सल्ल.) पर मुसलमान अपनी जिंदगी गुजारे और दुनिया और आखिरत में सफलता हासिल करें. उन्होंने कहा कि मुसलमान दुनिया की मोहब्बत और मौत की कराहत को दिल से निकाल दे, क्योंकि हमारे नबी ने फरमाया की जब हम पर दुनिया की मोहब्बत और मौत की कराहत आएगी तो उस वक्फ दिलों पर दुश्मनों का रौब होगा. जालीम हमेशा बुजदिल होता है इसलिए जरुरी है की हम सही रास्ते पर चल कर कुरान और हदीस की रोशनी में जिंदगी गुजारे.

*पूरी दुनिया को जिंदगी गुजारने का सलीका इस्लाम ने दिया

मुफ्ती मोहम्मद सलमान अजहरी ने कहा कि इस्लाम एक मुकम्मल दीन है और जाबता ए हयात है जो मां की गोद से लेकर गोर यानीकी की कब्र तक हमारी रहनुमाई करता है. आज हम जिस विकास की बात करते है उसे इस्लाम ने ही सिखाया है. चाहे वो हुकुमती निजाम हो, ज्यूडिशरी निजाम हो, मुल्क में रास्ते बनाने का निजाम हो, प्रशासनिक निजाम हो इन सब का तरीका इस्लाम ने ही सिखाया है. उन्होंने भारत के मुसलमानों से अपील करते हुए कहा की वे अपने मुकाम और हैसियत को पहचानें, आज भले ही सरकारी आंकड़े भारत में मुसलमानों को पिछड़ा करार देते है. लेकिन इतिहास गवाह है की जिस दिन मुसलमानों ने उस‌वाए रसूल पर अमल करना शुरू कर दिया उस दिन से फिर उन्हें कभी भी पीछे मुड़कर देखना नहीं पड़ेगा.

*इस समय दरगाह के मुतवल्ली सैयद जमील मौलाना ने मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों को असरी यानी दुनीयावी आला तालीम के साथ ही दीनी आला तालीम भी मुहैया करवाए.

 * बच्चों ने अंग्रेजी, मराठी और उर्दू में दीन की अहमियत पेश की

फोटो शुक्रवार को जालना में संपन्न हुए सुन्नी इज्तेमा में मार्गदर्शन करते हुए इस्लाम के मशहूर स्कॉलर मुंबई के मुफ्ती मोहम्मद सलमान अजहरी

अंग्रेजी स्कूलों के बच्चों के लिए संचालित पांच वर्षीय  आलिम ए दीन कोर्स  के छात्रों ने अपनी अरबी तालीम का मुजाहिरा अंग्रेजी, मराठी और उर्दू भाषा में पेश किया और दीनी तालीम की अहमियत को सबके सामने रखा. इन बच्चों की अंग्रेजी पर बेहतरीन पकड़ देखकर दरगाह परिसर तकबीर और रिसालत के नारों से गूंज उठा.

फोटो दरगाह सैयद अहमद शेर सवार उर्स के मौके पर शुक्रवार को जालना में संपन्न हुए सुन्नी इज्तेमा में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई

इज्तेमा की शुरुआत तिलावत ए कुरान से की गई. देश के मशहूर नात खां अहम रजा नूरी मियां ने शान ए रिसालत में नात व बुजुर्गाने दीन, बुजुर्गाने चिश्च व कादरिया, नक्शबंदी व सोहरवर्दिया में मनाकीब पेश कर इज्तेमा में रूहानी समा बांध दिया. इज्तेमा के तहत मदरसा दारुल उलूम गुलशने कादरिया अनवारे रजा के ६ हुफ्फाज को हिफ्ज ए कुरान पूरा करने पर दस्तार ए हिफ्ज(प्रमाणपत्र) से नवाजा गया. सलातो सलाम से कार्यक्रम का समापन किया गया.

दरगाह परिसर में उर्स के दौरान तीन दिन तक विविध मजहबी कार्यक्रम संपन्न हुए जिसे सफल बनाने के लिए दरगाह प्रशासन के साथ ही विविध सुन्नी तनजीमों और युवाओं का विशेष योगदान रहा. पुलिस और प्रशासन का भी सहयोग मिला.  .


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Imran Siddiqui

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