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शेख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैह.

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…. शेख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी रह० जिन्हें हमारे बड़े बुज़ुर्ग बड़े पीर के नाम से जानते हैं, ये इस्लामी दुनिया के एक बहुत बड़े दायी हुए हैं, यानी इस्लाम का पैग़ाम दुनिया में पहुँचाने की ख़िदमत को अंजाम देने वालों में सबसे नुमायां नाम शेख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैह का है

…. जब आप कमसिन बच्चे ही थे तब का एक वाकया बहुत मशहूर है, और ये वाकया हम सबने अपने स्कूल की किताबों में भी पढ़ा होगा कि बग़दाद के किसी मदरसे में जाकर इल्म हासिल करने के लिए शेख़ अब्दुल क़ादिर रह० की मां ने उनको एक काफ़िले के साथ भेजा, क्योंकि उस दौर में काफिलों के साथ अक्सर डकैत लूटपाट किया करते थे, सो मां ने उनके साथ रखी 40 दीनार की रक़म को शेख़ की जैकेट के अंदर रुई में छिपाकर इस तरह सी दिया कि बिल्कुल पता न चले.


फिर ये हुआ कि वाक़ई इनके काफ़िले को रास्ते में 60 डाकुओं ने लूट लिया. डाकुओं ने किसी को भी नहीं छोड़ा और सबों का माल व पैसे लूट लिये. लेकिन शेख़ अब्दुल क़ादिर को नन्हा जान कर किसी ने नहीं छेड़ा. चलते-चलते जब एक डाकू ने यूं ही पूछ लिया कि “ऐ लड़के तुम्हारे पास भी कुछ है?” तो अब्दुल क़ादिर रह० ने बेहद इत्मीनान से कहा कि हां मेरे पास भी 40 दीनार है, डाकू ने मजाक समझा और आगे निकल गया. एक दूसरे डाकू के साथ भी यही सब हुआ. जब लूट का माल लेकर डाकू अपने सरदार के पास पहुंचे और नन्हें बच्चे का जिक्र किया तो सरदार ने बच्चे को बुलाकर कर मिलना चाहा. सरदार ने भी जब वही बातें पूछा तो अब्दुल क़ादिर ने जवाब में वही अल्फ़ाज़ दोहराये कि मेरे पास चालीस दीनार हैं.


“डाकुओं के सरदार ने पूछा कि वो दीनार कहां हैं ? दिखते तो नही ?”
अब्दुल क़ादिर ने जवाब दिया “मेरी मां ने मेरे जैकेट में सी दिया है ताकि ताकि कोई उन्हें ढूंढ न सके और मुझसे छीन न सके” ये सब बताते हुए अब्दुल क़ादिर जिस वकार और इत्मीनान से बोल रहे थे, जिससे पता लगता था कि वो डाकुओं से बिल्कुल भी डर नही रहे… डाकू सरदार हैरत में पड़ गया था, उसके कहने पर डाकुओं ने शेख़ की जैकेट उतरवा कर फाड़ी तो 40 दीनार निकल आये
डाकू सरदार ने कहा कि “लड़के तुम आसानी से अपने दीनार बचा सकते थे, फिर इनके बारे में तुमने झूठ क्यों नही बोल दिया ?


इस पर नन्हे अब्दुल क़ादिर ने जवाब दिया कि मेरी मां ने मुझे ये सिखाया है कि हमेशा हर हाल में सच ही बोलना चाहिये, मैं तुम से झूठ बोलकर बच जाता लेकिन अल्लाह के यहाँ मैं एक झूठ का गुनाहगार होता, और अल्लाह तो सब जानता है, मैं अपने रब की निगाह में गुनाहगार नही बनना चाहता था”


… एक नन्हे बच्चे के मुंह से ऐसी बातें सुनकर सरदार को गहरी शर्मिंदगी ने घेर लिया कि एक नन्हा बच्चा जिसका राज़ कोई नही जानता था लेकिन ख़ुदा के यहां गुनाहगार बनने से बचने के लिए उसने अपना राज़ खोलकर ख़ुद को ख़तरे में डालना और लुटवाना पसन्द किया, और एक मैं हूँ जिसकी सारी ज़िंदगी गुनाह करते बीत गई है, न जाने ख़ुदा के यहां मेरा क्या अंजाम हो… ये सब सोचकर सरदार कांप गया, उसकी आँखों मे आंसू आ गए और उसने अपने गुनाहों का कफ़्फ़ारा करने का फ़ैसला करते हुए तमाम लोगों का लूटा हुआ माल वापस किया और शेख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी रह० को बहुत शाबाशियाँ देते हुए विदा किया
.
…. सोचिये, मदरसे जाने से पहले सिर्फ़ मां की बेहतरीन तरबियत ने कमसिन उम्र के अब्दुल क़ादिर जीलानी रह० की ज़ुबान और शख़्सियत में ऐसा असर रखा था तो मदरसे से दीनी तालीम लेने के बाद उनके कलाम और शख़्सियत में कितना गहरा असर आ गया होगा ?
कहते हैं कि जब अब्दुल क़ादिर जीलानी मदरसे के लड़कों के साथ खेलने जाते तो उनको जैसे कोई कहता कि तुम्हारा काम खेलना नही, ख़ुदा का पैग़ाम दुनिया में पहुचाना तुम्हारा काम है, जब वो सोने चलते, तो भी ये ख़्याल आता कि सोने में वक़्त निकालना तुम्हारा काम नही.


…. और फिर शेख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी ने अपना काम किया, जब आप रह० वाज़ और तक़रीर करते हज़ारों का मजमा वहां जुटने लगता, और अगली दफ़ा आप रह० को और बड़ी जगह का चुनाव करना पड़ता…
आज 11 रबी उल आख़िर है, जिस तारीख़ को शेख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी रह० की वफ़ात हुई थी…


…. अफ़सोस हमारे यहां की अवाम ने शेख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी रह० के नाम पर करामातों के क़िस्से ज़्यादा बुन लिए हैं, और शेख़ की तालीमात को बिल्कुल ही नज़रअनदाज़ किये बैठे हैं


जबकि शेख़ अब्दुल क़ादिर वो थे जिन्होंने मासूम उम्र में भी कितनी बेहतरीन तालीम दी थी कि गुनाह करके मैं सबसे तो बच जाऊंगा, लेकिन अल्लाह की निगाह से तो नही बच पाऊंगा, ये सोचकर मैंने झूठ नही बोला कि अल्लाह के यहां पकड़ा न जाऊं…..!!


….. सुब्हान अल्लाह, कितनी बेहतरीन बात, कि बन्दा अगर ये सोच बना ले कि ख़ुदा हर वक़्त हमसे बाख़बर है, तो कोई गुनाह वो न कर सकेगा,
बन्दा अगर ये सोच बना ले के ख़ुदा हमसे हर वक़्त बाख़बर है, तो वो कभी अपने रब की ज़ात से मायूस न होगा !!!

(Repost)


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Imran Siddiqui

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