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अराफात के मैदान पर चिलचिलाती धूप में की इबादत

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जालना: हज के लिए दुनिया भर से पहुंचे हाजियों के साथ ही मंगलवार को हज के दूसरे दिन जालना के हाजियों ने भी अराफात के मैदान पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते हुए चिलचिलाती धूप में कभी खड़े होकर तो कभी बैठकर इबादत करते हुए अपने रब से गुनाहों की माफी मांगी.

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जालना शहर के बुºहाणनगर के रहने वाले साजिद परसुवाले और बद्रुद्दीन एमआर भी हज यात्रा पर गए हुए है. इन्होंने बताया की  पहले दिन मीना में इबादत के बाद दूसरे दिन सुबह ही लोग अराफात के मैदान पर इबादत के लिए पहुंचे. इस मैदान पर जबले रहमत पहाडी पर भी लोगों ने पहुंचकर इबादत में समय बिताया. कडी धूप के बावजूद लोगों में हज के अरकान पूरे करने का उत्साह है.

देर शाम को सभी हाजी मुजदलफा के लिए रवाना होंगे तथा वहीं पर मगरिब की नमाज अदा करेंगे.  मुजदलफा में भी यात्री रात भर इबादत करेंगे. राज मोहम्मद तांबोली ने बताया की मुजदलफा में की जाने वाली इबादत शबे कद्र की रात में की जाने वाली इबादत से भी ज्यादा अफजल है. यहां से हाजी ७०  कंकर जमा करेंगे. यह कंकर तीनों शैतानों को मारने के लिए उपयोग में लाए जाएंगे.

राज मोहंमद तांबोली ने बताया की, अराफात का मैदान वही ऐतिहासिक मैदान है जहां पर अल्लाह तआला द्वारा मानव कल्याण के लिए भेजे गए सभी पैगंबरों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है. इस्लाम के अंतिम पैगंबर मुहम्मद (सअ) ने भी अपना आखिरी संदेश इसी मैदान से जारी किया था. जिसमें उन्होंने लोगों को औरतों के साथ बेहतरीन बर्ताव करने का आदेश भी दिया था.  

* साल में एक बार खुलती है मस्जिद ए निमरा

यह मैदान वही मैदान है जहां हजारों साल पहले पैगंबर इब्राहीम (अस) ने अपने हाथों से मस्जिद का निर्माण किया था. यह मस्जिद आज भी इसी मैदान पर है. जिसे मस्जिदे निमरा कहा जाता है. यह मस्जिद साल में एक ही बार खोली जाती है. आज भी पूरी दुनिया से आए हाजियों को इसी मस्जिद से खुदबा (संदेश) दिया जाता है. 


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Imran Siddiqui

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