Advertisement

अच्छी दीनी और इस्लामी बातों 

c36383c8d14fe7c5662eccf7de004d734260002010677853391

आज के आर्टिकल में हम कुछ और अच्छी दीनी और इस्लामी बातों पर नज़र डालेंगे इससे पहले भी हम एक आर्टिकल में कुछ दीनी और इस्लामी बातों को बता चुके हैं आज फिर हम कुछ और इस्लामी बातों के बारें में आप को बताएँगे। आपसे गुज़ारिश हैं की इन सब बातों पर आप गौर करे और जो बताया जा रहा हैं उसे अच्छे से पढ़े और समझे और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को बताएं। 

रमज़ान के रोज़े फ़र्ज़ हैं जो शख्स इसके फ़र्ज़ होने से इंकार करे वह काफिर हैं।

रमज़ान का रोज़ा छोड़ देना इतना भारी हैं की सारी उम्र रोज़ा रखने के बाद भी उसका हक़ अदा नहीं होगा। 

जो लोग रोज़े में होने के बावजूद झूठ, चुगली और किसी की ग़ीबत करते हैं ऐसे लोग रोज़े के सवाब के हक़दार नहीं होते। 

अल्लाह को ऐसे लोग बहुत प्यारे लगते है जो रमज़ान के महीने में ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को रोज़ा इफ्तारी करवाते हैं। 

जो शख्स अपने दीनी भाई और बहनो की बख्शीश के लिए दुआ करता हैं। अल्लाह पाक उसे इसके बदले में ढेर सारी नेकी अता फरमाता हैं।

रमज़ान के महीने में ज़्यादा से ज़्यादा ज़कात देने वाले लोगों के घरो में कभी पैसो की तंगी नहीं आती हैं। 

जब दो मुसलमान मिलते हैं और सलाम व मुसाफहा के बाद दुरूद शरीफ पढ़ते है तो उनके अलग होने से पहले ही उनके गुनाह बख्श दिए जाते हैं। 

image-4

किसी ज़रूरतमंद दीनी भाई को क़र्ज़ देने वालो को उससे दो गुना खैरात करने जितना सवाब हासिल होता हैं। 

किसी का दिल खुश करना भी एक तरह की इबादत हैं। 

सलाम का जवाब देना, किसी बीमार की खैरियत मालूम करना, जनाज़े में शरीक होना, किसी की दावत कबूल करना इस्लामी हक़ हैं। 

किसी के घर जाओ तो तीन बार उनसे अंदर आने की इजाज़त लो अगर तीनो मर्तबा इजाज़त न मिले तो वापिस चले जाओ। 

अपने इलाके या शहर के गरीबो के घरों पर नज़र ज़रूर रखो। ज़रूरत होने पर जो ज़रूरत की चीज़े हैं जितना हो सके उतना उन्हें दे दो। यह भी एक तरह की इबादत हैं।

हराम पैसो से ख़रीदे कपड़ो में नमाज़ कबूल नहीं होती। 

किसी की तकलीफ दूर करने वाले, नबी को सुन्नत को ज़िंदा रखने वाले और नबी पर दरूद भेजने वाले क़यामत के दिन अर्शे इलाही के साये में रहेंगे। 

ऐसे वलिमों में जाना बहुत बुरा हैं जहाँ सिर्फ मालदारों को बुलाया जाता हैं और गरीब को न बुलाया जाये। 

create-a-highly-detailed-high-resolution-image-depicting-the-supreme-court

अगर किसी शख्स से दीन की कोई बात पूछी जाये और वह जानते हुए भी जान बुझ कर छुपाये तो क़यामत में ऐसे शख्स के मुँह में आग लगा दी जाएगी। 

माँ बाप की खिदमत करना, अपने हक़ के लिए लड़ना, कमज़ोर गरीब लोगों के लिए लड़ना और किसी का घर आबाद करना भी जिहाद हैं । 

अपने भाई को मुसीबत में होने पर खुश होने वाला शख्स किसी न किसी दिन उससे भी बड़ी मुसीबत में पड़ जायेगा। 

जिस घर में सूरह बकर: पढ़ी जाती हैं उस घर में कभी शैतान नहीं आता।

बड़े भाई का हक़ छोटे भाई पर वैसा ही हैं जैसा बाप का हक़ अपने बेटे पर। 

जिसने किसी यतीम लड़की की अच्छी परवरिश करके उसकी शादी अच्छे घर में कर दी ऐसा शख्स अल्लाह के बहुत करीब रहेगा।

झूठी गवाही देना शिर्क के बराबर हैं। 

जो लोग अपने रिश्तेदारों के घरों में हो रहे झगड़ो को देखकर खुश होते हैं। ऐसे लोगों का नसीब कभी नहीं चमकता। 

शिर्क के बाद सबसे बड़ा गुनाह माँ बाप की नाफरमानी करना हैं। 

अमामा (साफा) बांध कर नमाज़ पढ़ने से 25 गुना ज़्यादा सवाब हासिल होता हैं।

अगर रोज़ी में बरकत चाहते हो तो माँ बाप और रिश्तेदारों से अच्छा बर्ताव करो।

जो आदमी रोज़ाना कलमए तैयबा ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर्रसूल्लाह 100 मर्तबा पढ़ेगा उसका चेहरा क़यामत के दिन चाँद की तरह रोशन होगा। 

जो आदमी भूक की हालत में यासीन शरीफ पढ़ेगा। अल्लाह पाक उसकी ज़िन्दगी को रोशन कर देगा।

create-a-highly-detailed-high-resolution-image-depicting-the-supreme-court-1

रमज़ान के रोज़ों का फर्ज़ क्या है और यदि कोई व्यक्ति इन रोज़ों को छोड़ देता है तो उसका क्या हक़ है?

रमज़ान के रोज़े फर्ज़ हैं, और जो व्यक्ति इन्हें छोड़ देता है वह काफिर माना जाएगा।

  • रमज़ान के रोज़ों का फर्ज़ और उनके छोड़ने का अर्थ: रमज़ान के रोज़े फ़र्ज़ हैं, और जो इसे छोड़ देता है वह काफिर माना जाता है, उनके द्वारा इन रोज़ों का बाकी लाभ नहीं मिलता।
  • झूठ, चुगली और ग़ीबत का प्रतिबंध: रोज़े के दौरान झूठ, चुगली और ग़ीबत करने वाले लोग रोज़े का सवाब पाने के हकदार नहीं होते।
  • भाईचारे को बढ़ावा देने वाली आदतें और फज़ीलत: दुआ करना, मसाफह करना, सलाम का जवाब देना, बीमार का हाल जाना और दावत स्वीकार करना जैसी आदतें भाईचारे को मजबूत बनाती हैं और नेकियों का वज़न बढ़ाती हैं।
  • घरों में सूरह बकरा पढ़ने का विशेष लाभ: घर में सूरह बकरा पढ़ने से शैतान घर में प्रवेश नहीं करता, जिससे घर सुरक्षित और नैतिक बनता है।
  • रिश्तेदारों की मदद और अच्छा व्यवहार की महत्वपूर्णता: रिश्तेदारों की मदद और अच्छा बर्ताव करने से घरों में रोज़ी में बरकत आती है और कभी पैसे की तंगी नहीं रहती।

क्या झूठ, चुगली और ग़ीबत करने वाले लोग रोज़े का सवाब पाने के हकदार नहीं होते?

हां, यदि रोज़े के दौरान झूठ, चुगली और ग़ीबत की जाए तो ऐसे लोग रोज़े का सवाब नहीं पा सकते।

इस्लाम में भाईचारे को बढ़ावा देने वाली कौन सी आदतें हैं और इनमें क्या फज़ीलत है?

दुआ करना, मसाफह करना, सलाम का जवाब देना, बीमार का हाल जानना और दावत को स्वीकार करना जैसी आदतें भाईचारे को मजबूत बनाती हैं और इनसे नेकियों का वज़न बढ़ता है।

घर में सूरह बकरा पढ़ने का क्या फायदा है?

घर में सूरह बकरा पढ़ने से शैतान घर में प्रवेश नहीं करता, जो घर को नैतिक और सरफराज़ बनाता है।

रिश्तेदारों की मदद और good व्यवहार के क्या फायदे हैं, खासकर रोज़ी में बरकत के संदर्भ में?

रिश्तेदारों के साथ अच्छा बर्ताव और मदद करने से रोज़ी में बरकत आती है और घरों में कभी पैसों की तंगी नहीं रहती।

अच्छी दीनी और इस्लामी बातों 


Discover more from Nayi Soch News-e-Hub

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

author avatar
Imran Siddiqui

Discover more from Nayi Soch News-e-Hub

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading