* उर्स के मौके पर जालना में हुआ विशेष बयान
जालना: तमाम अंबिया और रसूलों के बाद तमाम मुसलमानों में सबसे अफजल शख्सियत अबू बक्र सिद्दीक (रजि) की है. उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इस्लाम के लिए वक्फ कर दी. पैगंबर मुहम्मद (सअ) ने कहा है कि हर मुसलमान पर लाजमी व जरुरी है की वो अबू बक्र सिद्दिक (रजी) से मोहब्बत करें और उनका शुक्र अदा करें.
अबू बक्र सिद्दिक(रजी) के उर्स के मौके पर जालना स्थित आरेफ कॉलनी की जमजम मस्जिद में जुमा की नमाज के पहले यह बात काजी अल्लाह बख्श अमजदी ने कही.
उन्होंने आगे बयान करते हुए फरमाया कि, अबु बक्र सिद्दीक ने अपने दौरे हुकूमत में गरीबों, बेवाओं, मोहताजों का खूब खयाल रखा. यतीमों और बेवाओं के लिए वजीफे जारी करवाया. रात के अंधेरे में निकल कर वे लोगों की देखरेख किया करते थे और उनके हालात का जायजा लेते थे.

अबू बक्र सिद्दीक इस्लाम के पहले खलीफा रहे. कुरान को भी सबसे पहले उन्होंने ही जमा फरमाया. हुज़ूर ए अकरम पैगंबर मोहम्मद (सअ) ने उन्हें इमामत का हुक्म दिया और खुद हुजूर ने भी उनकी इकतेदा में कई नमाजे पढी. वाकया मेराज की तस्दीक भी सबसे पहले अबू बक्र सिद्दीक (रजि) ने की तथा सबसे पहले इमान भी वे ही लाए और अपनी पूरी जिंदगी हुजूर के साथ गुजारी.
काजी अल्लाह बख्श अमजदी ने कहा कि अबू बक्र सिद्दीक (रजि) ने २२ जुमादील आखीर में विसाल फरमाया और वे गुंबद ए खजरा के नीचे हुजूर के पहलू में दफनाया गए. उनकी शान में कुरान मजीद में भी कई आयतें नाज़िल हुई और कई हदीस में उनकी शान और अजमत को बयान किया गया है.
*हानिया जरीन का दौर ए कुरान शुरु

जुमा के दिन आयोजित इस बयान के कार्यक्रम में जमजम मदरसे की छात्रा हानिया ज़रीन हफीज़ वाली अहमद मनियार के दौर ए कुरान की शुरुआत भी की गई. इस समय सभी ने उसे मुबारकबाद दी. मदरसे की छात्रा हानिया जरीन ने कुरान की तिलावत करते हुए सुरे फातिहा पढ़ कर कुरान का आगाज़ किया . नमाज के बाद सलातो सलाम पढ़ी गई और दुआ के बाद तबर्रुक बांटा गया.

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