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फ़साद और घमंड का अंजाम – क़ुरआन की रहनुमाई

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The consequences of mischief and arrogance – guidance from the Quran

क़ुरआन 2:205-206 की हिदायत

क़ुरआन-ए-पाक इंसान को सही रास्ता दिखाने के साथ-साथ उसे गुमराही और बदी से बचने की तलकीन भी करता है। सूरह अल-बक़रह (Quran 2:205-206) में अल्लाह तआला उन लोगों का तज़किरा करते हैं जो ज़मीन में फसाद फैलाते हैं, लेकिन जब उन्हें रोका जाता है, तो वो और ज़्यादा अकड़ जाते हैं।

ज़मीन में फसाद और बरबादी (corruption in society)

“और जब वो चला जाता है, तो वो ज़मीन में फसाद फैलाने की कोशिश करता है और खेती और मवेशियों को तबाह कर देता है। और अल्लाह फसाद को पसंद नहीं करता।” (क़ुरआन 2:205)

इस आयत में उन लोगों की निशानदेही की गई है जो दुनिया में तबाही मचाने के लिए तरह-तरह के हतकंडे अपनाते हैं। कभी ये सियासी (political) तो कभी मआशी (economic) फसाद की शक्ल में होता है। जुल्म, नाइंसाफी और धोखा किसी भी सूरत में जायज़ नहीं, और क़ुरआन इसकी सख़्त मुख़ालफ़त करता है।

गुनाह पर घमंड (arrogance in sin)

“और जब उससे कहा जाता है कि ‘अल्लाह से डरो’, तो वो घमंड में आकर और गुनाह करने लगता है। उसके लिए जहन्नम ही काफ़ी है और वो बहुत बुरा ठिकाना है।” (क़ुरआन 2:206)

इस आयत में उन लोगों का तज़किरा किया गया है जो जब ग़लत रास्ते पर चल रहे होते हैं और उन्हें कोई नेक सलाह देता है, तो वो उसे सुनने के बजाय और भी ज़्यादा अकड़ जाते हैं। ये अहंकार (ego) इंसान को तबाही की तरफ़ ले जाता है। इंसान को चाहिए कि वो अपने गुनाहों का एतराफ़ करे और नेकी के रास्ते पर लौट आए।

इन आयतों से सीख (moral lessons from Quran 2:205-206)

  • 1. फसाद से बचो (fight against corruption) – हर तरह के ज़ुल्म, धोखे और बेईमानी से बचना जरूरी है, चाहे वो किसी भी शक्ल में हो।
  • 2. अकड़ मत दिखाओ (avoid arrogance) – अगर कोई नेक सलाह दे, तो उसे घमंड की वजह से ठुकराने के बजाय उस पर अमल करना चाहिए।
  • 3. अल्लाह का इंसाफ़ यक़ीनी है (divine justice is inevitable) – अल्लाह हर छोटे-बड़े अमल का हिसाब लेने वाला है। दुनिया और आख़िरत, दोनों में इंसाफ़ होगा।

गौर-ओ-फ़िक्र की दावत (self-reflection and repentance)

क़ुरआन की ये आयतें हमें अपनी ज़िंदगी पर गौर करने का मौका देती हैं। क्या हम किसी भी तरह के फसाद या नाइंसाफी में शामिल हैं? क्या हम नेक नसीहत को सुनने के बजाय घमंड में आ जाते हैं? अगर हां, तो हमें अपने अमल सुधारने की ज़रूरत है।

आपकी क्या राय है?

इन आयतों से आपको क्या सीख मिली? क्या आज के दौर में भी ये मसले मौजूद हैं? अपने ख्यालात कमेंट में लिखें और इस पोस्ट को दूसरों तक पहुंचाएं।

fasaad aur ghamand ka anjaam – quraan kee rahanumaee

Key points: corruption in society, arrogance in sin, divine justice, self-reflection, Islamic teachings, Quran 2:205-206, fight against corruption, avoid arrogance, true success.

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इमरान सिद्दीकी

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