अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाही व बरकातुह
या अल्लाह हमारे इल्म, रिज़्क़ और अमल में बरकत अता फरमा। साथ ही, हमें क़ुरान को पढ़ने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमा।
ईमान और नेक अमल: सूरह अल-अनकबूत 29:9
हिंदी भावार्थ:
“और जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए, उन्हें हम ज़रूर नेक लोगों में शामिल करेंगे।”
(सूरह अल-अनकबूत, आयत 9)
मतलब:
यह आयत बताती है कि जो लोग ईमान लाते हैं और अच्छे काम करते हैं, अल्लाह उन्हें नेक बंदों में शामिल करता है।
परीक्षा के समय ईमान: सूरह अल-अनकबूत 29:10
हिंदी भावार्थ:
“और कुछ लोग कहते हैं कि हम अल्लाह पर ईमान लाए। लेकिन जब उन्हें अल्लाह के रास्ते में कोई तकलीफ पहुँचती है, तो वह लोगों की दी हुई तकलीफ को अल्लाह के अज़ाब जैसा समझने लगते हैं। और जब तुम्हारे रब की मदद आती है, तो कहते हैं कि हम तुम्हारे साथ थे। क्या अल्लाह को उन बातों का इल्म नहीं जो दिलों में छुपी हैं?”
(सूरह अल-अनकबूत, आयत 10)
संक्षिप्त समझ:
इस आयत में उन लोगों का जिक्र है जो केवल ज़ुबानी ईमान का दावा करते हैं, लेकिन मुश्किल हालात में अपने ईमान से पीछे हट जाते हैं। यह लोग जब मुसलमानों को मदद मिलती देखते हैं, तो उनके साथ होने का झूठा दावा करते हैं। अल्लाह उनके दिलों की हकीकत से वाकिफ़ है।
सामान्य दुआ:
ऐ अल्लाह, हमें सच्चा ईमान, नेक अमल और हर हाल में सब्र करने की तौफ़ीक़ अता फरमा। हमें अपने रास्ते पर चलने की हिम्मत और क़ुरान के मुताबिक़ ज़िंदगी बिताने की समझ बख़्श। आमीन।
(इस्लामी तालीमात पर अमल और ईमान को मजबूत करने का पैग़ाम दिया गया है।)
मूल संदर्भ और आगे का अध्ययन
इन आयतों को उनके पहले और बाद के संदर्भ के साथ पढ़ें। आयत 29:11 भी इस चर्चा का हिस्सा है। ऊपर दिया गया हिंदी पाठ भावार्थ है; अरबी मूल और विस्तृत तफ़्सीर के लिए आयत और तफ़्सीर देखें। सामान्य दुआ को किसी खास हदीस का उद्धरण न समझें।
संबंधित अध्ययन: कुरआन में पैगम्बरों की दुआएं · अन्य इस्लामी लेख
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