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सूरह रहमान पढ़ने के हैरत अंगेज़ फायदे और बरकतें Amazing benefits and blessings of reading Surah Rahman

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सूरह रहमान पढ़ने के हैरत अंगेज़ फायदे और बरकतें soorah rahamaan padhane ke hairat angez phaayade aur barakaten

अगर किसी शख्स पर जादू टोने का असर हुआ है तो वह सूरह रहमान की तिलावत करें इससे बुरी नजर और जादू टोने से अल्लाह पाक उसकी हिफाजत फरमाते हैं. और जो शख्स इसे रोजाना पढ़ता है वह हर तरह के जादू और दुश्मनों की नजर से बचा रहता है.

सूरह रहमान पढ़ने के हैरतअंगेज फायदे और बरकतें Amazing benefits and blessings of reading Surah Rahman

सूरह रहमान कुरान मजीद की 55 वी सूरह है और यह 27वे पारे में मौजूद है। इस सूरह को मक्की सुरह कहा जाता है। सूरह रहमान में हमें पता चलता है कि अल्लाह अपने बंदों पर कितना मेहरबान रहता है. सूरह रहमान को पढ़ने से दिल को सुकून मिलता है अगर कोई शख्स रोजाना सूरह रहमान की दिल से तिलावत करता है तो वह शख्स हर तरह की बीमारी से बचा रहता है और अल्लाह पाक ऐसे शख्स की दुनिया में तो मदद करते ही है साथ ही साथ आखिरत में भी अल्लाह उस बंदे का साथ देते हैं. सूरह रहमान को पढ़कर अल्लाह से अपनी मगफिरत की दुआ मांगता है तो अल्लाह उस शख्स को माफ कर देता है. अगर किसी शख्स को नींद ना आने की बीमारी है तो उसे रोजाना ईशा की नमाज के बाद सूरह रहमान पढ़ कर सोना चाहिए ऐसा रोजाना करने से इंशाल्लाह नींद ना आने की बीमारी दूर हो जाएगी.

सूरह रहमान की कई सारी फजीलतें है और अल्लाह पाक ने सूरह रहमान में इतनी ताकत रखी है कि जो शख्स इस तरीके से सूरह रहमान को पढ़ ले उस शख्स की दुआएं इंशा अल्लाह जरूर कबूल होगी.

Amazing benefits and blessings of reading Surah Rahman

आपको करना ये है कि किसी भी नमाज के बाद 1 बार दरूदे इब्राहिम पढ़ना है उसके बाद सूरह रहमान पढ़ना है और उसके बाद 1 बार फिर से दरूदे इब्राहिम पढ़ना है और जब आप इसे पढ़ रहे हो तो ध्यान रहे कि आपको बिल्कुल दुनियावी बातें नहीं करना है और अपना पूरा ध्यान इसी में लगाना है.

और इसके बाद आपकी जो भी मुराद है उसे अल्लाह के सामने पेश करना है इंशा अल्लाह, अल्लाह रहम करने वाला है हमारी दुआओं को कुबूल करने वाला है वह आपकी दुआ जरूर सुनेगा और आपकी सभी जायज मुरादे पूरी करेगा.

सूरह रहमान हिंदी में

पहले ही लफ़्ज़ अर रहमान को इस सूरा का नाम करार दिया गया है. इसका मतलब ये है कि जो अल रहमान से शुरू होती है ताहम इस नाम को सूरत के मजमून से भी गहरी मुनासबत है, क्योंकि इस में शुरू से आखिर तक अल्लाह ताला की सिफ़त को बताया गया है आज हम बताएंगे Surah Rahman Hindi में. 

सूरह रहमान मदनी है और इस में 78 आयतें हैं, इस सुरह में हमारी रोज़ाना की ज़िन्दगी में आने वाली परेशानी और मुश्किलात का हल मौजूद है, इस सूरे में अल्लाह ताला ने जो नेमते हम लोगो को दी है उसको याद दिलाया है, हम लोगो को चाहिए की अल्लाह की दी हुई नेमतों का शुक्र अदा करे जैसे की शुक्र अदा करने का हक़ है.

Surah Rahman Hindi Tarjuma

यहाँ पर सूरे रहमान के अरबी अल्फाज़ को हिंदी में लिखा है जिससे जिसको अरबी नहीं आती वो भी अरबी अल्फाज़ को पढ़ सकता है, और उसके निचे हिंदी तर्जुमा भी लिखा है, आप हिंदी का तर्जुमा भी पढ़ सकते है

अऊजु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम बिस्मिल्ला हिर रहमानिर रहीम – अल्लाह के नाम से शुरू करता हूँ जो बहुत मेहरबान रहमत वाला हैं.

1. अर रहमान – वही बेहद मेहरबान खुदा है.

2. अल लमल कुरआन – जिसने कुरान की तालीम दी.

3. खलक़ल इंसान – उसी ने इंसान को पैदा किया.

4. अल लमहुल बयान – और उसको बोलना सिखाया.

5. अश शम्सु वल कमरू बिहुस्बान – सूरज और चाँद एक ख़ास हिसाब के पाबन्द हैं.

6. वन नज्मु वश शजरू यस्जुदान – तारे और दरख़्त ( पेड़ ) सब सजदे में हैं.

7. वस समाअ रफ़ाअहा व वदअल मीज़ान – उसी ने आसमान को बलंद किया और तराज़ू कायम की.

8. अल्ला ततगव फिल मीज़ान – ताकि तुम तौलने में कमी बेशी न करो.

9. व अक़ीमुल वज्ना बिल किस्ति वला तुख सिरुल मीज़ान – इन्साफ के साथ ठीक ठीक तौलो और तौल में कमी न करो.

10. वल अरदा वदअहा लिल अनाम – और ज़मीन को उसने मख्लूक़ के लिए बनाया है.

11. फ़ीहा फाकिहतुव वन नख्लु ज़ातुल अक्माम – जिसमें मेवे और खजूर के दरख़्त हैं, जिनके खोशों पर गिलाफ़ चढ़े हुए हैं.

12. वल हब्बु जुल अस्फि वर रैहान – और जिसमें भूसे वाला अनाज और ख़ुशबूदार फूल होता है.

13. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुटलाओगे.

14. खलक़ल इन्सान मिन सल सालिन कल फख्खार – उसने इंसान को ठीकरे जैसी खनखनाती हुई मिट्टी से पैदा किया.

15. व खलक़ल जान्ना मिम मारिजिम मिन नार – और जिन्नात को आग के शोले से पैदा फ़रमाया है.

16. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुटलाओगे.

17. रब्बुल मश रिकैनि व रब्बुल मगरिबैन – वही दोनों मशरिकों और दोनों मगरिबों का भी रब है.

18. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

19. मरजल बह रैनि यल तकियान – उसने दो ऐसे समुद्र जारी किये, जो आपस में मिलते हैं.

20. बैनहुमा बरज़खुल ला यब गियान – लेकिन उन दोनों के दरमियान एक रुकावट है कि दोनों एक दुसरे की तरफ़ बढ़ नहीं सकते.

21. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

22. यख रुजू मिन्हुमल लुअ लूऊ वल मरजान – उन दोनों से बड़े बड़े और छोटे छोटे मोती निकलते हैं.

23. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

24. वलहुल जवारिल मून शआतु फिल बहरि कल अअ’लाम – और उसी के कब्जे में रवां दवा वो जहाज़ हैं जो समुद्र में पहाड़ों की तरह ऊंचे खड़े हैं.

25. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

26. कुल्लू मन अलैहा फान – जो कुछ भी ज़मीन पर है सब फ़ना होने (मिटने) वाला है.

27. व यब्का वज्हु रब्बिका जुल जलालि वल इकराम – और सिर्फ़ आप के रब की ज़ात बाक़ी रहेगी जो बड़ी इज्ज़त व करम व करम वाली होगी.

28. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

29. यस अलुहू मन फिस समावाती वल अरज़ि कुल्ला यौमिन हुवा फ़ी शअन – आसमानों ज़मीन में जो लोग भी हैं, वो सब उसी से मांगते हैं हर रोज़ उस की एक शान है.

30. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

31. सनफ रुगु लकुम अय्युहस सक़लान – ए इंसान और जिन्नात ! अनक़रीब हम तुम्हारे हिसाबो किताब के लिए फारिग़ हो जायेंगे.

32. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

33. या मअशरल जिन्नि वल इन्सि इनिस त तअतुम अन तन्फुजु मिन अक तारिस सामावती वल अरज़ि फनफुजू ला तन्फुजूना इल्ला बिसुल तान – ए इंसानों और जिन्नातों की जमात ! अगर तुम आसमान और ज़मीन की हदों से निकल भाग सकते हो तो निकल भागो मगर तुम बगैर जबरदस्त कुव्वत के नहीं निकल सकते.

34. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

35. युरसलू अलैकुमा शुवाज़ुम मिन नारिव व नुहासून फला तन तसिरान – तुम पर आग के शोले और धुवां छोड़ा जायेगा फिर तुम मुकाबला नहीं कर सकोगे.

36. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

37. फ़इजन शक़ क़तिस समाउ फकानत वर दतन कद दिहान – फिर जब आसमान फट पड़ेगा और तेल की तिलछट की तरह गुलाबी हो जायेगा.

38. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

39. फयौम इज़िल ला युस अलु अन ज़मबिही इन्सुव वला जान – फिर उस दिन न किसी इंसान से उसके गुनाह के बारे में पूछा जाएगा न किसी जिन से.

40. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

41. युअ रफुल मुजरिमूना बिसीमाहुम फ़युअ खजु बिन नवासी वल अक़दाम – उस दिन गुनाहगार अपने चेहरे से ही पहचान लिए जायेंगे, फिर वो पेशानी के बालों और पांव से पकड़ लिए जाएंगे.

42. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

43. हाज़िही जहन्नमुल लती युकज्ज़िबू बिहल मुजरिमून – यही वो जहन्नम है जिसको मुजरिम लोग झुटलाया करते थे.

44. यतूफूना बैनहा व बैन हमीमिन आन – वो दोज़ख़ और खौलते हुए पानी के दरमियान चक्कर लगाएंगे.

45. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

46. व लिमन खाफ़ा मक़ामा रब्बिही जन नतान – और जो अपने रब के सामने खड़े होने से डरता था उसके लिए दो जन्नते हैं.

47. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

48. ज़वाता अफ्नान – दोनों बाग़ बहुत सी टहनियों वाले ( घने ) होंगे.

49. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

50. फीहिमा ऐनानि तजरियान – दोनों में दो चश्मे बह रहे होंगे.

51. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

52. फीहिमा मिन कुल्लि फकिहतिन ज़वजान – उन बागों में हर मेवे दो दो किस्मों के होंगे.

53. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

54. मुततकि ईना अला फुरुशिम बताईनुहा मिन इस्तबरक़ वजनल जन्नतैनी दान – ( जन्नती लोग ) ऐसे बिस्तरों पर आराम से तकिया लगाये होंगे जिन के अस्तर दबीज़ रेशम के होंगे और दोनों बाग़ों के फ़ल (क़रीब ही) झुके हुए होंगे.

55. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

56. फ़ी हिन्ना कासिरातुत तरफि लम यतमिस हुन्ना इन्सून क़ब्लहुम वला जान – उन में नीची नज़र रखने वाली हूरें होंगी, जिन को उन से पहले न किसी इंसान ने हाथ लगाया होगा न किसी जिन ने.

57. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

58. क अन्न हुन्नल याकूतु वल मरजान – वो हूरें ऐसी होंगी जैसे वो याकूत और मोती हों.

59. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

60. हल जज़ा उल इहसानि इल्लल इहसान – भला अहसान ( नेक अमल ) का बदला अहसान ( बेहतर अज्र ) के सिवा कुछ और भी हो सकता है.

61. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

62. वमिन दूनिहिमा जन नतान – और उन दो बाग़ों के अलावा दो और बाग़ भी होंगे.

63. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

64. मुद हाम मतान – जो दोनों गहरे सब्ज़ रंग के होंगे.

65. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

66. फीहिमा ऐनानि नज्ज़ा खतान – उन दोनों बागों में दो उबलते हुए चश्मे भी होंगे.

67. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

68. फीहिमा फाकिहतुव व नख्लुव वरुम मान – उन में मेवे, खजूर, और अनार होंगे.

69. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

70. फिहिन्ना खैरातुन हिसान – उन में नेक सीरत ख़ूबसूरत औरतें भी होंगी.

71. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

72. हूरुम मक्सूरातुन फिल खियाम – खेमों में महफूज़ गोरी रंगत वाली हूरें भी होंगी.

73. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

74. लम यत मिस हुन्ना इन्सून क़ब्लहुम वला जान – उन से पहले न किसी इंसान ने हाथ लगाया होगा न किसी जिन ने.

75. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

76. मुत तकि ईना अला रफ़रफिन खुजरिव व अब्क़रिय यिन हिसान – (जन्नती लोग ) सब्ज़ तकियों और खूबसूरत कालीनों पर टेक लगाये होंगें.

77. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ जिबान – तो ( ए इंसान और जिन्नात ! ) तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमतों को झुठलाओगे.

78. तबा रकस्मु रब्बिका ज़िल जलाली वल इकराम – आप के परवरदिगार, जो बड़े जलाल व अज़मत वाले हैं, उनका नाम बड़ा ही बा बरकत है.

Surah Rahman in hindi में तर्जुमा को समझ कर अमल करने से अल्लाह ताला के पास आप की दुआ कबूल होने की उम्मीद ज्यादा हो जाती हैं.

सूरह रहमान हिंदी में पढ़ने और अमल के साथ 5 वक़्त की नमाज़ पाबंदी से पढ़े और साथ ही नेक काम करे इंशा अल्लाह आप की दुआ अल्लाह के बारगाह पर जरूर कबूल हो सकती हैं. अल्लाह तआला हम सबको कुरान करीम समझ कर पढ़ने वाला और उसपर अमल करने वाला बनाए। अल्लाह तआला हम सबको शिर्क की तमाम शकलों से महफूज़ फरमाए अमीन.

इस सूरह को पूरा ध्यान से पढ़ने के लिए और सूरह रहमान के बारे में जानने के लिए आप लोगो का शुक्रिया करता हूँ. सूरह रहमान की तिलावत करें और अपनी ज़िन्दगी में अमल करे.

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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a journalist based in Jalna, Maharashtra, and district representative for Navbharat (previously with Lokmat Samachar). He edits NewsNation Online, covering Jalna, Marathwada, Maharashtra and India, and ImranJalna, covering Islamic knowledge and Muslim-world news in English, Hindi and Urdu.

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