मैं मशहूर शहंशाह सुल्तान अल्तमश की बेटी हूं, तीन साल से ज़्यादा अरसे तक मेरे सर पर ताज रहा, फिर मेरे वालिद के दौर के अफसरान मेरे खिलाफ हो गये, और उन्होंने मेरी पेशानी से ताज छीन लिया और मेरी टांगो में बेड़ियां डालकर मुझे जेल में डाल दिया।
“लेकिन मैं जानती हूं दिल्ली अब भी मेरी नेक ख्वाहिशात रखती है क्यूंकि मैंने हर उस मर्द औरत के साथ अच्छा सुलूक किया जिससे मैं मिली थी”
रज़िया सुल्तान का अपने अगवाकार को दिया गया बायान जैसा की अब्दुल मलिक इस्लामी के “फ़ुतुह-उस-सलातीन” में दर्ज है।
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