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शब-ए-मेराज की नमाज और इबादत का तरीका (हिंदी में विस्तृत जानकारी)

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शब-ए-मेराज की नमाज और इबादत का तरीका (हिंदी में विस्तृत जानकारी)

Method of Namaaz and Ibadat of Shab-e-Meraj (Detailed information in Hindi)

शब-ए-मेराज इस्लाम धर्म की एक महत्वपूर्ण रात है, जो इस्लामी कैलेंडर के रजब महीने की 27वीं रात को मनाई जाती है। इस वर्ष यह 25 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी। इस रात को पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को मक्का से यरूशलेम (बैतुल मुकद्दस) और फिर सातों आसमानों की यात्रा कराई गई थी, जहां उन्होंने अल्लाह तआला से मुलाकात की थी। इस रात की विशेषता यह है कि इसमें इबादत करने से विशेष सवाब मिलता है और दुआएं कबूल होती हैं।

शब-ए-मेराज की नमाज का तरीका

इस रात में इबादत के लिए कई विशेष नफ्ल नमाजें पढ़ी जाती हैं, जिनमें सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली 12 रकात नफ्ल नमाज है। इसका तरीका निम्नलिखित है:

नियत (इरादा):

नियत करें: “नियत करता हूँ दो रकात नफ्ल नमाज शब-ए-मेराज की, अल्लाह के लिए, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ, अल्लाहु अकबर।”

नमाज पढ़ने का तरीका:

हर 2 रकात में सुरह फातिहा के बाद सुरह इखलास (कुल हु अल्लाहु अहद) को तीन बार पढ़ें।

पहली रकात में सुरह फातिहा के बाद सुरह काफिरून पढ़ सकते हैं।

दूसरी रकात में सुरह फातिहा के बाद सुरह इखलास पढ़ी जा सकती है।

इसी प्रकार 12 रकात पूरी करें।
नमाज पूरी करने के बाद:


125 बार दुरूद शरीफ पढ़ना।
100 बार सुब्हानल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह, अल्लाहु अकबर की तस्बीह करें।
अपने और पूरे उम्मत के लिए खास दुआ करें।


शब-ए-मेराज की अन्य इबादतें

कुरआन की तिलावत:
इस रात में
अधिक से अधिक कुरआन की तिलावत करें, खासकर सुरह अल-इस्रा और सुरह अन-नज्म।


तहज्जुद नमाज:

इस रात में उठकर तहज्जुद की नमाज अदा करने की बहुत फजीलत है। इससे गुनाहों की माफी और अल्लाह की रहमत मिलती है।


जिक्र और दुआ:


इस रात में “अस्तगफिरुल्लाह” (तौबा) का ज्यादा से ज्यादा विर्द करें।
अपनी जरूरतों और गुनाहों की माफी के लिए अल्लाह से दुआ करें।1

रोज़ा रखने की फजीलत:
शब-ए-मेराज के अगले दिन (27 रजब) को रोज़ा रखना अत्यधिक सवाब का कार्य है। हदीस में इसका बहुत महत्व बताया गया
है।



शब-ए-मेराज की अहमियत
इस रात को इबादत करने से कई गुना सवाब मिलता है। हदीसों में इस रात की फजीलत का जिक्र इस प्रकार किया गया है:
यह वह रात है जब पांच वक्त की नमाज उम्मत-ए-मुस्लिम के लिए अनिवार्य की गई।
इस रात में किए गए नेक कार्यों को अल्लाह तआला कई गुना बढ़ाकर अदा करते हैं।
यह रात अपने गुनाहों से तौबा करने और
अल्लाह के करीब जाने का बेहतरीन मौका है।

शब-ए-मेराज के बारे में कुछ मशहूर दुआएं
“या अल्लाह, तू हमारे गुनाहों को माफ़ कर और हमें सीरत-ए-मुस्तकीम पर चलने की तौफीक अता फरमा।”
“या रहमान, हमारी दुनिया और आखिरत को बेहतर बना और हमारी मुश्किलें आसान कर।”
“या ग़फ्फार, तू हमारे गुनाहों को माफ कर और हमें
नेक रास्ते पर चला।”

महत्वपूर्ण बातें जो ध्यान में रखें

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इस रात को इबादत में गुजारना चाहिए, लेकिन इसे इबादत के लिए अनिवार्य समझकर बोझ न बनाएं।
नफ्ल नमाजें अपनी सहूलियत के हिसाब से अदा करें।
घर में रहकर इबादत करें और परिवार के साथ मिलकर इस रात की फजीलत पर चर्चा करें।

Method of Namaaz and Ibadat of Shab-e-Meraj (Detailed information in Hindi)

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निष्कर्ष

शब-ए-मेराज की रात इबादत, दुआ और तौबा का बेहतरीन अवसर है। इस रात में नफ्ल नमाज अदा करने, कुरआन की तिलावत करने और दुआएं मांगने से अल्लाह की रहमतें प्राप्त होती हैं। यह रात हमें अपने गुनाहों से माफी मांगने और नेक अमल करने की सीख देती है।
अधिक जानकारी और विस्तृत हिदायतों के लिए,

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इमरान सिद्दीकी

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