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यौम-उल-क़ुद्स: फ़िलस्तीन की पुकार और उम्मत का फ़र्ज़

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कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

यौम-उल-क़ुद्स: फ़िलस्तीन की पुकार और उम्मत का फ़र्ज़

हर रमज़ान की तरह जब इसका आख़िरी जुमा आता है, तो दुनियाभर के मुसलमान जहां जुम्मा-तुल-विदा की फज़ीलत से फ़ायदा उठाते हैं, वहीं एक और बहुत अहम दिन भी याद किया जाता है — यौम-उल-क़ुद्स, यानी फ़िलस्तीन और मस्जिद-अल-अक्सा की याद और हिफाज़त का दिन।

यौम-उल-क़ुद्स क्या है?

यह दिन हर साल रमज़ान के आख़िरी शुक्रवार को मनाया जाता है, जिसका मक़सद है फ़िलस्तीन के लोगों के साथ एकजुटता दिखाना, मस्जिद-अल-अक्सा की हिफाज़त और ज़ुल्म के खिलाफ़ इंसाफ़ की मांग करना। इसकी शुरुआत 1979 में आयतुल्लाह ख़ुमैनी (रह.) द्वारा हुई थी।

अल-क़ुद्स का इतिहासिक महत्व

  • यहाँ स्थित है मस्जिद-अल-अक्सा — इस्लाम की तीसरी सबसे मुक़द्दस मस्जिद।
  • यहीं से हुआ था मेराज़ का सफ़र – रातों रात आकाश की सैर।
  • क़ुरआन में इसे “मुबारक ज़मीन” कहा गया है।

“پاک ہے वह जो अपने बन्दे को रातों रात मस्जिद-ए-हराम से मस्जिद-अल-अक्सा तक ले गया, जिसके इर्द-गिर्द हमने बरकत रखी है।”

– (सूरह बनी इसराईल, आयत 1)

आज का क़ुद्स: सियासी चुप्पी और मज़लूमों की आह

आज क़ुद्स में मुसलमानों पर ज़ुल्म, मस्जिद-अल-अक्सा पर हमले और ज़ायोनी कब्ज़े की घटनाएँ आम हो गई हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की निष्क्रियता और मुस्लिम नेतृत्व की चुप्पी ने इस ज़ख़्म को और गहरा कर दिया है।

यौम-उल-क़ुद्स: विरोध नहीं, इबादत

यह दिन हमें सिखाता है कि उम्मत एक जिस्म की तरह है। मस्जिद-अल-अक्सा पर हमला, हमारी रूह पर हमला है। यह दिन दुआ, इल्म, अमल और अवेयरनेस

हम क्या कर सकते हैं?

  • दुआ करें:

    اللهم انصر إخواننا في فلسطين، و احفظ المسجد الأقصى من كل سوء
    “या अल्लाह! फ़िलस्तीनियों की मदद फ़रमा, और मस्जिद-अल-अक्सा की हिफाज़त फ़रमा।”

  • नौजवानों को शिक्षित करें – फ़िलस्तीन का इतिहास और इस्लामी विरासत सिखाएं।
  • सोशल मीडिया पर सक्रिय रहें – #FreePalestine, #QudsDay जैसे हैशटैग के ज़रिए आवाज़ उठाएं।
  • ख़ुत्बा, तिलावत और विरोध सभाओं का आयोजन करें।

सीरत-ए-नबी (स.अ.) की रौशनी में

रसूलुल्लाह (स.अ.) ने हमेशा मज़लूमों का साथ दिया और ज़ालिमों के खिलाफ़ डटे रहे। यौम-उल-क़ुद्स उसी सीरत की ताज़ा याद है — इंसाफ़, शुजाअत और उम्मती वफ़ादारी का नाम।

अंतिम पैग़ाम

यौम-उल-क़ुद्स हमें यह याद दिलाता है कि जब तक क़ुद्स क़ैद में है, उम्मत अधूरी है। हमारी दुआ, हमारा कलम, हमारा अमल — सब कुछ इस्लामी इंसाफ़ के लिए हो।


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इमरान सिद्दीकी
Imran Siddiqui is a journalist based in Jalna, Maharashtra, and district representative for Navbharat (previously with Lokmat Samachar). He edits NewsNation Online, covering Jalna, Marathwada, Maharashtra and India, and ImranJalna, covering Islamic knowledge and Muslim-world news in English, Hindi and Urdu.

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