विज्ञापन

आयत-ए-करिमा: लाइलाहा इल्ला अंता की फ़ज़ीलत और वज़ीफ़ा

image_1761917138501

🌸 आयत-ए-करिमा वज़ीफ़ा और फ़ज़ीलत 🌸

आयत-ए-करिमा कुरआन करीम की वह दुआ है जिसे हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) ने गहरे समंदर में मछली के पेट में रहते हुए अल्लाह से तौबा करते समय पढ़ा था। यह दुआ हर मुसीबत, ग़म, और तंगी से निजात पाने के लिए बहुत असरदार है। आयत-ए-करिमा की अरबी, तर्जुमा, और फ़ज़ीलत जानिए — यह हज़रत यूनुस (अ.स.) की दुआ है जो हर मुसीबत और ग़म से निजात दिलाती है।

  • आयत-ए-करिमा की पहचान और महत्व: यह कुरआन की वह दुआ है जिसे हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) ने दीघे समंदर में रहते हुए अपने गुनाहों की तौबा के दौरान पढ़ी थी, और यह मुसीबत से राहत दिलाने वाली अत्यंत प्रभावी दुआ है।
  • आयत-ए-करिमा का अरबी, तर्जुमा और फ़ज़ीलत: यह दुआ कुरआन सूरह अल-अंबिया की आयत 21:87 में मौजूद है, जिसका अरबी वर्जन है ‘Lā ilāha illā anta subḥānaka innī kuntu minaẓ-ẓālimīn’, जिसका हिन्दी अर्थ है ‘तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, तू पाक है, मैं ज़ालिमों में से था’।
  • कुरआनी संदर्भ और प्राथमिकी: यह दुआ कुरआन की सूरह अल-अंबिया (21:87) में आती है, जब हज़रत यूनुस (अ.स.) ने इसे ईमान और तौबा के साथ पढ़ा, तो अल्लाह ने उन्हें अंधेरे से निजात दी और उनकी पुकार को स्वीकार किया।
  • फज़ीलत और हदीसों में बारे में: रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया कि जो भी इस दुआ को मुसीबत में पढ़ेगा, उसकी तकलीफ़ दूर होगी, और जोतौबा के साथ पढ़े, उसकी दुआ अल्लाह क़बूल करेगा।
  • वज़ीफ़ा और पढ़ने का तरीका: मुस्किलत के अनुसार, छोटी मुसीबत के लिए 100 बार, बड़ी मुसीबत और बीमारी के लिए 313 बार, और रोजाना तौबा व ज़िक्र के लिए 41 बार पढ़नी चाहिए, साथ ही नियत (इरादा) उनके हल के लिए जरूरी है।

🔹 अरबी (Arabic):

🔹 Transliteration (उच्चारण):

Lā ilāha illā anta subḥānaka innī kuntu minaẓ-ẓālimīn

🔹 Translation (हिन्दी अर्थ):

“तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, तू पाक है, बेशक मैं ज़ालिमों में से था।”


📖 कुरआनी संदर्भ:

यह दुआ सूरह अल-अंबिया (21:87) की आयत है। जब हज़रत यूनुस (अ.स.) ने यह दुआ दिल से पढ़ी, तो अल्लाह तआला ने उन्हें अंधेरे से निजात दी।

“तो हमने उसकी पुकार को स्वीकार किया और उसे ग़म से छुटकारा दिया, और इसी तरह हम ईमान वालों को नजात देते हैं।”
— (कुरआन 21:88)

🌿 हदीसों से फ़ज़ीलत:

  • रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “जो कोई किसी भी मुसीबत में यह दुआ पढ़ेगा, अल्लाह उसकी तकलीफ़ दूर कर देगा।” — (तिर्मिज़ी)
  • जो इसे तौबा के साथ पढ़े, उसकी दुआ अल्लाह ज़रूर क़बूल करता है।

🕋 पढ़ने का तरीका (वज़ीफ़ा):

मक़सदतादादवक़्त
आम परेशानी या ग़म100 बारकिसी भी वक़्त
बड़ी मुसीबत, बीमारी, कर्ज़313 बारफ़ज्र के बाद या रात को
रोज़ तौबा व ज़िक्र41 बारहर नमाज़ के बाद

🌙 निय्यत (इरादा):

“ए अल्लाह, जैसे तूने यूनुस (अ.स.) को अंधेरे से निजात दी, वैसे ही मेरी परेशानियों से भी राहत दे।”


🌺 फ़ायदे और असर:

  • गुनाहों की माफ़ी और तौबा की क़बूलियत
  • दिल को सुकून और राहत
  • मुसीबत, तंगी, और ग़म से निजात
  • अल्लाह की रहमत और बरकत का दरवाज़ा खुलता है

आयत-ए-करिमा — मुसीबतों से निजात की कुंजी”

— संकलन: News E Hub Team

image_1761917138501

आयत-ए-करिमा की अरबी, तर्जुमा, और फ़ज़ीलत जानिए — यह हज़रत यूनुस (अ.स.) की दुआ है जो हर मुसीबत और ग़म से निजात दिलाती है।

आयत-ए-करिमा क्या है और इसका मुख्य महत्व क्या है?

आयत-ए-करिमा वह दुआ है जिसे हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) ने समुद्र में रहते हुए तौबा करने के दौरान पढ़ा था। यह मुसीबत, ग़म, और तंगी से निजात पाने के लिए अत्यंत प्रभावी है।

आयत-ए-करिमा का अरबी रूप, तर्जुमा, और फ़ज़ीलत क्या हैं?

यह दुआ कुरआन सूरह अल-अंबिया की आयत 21:87 में मौजूद है, जिसका अरबी वर्जन ‘Lā ilāha illā anta subḥānaka innī kuntu minaẓ-ẓālimīn’ है, जिसका हिन्दी अर्थ है ‘तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, तू पाक है, मैं ज़ालिमों में से था।

आयत-ए-करिमा का कुरआनी संदर्भ और इसकी प्रमुख कथा क्या है?

यह दुआ सूरह अल-अंबिया (21:87) में है, और हज़रत यूनुस (अ.स.) ने इसे ईमान और तौबा के साथ पढ़ा, तो अल्लाह ने उन्हें अंधकार से निकाला और उनकी पुकार को स्वीकार किया।

आयत-ए-करिमा को पढ़ने का तरीका और वज़ीफ़ा क्या है?

मुस्किलत के अनुसार छोटी मुसीबत के लिए 100 बार, बड़ी मुसीबत और बीमारी के लिए 313 बार, और रोजाना तौबा व ज़िक्र के लिए 41 बार पढ़नी चाहिए।

आयत-ए-करिमा पढ़ने के लाभ और इसके असर क्या हैं?

यह गुनाहों की माफी, दिल को सुकून, मुसीबतों से राहत प्रदान करता है और अल्लाह की रहमत एवं बरकत का द्वार खोलता है।


Nayi Soch News-e-Hub से और जानें

नवीनतम पोस्ट अपने ईमेल पर प्राप्त करने के लिए सदस्यता लें।

author avatar
News E Hub

Nayi Soch News-e-Hub से और जानें

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading