इस्तिखारा उस वक्त अल्लाह से भलाई और सही राह की दुआ करने का तरीका है, जब किसी जायज मामले में फैसला करना मुश्किल हो। शादी का रिश्ता, नौकरी, कारोबार, सफर या किसी दूसरे महत्वपूर्ण विकल्प पर सोचते समय मुसलमान इस्तिखारा कर सकते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि इंसान सोचना, जानकारी लेना या अनुभवी लोगों से सलाह करना छोड़ दे। इस्तिखारा के साथ समझदारी से कोशिश करना भी जरूरी है।
इस्तिखारा क्या है?
इस्तिखारा का मतलब है अल्लाह से अपने लिए बेहतर विकल्प मांगना। हजरत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सहाबा को अलग-अलग मामलों में इस्तिखारा सिखाते थे, जैसे कुरआन की सूरत सिखाते थे। यह रिवायत सहीह बुखारी, हदीस 1162 में मौजूद है।
इस्तिखारा की नमाज पढ़ने का सही तरीका
- सबसे पहले जिस जायज काम के बारे में फैसला करना है, उसे स्पष्ट करें। उसके फायदे, नुकसान और जरूरी जानकारी समझें।
- वुजू करके नमाज के लिए तैयार हों।
- फर्ज नमाज के अलावा दो रकअत नफ्ल नमाज पढ़ें। नफ्ल नमाज के लिए ऐसे समय का चुनाव करें जिसमें नमाज पढ़ना जायज हो।
- दो रकअत पूरी करने के बाद हदीस में बताई गई इस्तिखारा की दुआ पढ़ें और अपने मामले को ध्यान में रखें।
- फिर उचित सलाह, उपलब्ध जानकारी और परिस्थितियों को देखते हुए फैसला करें तथा अल्लाह पर भरोसा रखें।
हदीस में इस्तिखारा के लिए किसी एक खास सूरह को अनिवार्य नहीं बताया गया है। इसलिए हर रकअत में सूरह फातिहा के बाद कुरआन की कोई भी याद की हुई सूरह पढ़ी जा सकती है।
इस्तिखारा की दुआ देवनागरी में
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्तखीरुका बिइल्मिका, व अस्तक्दिरुका बिकुदरतिका, व असअलुका मिन फज्लिकल अजीम। फइन्नका तक्दिरु व ला अक्दिरु, व तअलमु व ला अअलमु, व अन्त अल्लामुल गुयूब। अल्लाहुम्मा इन कुन्ता तअलमु अन्ना हाजल अम्रा खैरुल ली फी दीनी व मआशी व आकिबति अम्री, फक्दुरहु ली व यस्सिरहु ली सुम्मा बारिक ली फीहि। व इन कुन्ता तअलमु अन्ना हाजल अम्रा शर्रुल ली फी दीनी व मआशी व आकिबति अम्री, फस्रिफ्हु अन्नी वस्रिफ्नी अन्हु, वक्दुर लियल खैरा हैसु काना सुम्मा अर्जिनी बिहि।
नोट: यह उच्चारण समझने के लिए देवनागरी लिप्यंतरण है। अरबी के कुछ अक्षरों का बिल्कुल सही उच्चारण हिंदी लिपि में व्यक्त नहीं हो सकता। बेहतर तिलावत और दुआ के लिए किसी योग्य शिक्षक से उच्चारण सीखें और मूल रिवायत से मिलान करें।
इस्तिखारा की दुआ का हिंदी अर्थ
ऐ अल्लाह! मैं तेरे ज्ञान के जरिए अपने लिए भलाई मांगता हूं, तेरी शक्ति से सामर्थ्य चाहता हूं और तेरे महान अनुग्रह का सवाल करता हूं। तू सामर्थ्य रखता है, मैं नहीं रखता; तू जानता है, मैं नहीं जानता; और तू छिपी हुई बातों को जानने वाला है। ऐ अल्लाह! यदि यह मामला मेरे धर्म, मेरी आजीविका और मेरे काम के परिणाम के लिए बेहतर है, तो इसे मेरे लिए तय कर, आसान बना और इसमें बरकत दे। और यदि यह मेरे धर्म, आजीविका और परिणाम के लिए बुरा है, तो इसे मुझसे दूर कर और मुझे इससे दूर रख; जहां भी भलाई हो, वह मेरे लिए तय कर और मुझे उस पर राजी कर दे।
दुआ में ‘यह मामला’ कहते समय अपने मन में उस खास फैसले को रखें जिसके लिए इस्तिखारा किया जा रहा है।
इस्तिखारा कब और किन मामलों में करें?
शादी के रिश्ते पर विचार करते समय, दो नौकरियों में से किसी एक को चुनते समय, कारोबार शुरू करने, घर बदलने या किसी सफर की योजना जैसे जायज मामलों में इस्तिखारा किया जा सकता है। लेकिन जो काम स्पष्ट रूप से हराम है, उसे करने की अनुमति पाने के लिए इस्तिखारा नहीं किया जाता। इसी तरह पहले से फर्ज काम को करना है या नहीं, यह तय करने के लिए भी इस्तिखारा की जरूरत नहीं होती।
इस्तिखारा से पहले जानकारी जुटाना महत्वपूर्ण है। मिसाल के तौर पर शादी के मामले में संबंधित व्यक्ति के स्वभाव, जिम्मेदारी और पारिवारिक परिस्थितियों की पड़ताल करें। नौकरी के मामले में वेतन, काम की शर्तें, सुरक्षा और भविष्य की संभावनाएं समझें। धार्मिक मार्गदर्शन और व्यावहारिक जांच एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।
क्या इस्तिखारा के बाद सपना आना जरूरी है?
नहीं। सहीह बुखारी की इस्तिखारा वाली हदीस में यह शर्त नहीं है कि दुआ के बाद कोई खास सपना, रंग या संकेत जरूर दिखाई देगा। कुछ लोगों को सपना आ सकता है, लेकिन सपने को इस्तिखारा की सफलता का अनिवार्य पैमाना बनाना सही नहीं है। फैसले के लिए वास्तविक जानकारी, भरोसेमंद सलाह और हालात भी देखें।
क्या इस्तिखारा रात में ही किया जाता है?
इस्तिखारा की दो रकअत नफ्ल नमाज के लिए केवल रात का समय जरूरी नहीं है। ऐसे समय में नमाज पढ़ी जा सकती है जब नफ्ल नमाज की अनुमति हो। नफ्ल नमाज के निषिद्ध समयों और उनके विवरण में फिक्ही मतों के अनुसार अंतर हो सकता है; अपनी परिस्थिति में किसी विश्वसनीय आलिम से मार्गदर्शन लें।
क्या इस्तिखारा बार-बार कर सकते हैं?
अगर मामला अभी स्पष्ट न हो तो व्यक्ति दोबारा दुआ कर सकता है। लेकिन यह दावा कि इस्तिखारा ठीक सात बार करना अनिवार्य है, ऊपर उल्लिखित सहीह बुखारी की रिवायत से साबित नहीं होता। किसी निश्चित संख्या को हर व्यक्ति के लिए जरूरी नियम बनाकर पेश नहीं करना चाहिए।
आम गलतफहमियां जिनसे बचना चाहिए
- यह समझना कि इस्तिखारा केवल शादी के लिए है।
- यह मान लेना कि सपना न आए तो इस्तिखारा हुआ ही नहीं।
- किसी खास रंग या दृश्य को हर व्यक्ति के लिए निश्चित फैसला समझ लेना।
- बिना जानकारी जुटाए या सलाह लिए केवल किसी संकेत का इंतजार करना।
- हराम काम के लिए भी इस्तिखारा करके उसे सही ठहराने की कोशिश करना।
- दुआ पढ़ते ही मनचाहा परिणाम मिलने की गारंटी समझना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इस्तिखारा की नमाज में कितनी रकअत होती हैं?
सहीह बुखारी की रिवायत में फर्ज के अलावा दो रकअत नमाज का उल्लेख है।
क्या इस्तिखारा किसी दूसरे से करवाना जरूरी है?
नहीं। हदीस में व्यक्ति को खुद दो रकअत नमाज पढ़कर अल्लाह से दुआ करने का तरीका सिखाया गया है। जरूरत होने पर किसी जानकार से दुआ का उच्चारण और तरीका सीख सकते हैं।
इस्तिखारा के बाद फैसला कैसे लें?
मामले की जांच करें, अनुभवी और भरोसेमंद लोगों से सलाह लें, दुआ करें और फिर उपलब्ध जानकारी के आधार पर उचित फैसला लें।
और पढ़ें
फैसले से जुड़ी दुआओं पर अंग्रेजी में यह लेख भी पढ़ सकते हैं: Dua for Making the Right Decision।
प्रमुख स्रोत: सहीह बुखारी 1162 — इस्तिखारा की नमाज और दुआ। यह लेख सामान्य धार्मिक जानकारी के लिए है। अलग-अलग फिक्ही मसलों में स्थानीय विश्वसनीय आलिम से मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
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