अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) ने शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को अपने बानी सर सैयद अहमद खान की 209वीं यौम-ए-विलादत ‘सर सैयद डे’ के रूप में मनाई। गुलिस्तान-ए-सैयद में हुए यादगारी जलसे में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह मुख्य अतिथि रहे, जबकि अध्यक्षता कुलपति प्रो. नईमा खातून ने की। इस मौके पर तालीम, साइंसी सोच और कौमी भाईचारे के सर सैयद के पैग़ाम को याद किया गया।
दिन की शुरुआत कुरआन ख्वानी से
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 6 बजे यूनिवर्सिटी मस्जिद में कुरआन ख्वानी से हुई। इसके बाद सर सैयद के मज़ार पर चादरपोशी की गई और सर सैयद हाउस में उनकी तहरीरों और किताबों की नुमाइश लगाई गई। सर सैयद अकादमी में दस किताबों का विमोचन भी हुआ, जिनमें सर सैयद की ‘तफ़सीरुल कुरआन’ (दो खंड) और ‘तहज़ीबुल अख़लाक़’ का विशेष अंक शामिल हैं।
मुख्य अतिथि का पैग़ाम
जस्टिस मसीह ने छात्रों से कहा कि वे नाकामियों से सीखें, सतही डिजिटल सामग्री के बजाय गहराई से पढ़ें और आने वाली पीढ़ियों के लिए मौके पैदा करें। उन्होंने सर सैयद की सांप्रदायिक सौहार्द की सोच का ज़िक्र करते हुए AMU के विविधताभरे कैंपस को इसकी मिसाल बताया और कहा कि नौजवान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में देश की अगुवाई के लिए तैयार हों। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सत्यवीर सिंह ने मौलाना आज़ाद लाइब्रेरी में बिताए अपने दिनों को याद किया और कहा कि इल्म तभी मायने रखता है जब वह आम लोगों तक पहुंचे।
अवार्ड और 5 करोड़ का एलान
इस साल सर सैयद एक्सीलेंस अवार्ड (अंतरराष्ट्रीय) जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के इस्लामी फ़लसफ़ी प्रो. सैयद हुसैन नस्र को और राष्ट्रीय अवार्ड कर्नाटक के गुलबर्गा की ख़्वाजा बंदानवाज़ एजुकेशनल सोसाइटी को दिया गया। प्रो. नस्र ने ऑनलाइन संबोधन किया। गुजरात के KP ग्रुप के चेयरमैन डॉ. फ़ारूक़ जी. पटेल ने AMU में करीब 5 करोड़ रुपये के शुरुआती कोष से ‘KP एक्सीलेंस सेंटर’ कायम करने का एलान किया, जो सोलर, विंड एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और बैटरी स्टोरेज जैसे क्षेत्रों पर काम करेगा।
मुख्य बातें
- मौका: सर सैयद अहमद खान की 209वीं यौम-ए-विलादत (जन्म 17 अक्टूबर 1817)
- मुख्य अतिथि: जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, सुप्रीम कोर्ट
- अंतरराष्ट्रीय अवार्ड: प्रो. सैयद हुसैन नस्र
- राष्ट्रीय अवार्ड: ख़्वाजा बंदानवाज़ एजुकेशनल सोसाइटी, गुलबर्गा
- दान: KP ग्रुप की ओर से करीब 5 करोड़ रुपये का एक्सीलेंस सेंटर
- निबंध प्रतियोगिता का विषय: ‘21वीं सदी में टेक्नोलॉजी और नैतिकता: सर सैयद का नज़रिया’
कुलपति ने क्या कहा
प्रो. नईमा खातून ने सर सैयद को एक इंक़लाबी सोच वाला शख़्स बताया और अलीगढ़ बिरादरी से खुली सोच, साइंसी नज़रिए और अख़लाकी ज़िम्मेदारी को साथ लेकर चलने की अपील की। उन्होंने AI जैसी नई टेक्नोलॉजी को अपनाने के साथ आज़ाद सोच बचाए रखने पर ज़ोर दिया और छात्रों से आने वाले छात्रसंघ चुनाव में ज़िम्मेदारी से हिस्सा लेने को कहा।
महाराष्ट्र और जालना के मुस्लिम नौजवानों के लिए सबक़
सर सैयद ने 1857 के बाद के मुश्किल दौर में कौम को आधुनिक तालीम की राह दिखाई थी। आज भी यह पैग़ाम उतना ही अहम है—खासकर जालना और मराठवाड़ा जैसे इलाकों के उन परिवारों के लिए, जहां बच्चे मदरसा और स्कूल दोनों की पढ़ाई के बीच संतुलन बनाते हैं। इस्लाम में इल्म की अहमियत पर हमारा लेख इस्लाम में शिक्षा का महत्व और ज़रूरतमंद छात्रों की मदद पर मदरसे में छात्रवृत्ति कैसे दें भी पढ़ें। AMU के अल्पसंख्यक दर्जे पर पहले की रिपोर्ट यहां पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: सर सैयद डे कब मनाया जाता है?
जवाब: हर साल 17 अक्टूबर को, सर सैयद अहमद खान की यौम-ए-विलादत पर।
सवाल: इस साल का अंतरराष्ट्रीय अवार्ड किसे मिला?
जवाब: इस्लामी फ़लसफ़ी के विद्वान प्रो. सैयद हुसैन नस्र को।
स्रोत / Source: India Education Diary — indiaeducationdiary.in; अमर उजाला — amarujala.com; AMU आधिकारिक वेबसाइट
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