यौमे आशूरा की फ़ज़ीलत
आशूरा, “अशर” से लिया गया है जिसका मतलब है ‘दस’। यौमे आशूरा यानी माहे मुहर्रम की 10वीं तारीख़, जिसे अल्लाह तआला ने कई अज़ीम वाक़ियात और करामात से नवाज़ा।
🔟 आशूरा के दिन होने वाले दस अहम वाक़ियात:
- हज़रत आदम अ.स. की तौबा कुबूल हुई।
- हज़रत नूह अ.स. की कश्ती जूदी पर्वत पर ठहरी।
- हज़रत मूसा अ.स. को फिरऔन से नजात मिली, और फिरऔन डूबा।
- हज़रत ईसा अ.स. की विलादत और आसमान पर उठा लिए गए।
- हज़रत यूनुस अ.स. को मछली के पेट से छुटकारा मिला।
- हज़रत यूसुफ अ.स. कुएँ से निकाले गए।
- हज़रत अय्यूब अ.स. को बीमारी से शिफा मिली।
- हज़रत इदरीस अ.स. आसमान पर उठाए गए।
- हज़रत इब्राहीम अ.स. की आग गुलज़ार हुई।
- हज़रत सुलेमान अ.स. को सल्तनत अता हुई।
“यौमे आशूरा, वाक़िया करबला से पहले भी मुकद्दस दिन था। कई अहादीस में इसकी फ़ज़ीलत दर्ज है और कहा गया है कि क़यामत भी इसी दिन आएगी।”
🌙 आशूरा का रोज़ा और उसकी फ़ज़ीलत:
रसूलुल्लाह ﷺ ने आशूरा के रोज़े को बहुत अफ़ज़ल बताया। आपने फ़रमाया:
“रमज़ान के बाद सबसे अफ़ज़ल रोज़े अल्लाह के महीने मुहर्रम के हैं।”
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास र.अ. फ़रमाते हैं कि आपने आशूरा का रोज़ा बहुत एहमियत से रखा और फ़रमाया:
“मैं अल्लाह से उम्मीद करता हूँ कि आशूरा का रोज़ा पिछले साल के गुनाहों का कफ़्फ़ारा बन जाए।”
यहूदियों से इख़्तिलाफ के लिए सलाह दी गई कि 9वीं और 10वीं या 10वीं और 11वीं तारीख़ के दो रोज़े रखे जाएँ।
📿 आमाल-ए-आशूरा:
- रोज़ा रखना (9 और 10 या 10 और 11)
- नफ़्ल नमाज़ पढ़ना – 4 रकअत, हर रकअत में सूरह फातिहा के बाद 11 बार ‘क़ुल हुवल्लाहु अहद’
- सदक़ा और खैरात करना
- अहले-खाना पर वसीअ खर्च करना
- क़ुरबानी और सब्र की दास्तानों से इबरत लेना
📖 औलिया व अकाबिरीन के क़ौल:
हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया रह. ने फ़रमाया कि जंगल की हिरनियाँ भी आशूरा के दिन अपने बच्चों को दूध नहीं देतीं – रसूलुल्लाह ﷺ के अहले-बैत से मुहब्बत की वजह से।
हज़रत बाबा फ़रीद गंज शकर र.अ. ने कहा कि यह दिन इस्लाम की तारीख़ का रौशन पन्ना है – इसलिए इसे ज़ाया न करें।
📚 नसीहत और सबक:
💧 इमाम हुसैन र.अ. की शहादत:
यही दिन था जब इमाम-ए-आली-मक़ाम हज़रत हुसैन रजि. ने कर्बला में अपनी जान की क़ुर्बानी दी और इस्लाम की बका के लिए हक़ की आवाज बुलंद की। हमें उनकी क़ुर्बानी से सबक लेना चाहिए और ज़िंदगी को नेकियों से भरना चाहिए।
🤲 आखिर में दुआ:
आमीन। जज़ाकल्लाह ख़ैर।
📤 अगर यह लेख आपको पसंद आया हो, तो इसे शेयर करें — यह आपके लिए सदक़ा-ए-जारीया बन सकता है।
Nayi Soch News-e-Hub से और जानें
नवीनतम पोस्ट अपने ईमेल पर प्राप्त करने के लिए सदस्यता लें।








![Far Away Part 22 The Raid - Nayi Soch News-e-Hub Far Away [Part 22] – The Raid](https://imranjalna.com/wp-content/uploads/mcp-images/mcp-09c9131d4fe8.jpg)















![Female Scholarship In Islam A Living Legacy Part 1 - Nayi Soch News-e-Hub Female Scholarship In Islam: A Living Legacy [Part 1]](https://imranjalna.com/wp-content/uploads/mcp-images/mcp-14d8eddf7d99.jpg)




![Far Away Part 19 An Apple For Belly - Nayi Soch News-e-Hub Far Away [Part 19] – An Apple For Belly](https://imranjalna.com/wp-content/uploads/mcp-images/mcp-925a94580019.webp)




![Far Away Part 20 Among the Afghans - Nayi Soch News-e-Hub Far Away [Part 20] – Among the Afghans](https://imranjalna.com/wp-content/uploads/mcp-images/mcp-4264bb9f5dfa.jpg)


![Far Away Part 21 Opium - Nayi Soch News-e-Hub Far Away [Part 21] – Opium](https://imranjalna.com/wp-content/uploads/mcp-images/mcp-a4faff58bd1b.jpg)

























Leave a Reply