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“अल-जब्बार — अल्लाह की वह क़ुदरत जो जोड़ती भी है और ग़ालिब भी है | ९९ नामों की रौशनी”

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९९ नामों की रौशनी

अल-जब्बार — जो हर चीज़ पर अपनी क़ुदरत से ग़ालिब है और ज़ुल्म से पाक है

AL-JABBAR – The Compeller, The Restorer, The Irresistible


अर्थ और व्याख्या:

अल-जब्बार वह है जो हर चीज़ पर अपनी मर्जी और क़ुदरत से हुकूमत करता है — मगर अपने बंदों के लिए रहमदिल और न्यायप्रिय है।

कुरआनी संदर्भ:

“वही अल्लाह है… अल-अज़ीज़, अल-जब्बार, अल-मुतकब्बिर…”
— सूरह अल-हशर (59:23)

फज़ीलत और लाभ:

  • “या जब्बार” का वज़ीफ़ा दिलों की टूट-फूट को जोड़ने वाला है।
  • जो ग़म और कमजोरी से टूटा हो, उसके लिए राहत का नाम है।
  • ज़ालिमों के सामने डटकर खड़े होने का हौसला देता है।

दुआ और ज़िक्र:

“या जब्बार, अजबर क़सरी व अहफज़नी”
(ऐ जब्बार! मेरी टूटी हिम्मत को जोड़ और मुझे महफूज़ रख)

ज़िंदगी में अमल:

जो अल-जब्बार को पहचानता है, वह टूट कर भी हिम्मत रखता है — क्योंकि वो जानता है कि अल्लाह हर टूटी चीज़ को जोड़ने वाला है।


यह लेख http://www.imranjalna.com की “९९ नामों की रौशनी” श्रृंखला का हिस्सा है।

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इमरान सिद्दीकी
Imran Siddiqui is a journalist based in Jalna, Maharashtra, and district representative for Navbharat (previously with Lokmat Samachar). He edits NewsNation Online, covering Jalna, Marathwada, Maharashtra and India, and ImranJalna, covering Islamic knowledge and Muslim-world news in English, Hindi and Urdu.

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