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27 रमज़ान की दुआ:
ऐ अल्लाह! पुल सिरात से बिजली की तरह गुज़रने की तौफीक अता फ़रमा

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27 रमज़ान की दुआ: ऐ अल्लाह! पुल सिरात से बिजली की तरह गुज़रने की तौफीक अता फ़रमा

रमज़ान के अंतिम अशरे की हर घड़ी रहमत, मग़फिरत और जहन्नुम से निजात की सौगात लेकर आती है। 27वां दिन दुआओं की क़बूलियत और रूहानी नज़दीकी का बेहतरीन मौका है।

इस दिन की एक खास दुआ है जो हर मोमिन के दिल की गहराई से निकली हुई फ़रियाद है:

अरबी दुआ:

اللّهُمَّ اجعلني مِمَّن يَمُرُّ عَلَى الصِّرَاطِ كَالْبَرْقِ الخَاطِفِ

हिंदी तर्जुमा:

अल्लाहुम्म अजअल्नी मिम्मन यमुरُّ अला सिराति कल-बरक़िल खातिफ़।

हिंदी अनुवाद:

“ऐ अल्लाह! मुझे उन लोगों में शामिल फ़रमा जो पुल सिरात पर बिजली की तरह गुज़र जाएंगे।”

पुल सिरात क्या है?

क़यामत के दिन हर इनसान को एक बेहद नाज़ुक और बारीक पुल (पुल सिरात) से होकर गुज़रना होगा, जो जहन्नुम के ऊपर होगा। नेक बंदे बिजली की रफ्तार से इस पुल को पार कर जाएंगे, जबकि गुनहगारों के लिए यह सफर बेहद मुश्किल होगा।

इस दुआ की अहमियत

  • यह दुआ आखिरत की सलामती और निजात की इल्तिजा है।
  • यह अल्लाह से इस सफर को आसान करने की तौफीक मांगती है।
  • रमज़ान की मुक़द्दस घड़ी में की गई यह दुआ क़बूलियत के करीब होती है।

क्या करें 27 रमज़ान को?

  • इस दुआ को बार-बार दिल से पढ़ें
  • कुरआन की तिलावत और तौबा-इस्तिग़फ़ार करें
  • नमाज़-ए-तहज्जुद और सदक़ा दें
  • दूसरों को भी इस दुआ की अहमियत बताएं

निष्कर्ष

27 रमज़ान की दुआ हमें याद दिलाती है कि आख़िरत का सफर सच्चाई, तौबा और अल्लाह की रहमत से आसान हो सकता है। आइए, इस दिन अल्लाह से तौफीक मांगें और कहें –

“ऐ रहम करने वाले! मुझे उन लोगों में शामिल कर जो रोशनी की रफ्तार से तेरे दी हुई राह पर गुज़र जाएं।”


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इमरान सिद्दीकी

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