(Hindi)Message of Quran: Message to improve life
(अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुह)
ऐ अल्लाह! हमारे इल्म, रिज़्क़ और नेक आमाल में बरकत अता फरमा। हमें क़ुरान पढ़ने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमा। आमीन।
क़ुरान का पैग़ाम:
अऊज़ु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम। बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम।
सूरह अल-अनक़बूत (29:11):
“व-ल-यालमन्नल्लाहु अल्लज़ीना आमनू व-ल-यालमन्नल-मुनाफिकीन।”
अनुवाद: और अल्लाह यक़ीनन जान लेगा कि सच्चे ईमान वाले कौन हैं और मुनाफिक (कपटी) कौन हैं।
सूरह अल-अनक़बूत (29:12):
“व-क़ालल्लज़ीना कफरू लिल्लज़ीना आमनू इत्तबिउ सबीलना व-ल-नहमिल खतायकुम। व-माहुम बिहामिलीन मिन खतायकुम मिन शै।”
अनुवाद: और काफ़िरों ने मोमिनों से कहा, “हमारे रास्ते पर चलो, हम तुम्हारे गुनाहों का बोझ उठा लेंगे।” लेकिन यह उनका झूठा दावा है, क्योंकि वो किसी के गुनाहों का बोझ नहीं उठा सकते।
सूरह अल-अनक़बूत (29:13):
“व-ल-यहमिलुन्ना अस्कालहुम व-अस्कालं म-अस्कालिहिम। व-ल-युस्अलुन्ना यौमल क़ियामति अम्मा कानू यफ्तरून।”
अनुवाद: ये लोग अपने गुनाहों के साथ दूसरों के गुनाहों का बोझ भी उठाएंगे। क़यामत के दिन उनसे उनके झूठों और गुमराहियों के बारे में सवाल किया जाएगा।
तफ़सीर:
इन आयतों में यह पैग़ाम है कि अल्लाह हर शख़्स के ईमान और आमाल (कर्म) से वाक़िफ़ है। जो लोग दूसरों को गुमराह करते हैं, उन पर न सिर्फ़ अपने गुनाहों का, बल्कि दूसरों को गुमराह करने का भी बोझ होगा। क़ुरान हमें सचाई, ईमानदारी और नेक आमाल की राह पर चलने की तालीम देता है।

हमें चाहिए कि क़ुरान की तालीमात को अपनी ज़िंदगी में शामिल करें और दूसरों को भी सही राह दिखाएं। यह हमें न सिर्फ़ सच्चा मोमिन बनाएगा बल्कि हमारी दुनिया और आख़िरत को भी संवार देगा।
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