जालना: इमाम हुसैन का जीवन पूरी इंसानियत के लिए एक मिसाल है. यदि हम इमाम हुसैन से प्यार करते हैं, तो हमें उनके तरीकों का पालन करना चाहिए. उन्होंने भूखा-प्यासा रहना पसंद किया, अपना देश, अपना घर छोड़ना पसंद किया, सब कुछ कुर्बान कर दीया लेकिन यजीद जैसे जालिम और अत्याचारी राजा को अपना हाथ नहीं दिया. मुसलमानों को उनकी जिंदगी से काफी कुछ सीखने की जरूरत है.
मोहर्रम के उपलक्ष्य में शनिवार को जालना शहर की जम जम मस्जिद में एक दिवसीय इजतेमा के साथ ही विविध मजहबी और सामाजिक उपक्रमों का आयोजन किया गया था. इस समय काजी अल्लाह बख्श अमजदी ने कर्बला के शहीदों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी. इस समय आशूरा की दुआ पढ़ी गई.
मौलाना अल्लाह बख्श अमजदी ने नागरिकों से आह्वान किया की वे इमाम हुसैन के नक्शेकदम पर चले तथा नाजायज और हराम कामों से बचें. उन्होंने कहा की सच्चा हुसैनी वह है जो इमाम हुसैन के जीवन के की तरह अपना जीवन बिताया. ईमान की ताकत के साथ इस्लाम का सख्ती से पालन करता है, और सभी सहाबा और अहले-बैत से सच्चा प्यार करता है.
शनिवार को महिलाओं के लिए भी जम जम मस्जिद के पास ही इजतेमा संपन्न हुए. जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया. जिसमें मदरसा अहले-सुन्नत हसनिया लिलबनत जालाना के शिक्षकों और छात्राओं ने नात, मनकबत, आशूरा की दुआ और कर्बला और मुहर्रम के शहीदों की जीवनी को लेकर मार्गदर्शन किया गया.

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