The second fast of Ramadan and its special prayer
📿 रमज़ान की दूसरी दुआ:
اللَّهُمَّ قَرِّبْنِي فِيهِ إِلَى مَرْضَاتِكَ وَجَنِّبْنِي فِيهِ مِنْ سَخَطِكَ وَنَقِمَاتِكَ وَوَفِّقْنِي فِيهِ لِقِرَاءَةِ آيَاتِكَ بِرَحْمَتِكَ يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ
रमज़ान की दूसरी दुआ का हिंदी उच्चारण:
"अल्लाहुम्मा क़र्रिब्नी फीहि इला मरज़ातिका व जन्निब्नी फीहि मिन सख़तिक व नक़मातिक, व वफ़्फ़िक्नी फीहि लि क़िराअति आयातिका बिरहमतिका या अरहमर-राहिमीन।"
(हे अल्लाह! इस महीने में मुझे अपनी प्रसन्नता के करीब कर दे, मुझे अपने ग़ुस्से और नाराज़गी से बचा, और मुझे अपनी आयतों की तिलावत करने की तौफ़ीक़ दे, अपनी रहमत से, ऐ सबसे बढ़कर रहमत करने वाले!)
🌟 हिंदी अनुवाद:
"ऐ अल्लाह! इस दिन मुझे अपनी रज़ा के करीब कर दे, मुझे अपने गुस्से और अज़ाब से बचा ले, और मुझे अपनी रहमत से अपनी आयतों की तिलावत की तौफ़ीक़ अता फरमा, ऐ सबसे ज्यादा रहम करने वाले।"
✨ दुआ की फज़ीलत:
- यह दुआ अल्लाह की रज़ा (खुशी) हासिल करने और उसके गुस्से से बचने के लिए है।
- रोज़े के दौरान यह पढ़ने से दिल को सुकून और बरकत मिलती है।
- कुरआन की तिलावत करने की तौफ़ीक़ और उसका सही मतलब समझने की दुआ।

🌙 रमज़ान के दूसरे दिन की अहमियत
दूसरा रोज़ा आत्मसंयम और धैर्य का सबक देता है। यह वह समय है जब हम अपने अंदर सब्र और अल्लाह की तरफ़ पूरी तरह रुझू करने की कोशिश करते हैं। इस दिन की दुआ हमें अल्लाह की रज़ा की तरफ़ बढ़ने में मदद करती है।
📖 कुरआन में फरमाया गया:
“जो अल्लाह की तरफ़ बढ़ता है, अल्लाह उसकी रहनुमाई करता है।”
🤲 इस पाक महीने में यह दुआ पढ़ें और अल्लाह की रहमत से अपनी जिंदगी को रोशन करें।
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🌙 ramazaan ka doosara roza aur isakee khaas dua 🤲
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