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“अल-वाह्हाब — अल्लाह जो बिना मांगे भी नेमतें बरसाता है | ९९ नामों की रौशनी”

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९९ नामों की रौशनी

अल-वाह्हाब — बगैर हिसाब के देने वाला, करम और इनाम बरसाने वाला

AL-WAHHAB – The Giver of Gifts, The One Who Gives Freely Again and Again


अर्थ और व्याख्या:

अल-वाह्हाब वह ज़ात है जो बार-बार, हर हाल में, बिना थके और बिना बदले की उम्मीद के देता है। उसकी इनायत हर गुनाह से बड़ी है और उसका करम बेहिसाब है।

कुरआनी संदर्भ:

“वह वाह्हाब है — जो सब कुछ अता करता है।”
— सूरह साद (38:9)

फज़ीलत और लाभ:

  • “या वाह्हाब” का वज़ीफ़ा रोज़ी, मक़सद और रहमत की कुंजी है।
  • दरख़्वास्तों की क़बूलियत में तेजी आती है।
  • शुक्र, तवक्कुल और इबादत में इज़ाफ़ा होता है।

दुआ और ज़िक्र:

“या वाह्हाब, हब्ली मिन लदुनका रहमतन व बारक ली फी रिज़्की”
(ऐ देने वाले! मुझे अपनी तरफ से रहमत अता कर और मेरी रोज़ी में बरकत दे)

ज़िंदगी में अमल:

जो अल-वाह्हाब को पहचानता है, वो हर नेमत को अल्लाह की इनायत मानता है — और उसी से मांगता है, उसी का शुक्र अदा करता है।


यह लेख http://www.imranjalna.com की “९९ नामों की रौशनी” श्रृंखला का हिस्सा है।

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इमरान सिद्दीकी

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