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“अल-क़ह्हार — अल्लाह की ग़ालिब ताक़त और अद्वितीय हुकूमत | ९९ नामों की रौशनी”

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९९ नामों की रौशनी

अल-क़ह्हार — हर चीज़ पर ग़ालिब आने वाला, जिसे कोई रोक नहीं सकता

AL-QAHHAR – The Dominant Over All, The Irresistible Force


अर्थ और व्याख्या:

अल-क़ह्हार वह है जो सब पर ग़ालिब है — न कोई उसका मुकाबला कर सकता है, न उसे रोक सकता है। वो अपने हुक्म से हर चीज़ पर क़ाबू रखता है।

कुरआनी संदर्भ:

“वह अल्लाह है, अकेला ग़ालिब (अल-क़ह्हार) है।”
— सूरह रअद (13:16)

फज़ीलत और लाभ:

  • “या क़ह्हार” का वज़ीफ़ा नफ़्स और शैतानी इच्छाओं पर जीत पाने में मदद करता है।
  • बुरी आदतों और डर से लड़ने की ताक़त देता है।
  • दिल में अल्लाह की महानता और हुकूमत का यकीन बढ़ाता है।

दुआ और ज़िक्र:

“या क़ह्हार, इह्सिम शैतानी व अज़िब हुब्ब दुन्या मिन्नी”
(ऐ ग़ालिब ज़ात! मेरे शैतान को खत्म कर और दुनिया की मोहब्बत को मेरे दिल से निकाल दे)

ज़िंदगी में अमल:

जो अल-क़ह्हार को जानता है, वह किसी ज़ालिम या ग़लत ताक़त से डरता नहीं — वो अपने रब पर भरोसा करता है कि आख़िर में जीत उसी की होती है जो हक़ पर है।


यह लेख http://www.imranjalna.com की “९९ नामों की रौशनी” श्रृंखला का हिस्सा है।

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इमरान सिद्दीकी

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