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नफरत के सौदागर और राष्ट्रीय संपत्ति की बर्बादी : एक गंभीर सवाल

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कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

Merchants of hatred and destruction of national property: A serious question

✍ मौलाना सैयद आसिफ नदवी
(इमाम व खतीब, मस्जिद गनीपुरा, नांदेड़)

आज का सोशल मीडिया एक ऐसा युद्धक्षेत्र बन चुका है जहां सच को झूठ और झूठ को सच के रूप में पेश किया जाता है। विशेष रूप से संप्रदायिक मानसिकता रखने वाले तत्वों द्वारा एक समुदाय के खिलाफ नफरत भड़काने की मुहिम लगातार चलाई जा रही है। कई बार, झूठी या एडिट की गई तस्वीरों और वीडियो के माध्यम से भ्रामक प्रचार किया जाता है।

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हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें इस सांप्रदायिक खेल का उदाहरण हैं। एक तरफ मुस्लिम बच्चों को पत्थर उठाते हुए दिखाया जाता है, वहीं दूसरी तरफ अल्पसंख्यक समुदाय से इतर बच्चों को स्कूल जाते और डिग्री प्राप्त करते दिखाया जाता है। यह एक गहरी साजिश है, जो हकीकत से ज्यादा झूठ और पूर्वाग्रह पर आधारित होती है। लेकिन जब हम वास्तविक घटनाओं पर नजर डालते हैं, तो स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आती है।

राष्ट्रीय संपत्तियों की बर्बादी : आखिर कौन जिम्मेदार?

हाल ही में कुंभ मेले के बाद वायरल हुईं तस्वीरें और वीडियो हकीकत को उजागर कर रही हैं। इन वीडियो में देखा गया कि कुछ असामाजिक तत्व रेलवे स्टेशनों पर हंगामा कर रहे हैं, ट्रेनों की खिड़कियां और दरवाजे तोड़ रहे हैं, टिकट काउंटरों पर हमला कर रहे हैं और पत्थरबाजी कर रेलवे की संपत्ति नष्ट कर रहे हैं।

कुछ स्थानों पर सरकारी संपत्ति को आग तक लगा दी गई, और रेलवे प्लेटफार्मों पर भारी गंदगी फैलाई गई। सरकारी संपत्तियां केवल सरकार की नहीं बल्कि आम जनता की भी धरोहर होती हैं, जो करदाताओं के पैसों से निर्मित की जाती हैं। लेकिन कुछ लोग इन्हें बेरहमी से बर्बाद कर देते हैं, जिससे न केवल सरकार बल्कि आम नागरिकों को भी नुकसान उठाना पड़ता है। अगर यही कृत्य कोई और करता तो…? यहां सवाल यह उठता है कि अगर यही कृत्य किसी और समुदाय के लोग करते, तो उन्हें तुरंत “देशद्रोही” और “आतंकवादी” करार दिया जाता। लेकिन इस मामले में एक गहरी चुप्पी नजर आती है।

अगर किसी अल्पसंख्यक समुदाय का कोई बच्चा मामूली पत्थरबाजी कर दे, तो उसके पूरे परिवार को सजा दी जाती है, घरों पर बुलडोज़र चला दिए जाते हैं। लेकिन दूसरी ओर, खुलेआम सरकारी संपत्तियों की तोड़फोड़, कानून की अवहेलना और हिंसा के बावजूद कोई कड़ी कार्रवाई नहीं होती। यह दोहरे मानदंडों और पक्षपातपूर्ण न्याय व्यवस्था का सबसे बड़ा उदाहरण है।

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नफरत और दोहरे मापदंडों का जाल

आज समाज का सबसे बड़ा संकट यही है कि कानून केवल कमजोरों के लिए सख्त है, जबकि ताकतवर के लिए वह एक खेल बन चुका है।
जब सोशल मीडिया पर झूठे वीडियो और फोटो के जरिये एक समुदाय को बदनाम किया जाता है, तो वास्तविक घटनाओं को लेकर इतनी खामोशी क्यों? अगर हम वास्तव में एक विकसित और सभ्य समाज बनना चाहते हैं, तो हमें इन दोहरे मानदंडों को खत्म करना होगा और न्याय की राह अपनानी होगी।

राष्ट्रीय संपत्तियों की बर्बादी किसी धर्म, संप्रदाय या जाति का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक समस्या है, जिसका हल निकालना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
शिक्षा और नैतिकता का दावा, लेकिन व्यवहार विपरीत!
यदि अपने आप को शिक्षित, सभ्य और सुसंस्कृत कहने वाले लोग इस प्रकार के अमानवीय और हिंसक कार्यों में लिप्त हो सकते हैं, तो फिर अनैतिकता और असभ्यता की परिभाषा क्या होगी?

जब एक विशेष समुदाय को आतंक और कट्टरता से जोड़ा जाता है, तो वही लोग अपनी ही पंक्तियों में मौजूद असभ्यता को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन सच यही है कि किसी भी समाज, धर्म या संप्रदाय को कुछ व्यक्तियों की गलत हरकतों से जोड़ना अनुचित है।

क्या हम सिर्फ नफरत और झूठ का हिस्सा बनकर रहेंगे?
हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हम सोशल मीडिया पर फैलाई जाने वाली अफवाहों और प्रोपेगेंडा का शिकार हो जाते हैं और बिना किसी सत्यापन के उन पर विश्वास कर लेते हैं।

जरूरत इस बात की है कि हम सच्चाई को परखें और किसी भी समुदाय के खिलाफ झूठे प्रचार का हिस्सा बनने के बजाय हकीकत को समझें। अगर नैतिकता और न्याय के मापदंड तय करने हैं, तो उन्हें सभी पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए, न कि किसी के प्रति भेदभाव रखा जाए।

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✍ मौलाना सैयद आसिफ नदवी
इमाम व खतीब मस्जिद गनीपुरा नांदेड़

अब निर्णय हमें लेना है…

अब हमें यह तय करना होगा कि क्या हम वाकई एक सभ्य समाज बनना चाहते हैं, या सिर्फ नफरत, झूठ और प्रोपेगेंडा का हिस्सा बनकर आने वाली पीढ़ियों के लिए और अधिक समस्याएं खड़ी करना चाहते हैं?
सभ्यता और संस्कार केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि उसे व्यवहार में भी अपनाना होगा – अन्यथा इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा।

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इमरान सिद्दीकी
Imran Siddiqui is a journalist based in Jalna, Maharashtra, and district representative for Navbharat (previously with Lokmat Samachar). He edits NewsNation Online, covering Jalna, Marathwada, Maharashtra and India, and ImranJalna, covering Islamic knowledge and Muslim-world news in English, Hindi and Urdu.

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