* २६ मई से शुरू होंगी उड़ानें
* खादीमीन हुज्जाज हज कमेटी का प्रशिक्षण शिविर संपन्न
जालना: हज के अरकानों को अदा करना महज एक रस्म या रिवाज नहीं है. यह अल्लाह के हुक्म का पालन करते हुए, नबियों की जमीन पर जाकर उनके कार्यों की नकल (अनुकरण) करने का नाम है. पैगंबर इब्राहीम (अ.स) से लेकर अल्लाह के आखरी पैगंबर मुहम्मद (स.अ) तक, जितने भी अरकान नबियों ने किए, उनकी नकल करना है. इसलिए इन अरकानों को सीखकर जरूरी है. यह बात मुफ्ती आरिफ ने कही.
खादिमीन हुज्जाज हज कमेटी जालना द्वारा गुरुवार को जालना शहर के नरीमान नगर स्थित मस्जिद हमजा में आयोजित चौथे प्रशिक्षण शिविर का समापन उत्साहपूर्वक हुआ. इस अवसर पर मुफ्ती आरिफ ने सुबह और दोपहर के सत्रों में हज यात्रियों को हज से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान की.
उन्होंने बताया कि हम जिस हज को करने जा रहे हैं, उसे ‘हज्जे तमत्तो’ कहते हैं, जिसमें दो इबादतें शामिल हैं: उमराह और हज के पांच दिन. उमराह के चार काम – एहराम, तवाफ, सई और हलक के बारे में उन्होंने विस्तार से बताया. हज के पांच दिनों में किए जाने वाले कामों की भी जानकारी दी और कहा कि अराफात के मैदान पर पहुंचना और वहां कडी धूप में खड़े होकर दुआ मांगना हज के बडे अरकानों में से एक है. Haj yatra Hindi
हज से संबंधित तकनीकी जानकारी प्रदान करते हुए, जिला हज मास्टर ट्रेनर राज मोहम्मद तांबोली ने हज सुविधा ऐप के उपयोग और इसकी आवश्यकता के बारे में बताया. उन्होंने सूचित किया कि भारत में एसबीआई बैंक में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने पर सऊदी रियाल प्राप्त किए जा सकते हैं. इसके अतिरिक्त, हाजी अपने साथ एक फॉरेन एक्सचेंज कार्ड भी ले जा सकते हैं, जो एटीएम कार्ड की तरह काम करता है. एक हाजी हवाई जहाज में 20-20 किलो के दो बैग और 7 किलो का हैंड बैग ले जा सकता है.
* 26 मई को मुंबई से पहली उड़ान
राज मोहम्मद तांबोली ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र के हज यात्रियों के लिए 26 मई को मुंबई से पहली उड़ान भरी जाएगी. मुंबई, नागपुर और चिकलथाना हवाई अड्डों से उड़ानें भरी जाएंगी. चिकलथाना से उड़ान का खर्च अधिक होने के कारण, बहुत कम लोगों ने इस इम्बारकेशन पॉइंट का चयन किया है.
गुरुवार को आयोजित प्रशिक्षण शिविर में 160 यात्रियों ने भाग लिया था, और महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी.

इस शिविर को सफल बनाना के लिए हज कमेटी के अध्यक्ष अहमद बिन सईद चाउस, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद मुजम्मिल भोकरदन, मौलाना असगर जाफराबाद, हाजी जमील सौदागर घनसावंगी, हाजी मोबिन अंबड, सैयद असद शब्बीर मंठा, हाफिज मुख्तार आष्टी, बाबर अंसारी परतुर, हाफिज हारून बदनापुर,
हाजी सत्तार टेलर बदनापुर के साथ ही कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों ने परिश्रम किया.
Haj ke arkaan hindi
हज के अरकान pillars of hajj
हज के अरकान, या हज के स्तंभ, इस्लामी हज यात्रा के मुख्य संस्कार हैं जो हर मुसलमान के लिए जीवन में कम से कम एक बार अनिवार्य होते हैं, बशर्ते कि वह शारीरिक और आर्थिक रूप से सक्षम हो।
- ये अरकान इस प्रकार हैं:
- 1. **इहराम**: हज की नियत के साथ विशेष वस्त्र धारण करना।
- 2. **तवाफ़**: काबा के चारों ओर सात बार चक्कर लगाना।
- 3. **सई**: सफ़ा और मरवा पहाड़ियों के बीच सात बार चलना।
- 4. **वुकूफ़-ए-अराफात**: नौ जिलहिज्जा को अराफात के मैदान में दोपहर से सूर्यास्त तक ठहरना।
- 5. **मुजदलिफा में रात बिताना**: अराफात से मुजदलिफा जाकर वहाँ रात गुजारना।
- 6. **रमी अल-जमरात**: तीन शैतानी स्तंभों (जमरात) पर कंकरियाँ मारना।
- 7. **कुर्बानी**: बकरीद के दिन कुर्बानी देना।
- 8. **हल्क या तकसीर**: बाल काटना या छोटा करना।
- 9. **तवाफ़ अल-इफादा**: हज का अंतिम तवाफ़।
- 10. **तवाफ़ अल-विदा**: मक्का छोड़ने से पहले अंतिम तवाफ़।
इन अरकानों को छोड़ने से हज अमान्य हो जाता है। इसलिए, हर मुसलमान को चाहिए कि वह इन्हें पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ अदा करे।¹²
हज यात्रा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक यात्रा भी है जो मुसलमानों को अल्लाह के प्रति अपनी आस्था और समर्पण को प्रदर्शित करने का अवसर देती है। इस यात्रा के दौरान, हज यात्री अपने आपको अल्लाह के हवाले करते हैं और अपने जीवन को नए सिरे से आरंभ करने का संकल्प लेते हैं। यह यात्रा उन्हें अपने धर्म के प्रति और भी अधिक समर्पित बनाती है और उन्हें एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देती है।
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