* अंबड में जमात ए इस्लामी महिला इकाई की ओर से मनाया गया “विश्व महिला दिवस”
जालना: महिलाओं की आजादी के नाम पर उनका शोषण ना हो यह विचार जमात-ए-इस्लामी हिंद छत्रपति संभाजीनगर जिला महिला इकाई की जिलाध्यक्ष शाइस्ता परवीन ने व्यक्त किए. विश्व महिला दिवस तथा रमजान महीने के आगमन पर अंबड शहर की पुरानी तहसील में स्थित मंगल कार्यालय में जमात-ए-इस्लामी अंबड महिला इकाई की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वह अपने अध्यक्षीय भाषण में बोल रही थी.
कार्यक्रम की शुरुआत खिजर ज़मानी ने कुरान की तिलावत से की. इसके बाद गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन इंडिया (जी आई ओ) की स्थानीय अध्यक्ष सारा फिरदौस ने रमजान के वास्तविक उद्देश्य के बारे में जानकारी दी. इसके बाद चिल्ड्रन सर्कल (सीसी) की बालिकाओं ने रमजान के स्वागत में तराना पेश किया.

इस अवसर पर मार्गदर्शन करते हुए शाइस्ता परवीन ने आगे कहा कि आज महिलाओं की आजादी को लेकर बड़े पैमाने पर हो हल्ला मचाया जाता है. महिलाओं की आजादी के नाम पर अलग-अलग अनुमान लगाए जाते है और स्वयं को बहुत अधिक महिलावादी बताने का प्रयास किया जाता है. महिलाओं की आजादी को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता है. एक तरफ तो मणिपुर में महिलाओं की नग्न अवस्था में परेड कराई जाती है. वहीं दूसरी ओर करोड़ों रुपए खर्च कर महिला को शादियों में नचाया जाता है. पता नहीं महिलाओं की आजादी की यह कौन-सी विचारधारा है. महिलाओं की आजादी के नाम पर महिलाओं को मान-सम्मान ना दिलाते हुए उसके साज श्रृंगार और खूबसूरती का एवं देह प्रदर्शन का बाजार लगाया जाता है. परिणामस्वरूप वह आज बड़े पैमाने पर प्रताड़ित हो रही है. बलात्कार, व्याभिचार और अत्याचार की शिकार हो रही है. यदि हकीकत में देखा जाए तो एक महिला को लड़की, बहन, बहू, मां और सास ऐसी अलग अलग जिम्मेदारी निभानी होती है इसलिए हर महिला को अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए. इस्लाम ने महिला को बहुत ऊंचा मुकाम दिलाया है और यही कारण है कि मां के कदमों तले जन्नत है इस बात की शिक्षा दी है. पहले लड़की के जन्म पर मातम मनाया जाता था, उसे अपशकुन समझा जाता था. उसको जायदाद में कोई हक़ हासिल नहीं था. इस्लाम ने इन सभी मान्यताओं का खंडन करते हुए महिला को उसका अधिकार दिलाया.
आगे रमजान महिने के बारे में जानकारी देते हुए शाहिस्ता परवीन ने कहा कि रमज़ान पंचपक्वानों और खुब खान-पान का महीना नहीं है. यह इबादत का महीना है. गरीबों और जरूरतमंदों की की परेशानी तथा उनके दुख दर्द का एहसास दिलाने वाला महीना है. इसलिए हम सबको ज्यादा से ज्यादा इबादतों पर ध्यान देना चाहिए. इस महीने में ज्यादा से ज्यादा कुरआन का अध्ययन करने और उसको तर्जुमे के साथ समझ कर पढ़ने पर जोर देना चाहिए.
इसके बाद सवाल जवाब के सत्र में उन्होंने उपस्थित महिलाओं के सवालों के जवाब देते हुए उनकी शंकाएं दूर की. अंत में तबस्सुम जबीन की दुआ पर कार्यक्रम का समापन हुआ. इस अवसर पर शहर भर से लगभग ढाई से तीन सौ महिलाएं उपस्थित थी.

Women should not be exploited in the name of freedom – Shaista Parveen
Discover more from ImranJalna
नवीनतम पोस्ट अपने ईमेल पर प्राप्त करने के लिए सदस्यता लें।














Leave a Reply