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“अल-ग़फ़्फ़ार — अल्लाह जो हर बार तौबा पर माफ़ कर देता है | ९९ नामों की रौशनी”

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९९ नामों की रौशनी

अल-ग़फ़्फ़ार — बार-बार माफ़ करने वाला, गुनाहों को ढकने वाला

AL-GHAFFAR – The Constant Forgiver, The One Who Covers Sins Again and Again


अर्थ और व्याख्या:

अल-ग़फ़्फ़ार वह है जो अपने बंदों के गुनाहों को बार-बार माफ़ करता है — और शर्मिंदगी से भी बचाता है। यह नाम उसकी रहमत, रहनुमाई और तौबा की अहमियत को बयान करता है।

कुरआनी संदर्भ:

“और निस्संदेह मैं अल-ग़फ़्फ़ार हूँ, उस व्यक्ति के लिए जो तौबा करे, ईमान लाए और अच्छे काम करे।”
— सूरह ताहा (20:82)

फज़ीलत और लाभ:

  • “या ग़फ़्फ़ार” का वज़ीफ़ा गुनाहों से राहत और दिल को राहत देने वाला है।
  • तौबा की ताक़त बढ़ाता है, शर्मिंदगी को खत्म करता है।
  • मायूसी को दूर कर उम्मीद और हिम्मत पैदा करता है।

दुआ और ज़िक्र:

“या ग़फ़्फ़ार, इग़्फ़िर लि ज़ुनूबी कुल्लाहा”
(ऐ ग़फ़्फ़ार! मेरे तमाम गुनाहों को माफ़ कर दे)

ज़िंदगी में अमल:

जो अल-ग़फ़्फ़ार को जानता है, वह गुनाह से डरता तो है, पर मायूस नहीं होता। वह बार-बार अल्लाह की तरफ लौटता है, क्योंकि जानता है कि अल्लाह की माफ़ी हर बार इंतज़ार कर रही है।


यह लेख http://www.imranjalna.com की “९९ नामों की रौशनी” श्रृंखला का हिस्सा है।

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इमरान सिद्दीकी

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