रमज़ान मुबारक: 13वें दिन की खास दुआ और उसका महत्व
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पवित्र रमज़ान का हर दिन रहमतों और बरकतों से भरा होता है। जैसे-जैसे यह मुबारक महीना आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे रोज़ेदारों का दिल अल्लाह की इबादत में और अधिक झुकता है। रमज़ान के 13वें दिन की दुआ भी बहुत खास मानी जाती है।
13वें रोज़े की दुआ (Arabic):
اَللّٰهُمَّ طَهِّرْنِىْ فِيْهِ مِنَ الدَّنَسِ وَالْاَقْذَارِ، وَصَبِّرْنِىْ فِيْهِ عَلَى كَائِنَاتِ الْاَقْدَارِ، وَوَفِّقْنِىْ فِيْهِ لِلتُّقٰى وَصُحْبَةِ الْاَبْرَارِ، بِعَوْنِكَ يَا قُرَّةَ عَيْنِ الْمَسَاكِيْنِ۔
हिंदी उच्चारण (Pronunciation in Hindi):
“Allahumma tahhirni fihi minad-danasi wal-aqdhār, wa sabbirni fihi ‘ala kā’ināt-il-aqdār, wa waffiqni fihi lit-taqā wa suhbat-il-abrār, bi ‘awnika yā qurrata ‘aynil-masākīn.”
हिंदी अनुवाद:
“हे अल्लाह! इस दिन मुझे हर तरह की गंदगी और अशुद्धियों से पाक कर दे, मुझे तक़दीर के फैसलों पर सब्र करने की ताक़त दे और मुझे परहेज़गारी व नेक लोगों की संगत नसीब कर। ऐ गरीबों की आंखों की ठंडक देने वाले रब!”
इस दुआ का महत्व:
इस दुआ में हम अल्लाह से न केवल बाहरी बल्कि अंदरूनी पाकीज़गी की दुआ करते हैं। साथ ही हम अल्लाह से यह भी फरियाद करते हैं कि मुश्किल हालात में हमें सब्र की दौलत दे और हमें नेक लोगों की संगत मिले ताकि हम सच्चे मोमिन बन सकें।
रमज़ान का यह दिन आत्म-सुधार और सब्र के साथ अल्लाह की रहमतें पाने का एक सुनहरा अवसर है।
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