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कुबार्नी की बरकत से दूर होती हैं बलाएं और बीमारियां  

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त्योहार: बकरीद के दौरान एहतियात बरतने की मौलाना मिस्बाही की अपील

जालना: इस्लाम में कुबार्नी का बहुत महत्व है. कुबार्नी के दिनों में कुबार्नी करना ही वाजिब है. इसकी बरकत से गुनाह मिटते हैं. मुसीबतें और परेशानियां टलती है तथा बलाएं और बीमारियां भी दूर होती हैं. इसलिए नागरिक  सरकार के सभी नियमों का पालन कर अपनी कुर्बानियां अल्लाह की राह में पेश करें. सार्वजनिक स्थानों पर कुबार्नी करने से बचने की अपील गुलजार मस्जिद के पेश इमाम  मौलाना गुलाम जिलानी मिस्बाही ने की है.

फोटो जालना दौरे पर आए छत्रपति संभाजीनगर विशेष पुलिस निरीक्षक डॉ ज्ञानेश्वर चव्हाण शनिवार को जालना दौरे पर थे इस दौरान मुस्लिम नागरिकों की ओर से मंगलबाजार स्थित गुलजार मस्जिद के पेश इमाम मौलाना गुलाम जिलानी मिस्बाही और असलम कुरैशी ने उनका विशेष रूप से स्वागत किया

मौलाना मिस्बाही ने दो दिन पहले छत्रपति संभाजीनगर परिक्षेत्र के विशेष पुलिस महानिरीक्षक डॉ ज्ञानेश्वर चव्हाण से मुलाकात कर मुस्लिम समाज की ओर से उनका स्वागत करते हुए. ईद के उपलक्ष्य में चर्चा की तथा कहा कि जालना में मुस्लिम समाज हमेशा ही ईद को लेकर आपसी भाईचारा बनाए रखता है. इस बार भी लोगों को हर समय ईद किस तरह मनाए इसको लेकर मार्गदर्शन किया जा रहा है. 

मौलाना मिस्बाही ने ईद के  उपलक्ष्य में प्रेस नोट जारी करते हुए कहा कि कुबार्नी  एक तरह का  सदका और  फिदिया है.   कुबार्नी के दिनों में कुबार्नी करना ही   वाजिब है. इसका कोई बदला हो ही नहीं सकता.  मौलाना ने कहा कि सावधानी बरतना और एहतियात बरतते हुए हर तरह की जिम्मेदारी को निभाना  इस्लामी तौर-तरीके में है.  मुसलमानों को भी चाहिए कि पूरी   जिम्मेदारी से एहतियात बरतते हुए  अपने इस फरीजा को अंजाम दें.

 ‘सार्वजनिक स्थानों पर कुबार्नी न करें*

 मौलाना जिलानी ने कहा कि ईद खुशी की मोका होता है. ऐसे में हमें इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि हमारी वजह से किसी अन्य को परेशानी नहीं हो. हम किसी भी तरह के कानून का उल्लंघन ना करें, क्योंकि इस्लाम कानून का उल्लंघन करने की इजाजत नहीं देता है. रास्तों और सार्वजनिक जगहों पर कुबार्नी न करें, बल्कि बड़े आहातों में कुबार्नी का अहतमाम करें. जिन जानवरों पर कानूनी तौर पर पाबंदी है, उनकी कुबार्नी करने से परहेज करें. साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें. कुबार्नी का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड  न किया जाए. जो लोग नफली कुबार्नी का इरादा रखते हैं, बेहतर है कि वे लोग आफ़त में मुब्तिला लोगों की मदद करें. बिरादराने वतन के जज्बात का ख्याल रखें. उन्होंने कहा कि कुबार्नी उम्मत के मालदारों पर वाजिब है, लेकिन अगर कोई गरीब कुबार्नी पेश करें तो वह भी उसी सवाब का हकदार होगा, इसलिए प्यारे रसूल ने फरमाया कि खुशी दिल से कुबार्नी किया करो, सवाब भी मिलेगा और रोजी में भी बरकत होगी.


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इमरान सिद्दीकी

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