९९ नामों की रौशनी
अल-बारि’ — हर मख़लूक को संतुलन और रूप देकर बनाने वाला
AL-BAARI’ – The Evolver, The Maker of Perfect Balance
अर्थ और व्याख्या:
अल-बारि’ वह है जिसने हर मख़लूक को न सिर्फ़ पैदा किया, बल्कि एक खास रूप, कार्यक्षमता और संतुलन के साथ गढ़ा।
कुरआनी संदर्भ:
“वह अल्लाह है… अल-खालिक़, अल-बारि’, अल-मुसव्विर।”
— सूरह हश्र (59:24)
फज़ीलत और लाभ:
- “या बारि’” का वज़ीफ़ा आत्म-संतुलन और क़ुदरती सुंदरता की कद्र सिखाता है।
- शरीर और मन के बीच तालमेल पैदा करता है।
- अल्लाह की रचना की बारीकी को समझने की नज़र देता है।
दुआ और ज़िक्र:
“या बारि’, अजिल बिनज़्मिक व अजअल मिन्नल मुक़द्दसीन”
(ऐ बारि’! मुझे अपनी रचना के संतुलन के साथ चलने वाला बना और मुझे पाक लोगों में शामिल कर)
ज़िंदगी में अमल:
जो अल-बारि’ को जानता है, वह हर मख़लूक़ की क़द्र करता है और अपने जीवन में संतुलन, संयम और मक़सद को अपनाता है।
यह लेख http://www.imranjalna.com की “९९ नामों की रौशनी” श्रृंखला का हिस्सा है।

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