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“अल-मुतकब्बिर — बड़ाई और बुलंदी सिर्फ अल्लाह के लिए है | ९९ नामों की रौशनी”

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९९ नामों की रौशनी

अल-मुतकब्बिर — अल्लाह जो सबसे बड़ा, सबसे ऊँचा और हर घमंड से पाक है

AL-MUTAKABBIR – The Supremely Great, The Majestic, The One Free from all Pride


अर्थ और व्याख्या:

अल-मुतकब्बिर वह है जिसकी बड़ाई हर मख़लूक से ऊपर है — जो ना तो घमंडी है, ना ज़ालिम, बल्कि बड़ाई का असली मालिक है।

कुरआनी संदर्भ:

“वही अल्लाह है… अल-जब्बार, अल-मुतकब्बिर…”
— सूरह अल-हशर (59:23)

फज़ीलत और लाभ:

  • “या मुतकब्बिर” का वज़ीफ़ा दिल में तौहीद और नम्रता का एहसास जगाता है।
  • घमंड और दिखावे से इंसान को दूर करता है।
  • दिल को झुकाव और सच्ची इबादत के लिए तैयार करता है।

दुआ और ज़िक्र:

“या मुतकब्बिर, अजिल्ली बिनूरिक व अजअल्नी मिनल ख़ाशे’ईन”
(ऐ बुलंद ज़ात! मुझे अपने नूर से रौशन कर और झुकने वालों में शामिल कर)

ज़िंदगी में अमल:

जो अल-मुतकब्बिर को पहचानता है, वो हर घमंड को छोड़कर नम्रता और आजिज़ी के साथ अल्लाह की बंदगी करता है।


यह लेख http://www.imranjalna.com की “९९ नामों की रौशनी” श्रृंखला का हिस्सा है।

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इमरान सिद्दीकी

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