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रमज़ान दिन 26 की दुआ – ऐ अल्लाह! हमें अपने साए में जगह अता फ़रमा

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रमज़ान दिन 26 की दुआ – ऐ अल्लाह! हमें अपने साए में जगह अता फ़रमा

इस्लामिक कैलेंडर का सबसे मुकद्दस महीना रमज़ान अपने आखिरी अशरे में है। रमज़ान की 26वीं रात अल्लाह की रहमतों, मगफिरत और बरकतों को समेटे हुए होती है। इस दिन की दुआ न सिर्फ दिल को सुकून देती है, बल्कि रूह को भी अल्लाह के करीब ले जाती है।

अरबी दुआ:

اللهم اجعل لنا ظلّاً في ظلّك

हिंदी उचारण:

“ऐ अल्लाह! हमें अपने साए में जगह अता फ़रमा।”

दुआ का मतलब:

इस दुआ में हम अल्लाह से यह मांग करते हैं कि वह हमें अपने रहमत और हिफाज़त के साए में जगा दे। दुनिया की परेशानियों, ग़लत रास्तों और आख़िरत की सज़ाओं से हमें बचाए। यह दुआ उन लोगों के लिए भी है जो जीवन में दिशा खोज रहे हैं और अल्लाह की रहनुमाई चाहते हैं।

इबादत और तौबा का मौक़ा:

रमज़ान की इन मुकद्दस रातों में की गई दुआ, तौबा और इबादत को खास दर्जा हासिल है। 26वीं रात में हर मुसलमान को चाहिए कि वह तहे दिल से अल्लाह को पुकारे और अपने गुनाहों की माफी मांगे।

नसीहत: यह रातें लौट कर नहीं आतीं, इसलिए हर पल को इबादत और नेकियों में लगाना चाहिए। अल्लाह की रहमत उन पर बरसती है जो दिल से उसे याद करते हैं।


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इमरान सिद्दीकी

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