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नन्हीं माहम का पहला रोज़ा

रहमतों भरा एहसास, घर में रूहानी रौनक

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नन्हीं माहम का पहला रोज़ा — रहमतों भरा एहसास, घर में रूहानी रौनक

क़द्राबाद, जालना। माहे-रमज़ान की नूरानी आमद के साथ ही हर दिल इबादतों में मशग़ूल है। इसी पवित्र मौके पर मोहतरम फ़रीद क़ादरी साहब की लाडली बेटी माहम ने महज़ 09 साल की उम्र में पहला रोज़ा रखकर सबको ख़ुशगवार तअज्जुब में डाल दिया।

ये सिर्फ एक रोज़ा नहीं, बल्कि उस मासूम दिल की रूहानी लगन का सुबूत है, जो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की रज़ा के लिए उठी है। माहम की इस पाक नियत और अल्लाह से वफ़ादारी पर पूरा घर रहमतों और बरकतों से सरशार हो गया।

घर वालों ने बड़े फख्र से बताया कि माहम ने खुद दिल से रोज़ा रखने की ख्वाहिश ज़ाहिर की थी। इस उम्र में भी जब बच्चे खेल-कूद में लगे होते हैं, माहम ने सब्र, इबादत और तक़्वा की राह अपनाई।

अहले-खानदान और अज़ीज़-ओ-अक़रबा ने माहम को खूब दुआएं दीं:
“अल्लाह तआला माहम को नेक सीरत, लंबी उम्र और दीन-दुनिया की कामयाबी अता फ़रमाए। आमीन।”

इलाके में भी इस बात की सराहना की जा रही है कि आज की पीढ़ी में दीन की मुहब्बत जिंदा है और माहम जैसी बच्चियां क़ौम की रूहानी ताज़गी की अलामत हैं।

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इमरान सिद्दीकी

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