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रमज़ान का 14वां दिन: दुआ, बरकत और रहमत का पाक मौका

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रमज़ान का 14वां दिन: दुआ, बरकत और रहमत का पाक मौका

रमज़ान का पाक महीना सिर्फ इबादत का ही नहीं, बल्कि आत्मा की ताज़गी और गुनाहों से निजात पाने का महीना है। हर रोज़ा एक नई तौबा, नई दुआ और अल्लाह की रहमत की उम्मीद लेकर आता है। आज रमज़ान का 14वां दिन है — एक और मुक़द्दस मौका अपने रब से करीब होने का।

■ रमज़ान की 14वीं रोज़े की दुआ :

अरबी दुआ:
اللَّهُمَّ لا تُؤَاخِذْنِي فِيهِ بِالْعَثَرَاتِ، وَأَقِلْنِي فِيهِ مِنَ الْخَطَايَا وَالْهَفَوَاتِ، وَلا تَجْعَلْنِي غَرَضاً لِلْبَلَايَا وَالآفَاتِ، بِعِزَّتِكَ يَا عِزَّ الْمُسْلِمِينَ

हिंदी उच्चारण (Pronunciation):
Allahumma la tu-aakhizni fihi bil-atharaat, wa aqilni fihi minal-khataayaa wal-hafawaat, wa la taj‘alni gharadan lil-balaya wal-aafaat, bi-izzatika ya ‘izzal-muslimeen.

हिंदी अर्थ:
“ऐ अल्लाह! आज के दिन मेरी चूकों का मुआख़ज़ा न कर, मुझे गुनाहों और गलतियों से बचा ले, मुझे मुसीबतों और बीमारियों का निशाना न बना — ऐ मुसलमानों की इज्ज़त के मालिक!”

■ आज के अमल और इबादत की अहमियत :

  • पांचों वक्त की नमाज़ की पाबंदी
  • क़ुरआन की तिलावत में वक्त गुज़ारना
  • दुआ और इस्तिग़फार को बढ़ाना
  • सदक़ा और खैरात देना

रमज़ान का हर लम्हा रहमत और बरकतों से भरा होता है। 14वें रोज़े की यह दुआ हमें याद दिलाती है कि अल्लाह की रहमत सिर्फ तौबा करने भर से हमारे करीब आ जाती है। आइए आज दिल से दुआ करें, नेकियों में आगे बढ़ें और इस पाक महीने का भरपूर फायदा उठाएं।

“रमज़ान का हर दिन, हर दुआ — अल्लाह की रहमत का तोहफा है”
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इमरान सिद्दीकी

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