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सोने से पहले कुछ नेक अमल और दुआएं जिनसे बेशुमार सवाब हासिल हो.sone se pahale kuchh nek amal aur duaen jinase beshumaar savaab haasil ho (hindi)

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सोने से पहले कुछ नेक अमल और दुआएं जिनसे बेशुमार सवाब हासिल हो

Some good deeds and prayers before sleeping which will earn you countless rewards

sone se pahale kuchh nek amal aur duaen jinase beshumaar savaab haasil ho(hindi)

आज का दिन काफ़ी मुश्किल और मसरूफ़ गुज़रा? सिर्फ़ फ़र्ज़ नमाज़ ही अदा कर पाए? क़ुरान-ए-पाक को हाथ लगाने, चंद दुआएं पढ़ने या नफ़्ल नमाज़ अदा करने की फ़ुर्सत ही नहीं मिली? दुनिया फ़तह कर ली? अब क्या ख़्याल है? बिल्कुल थक चुके हैं और अल्लाह को याद किए बग़ैर फ़ौरन सोने जा रहे हैं? अल्लाह के वास्ते ऐसा न कीजिए!
इस मज़्मून में कुछ नेक अमल बयान किए गए हैं जो आप रोज़ाना रात को सोने से ठीक पहले अल्लाह तआला को याद करने और उनसे बेशुमार सवाब हासिल करने के लिए कर सकते हैं, इंशा अल्लाह। इन नेक, छोटे मगर असरदार अमल को करने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगेगा और एक बार जब ये आपकी आदत बन जाएगी तो आपको ये करने में लुत्फ़ आएगा, इंशा अल्लाह। याद रखिए, ये हमारे प्यारे नबी (ﷺ) की सुन्नतें हैं!

सोने से पहले की तैयारी

  • घर के दरवाज़े बंद करने से पहले, खाने से भरे बर्तनों को ढकने से पहले, आग बुझाने या बंद करने से पहले,  بِسْمِ اللَّهِ बिस्मिल्लाह पढ़िए। [बुख़ारी] अगर बर्तन को ढकने के लिए कुछ न मिले तो बर्तन के ऊपर एक लकड़ी रख देनी चाहिए। [मुस्लिम]
  • बिस्तर पर जाने से पहले, अपने लिबास के कोने से बिस्तर को तीन बार झाड़ दीजिए। [बुख़ारी, मुस्लिम, अबू दाऊद, तिर्मिज़ी, इब्न माजाह]
  • बिस्तर पर जाने से पहले मिस्वाक कीजिए, अगरचे आपने ईशा की नमाज़ के लिए कर ली हो। [किताबुत तहारत और सुन्नत]
  • वुज़ू की हालत में सोइए [तबरानी, हकीम, अबू दाऊद]
  • दाहिनी करवट सोइए, क़िबला की तरफ़ मुंह करके, दाहिने हाथ को सिर के नीचे तकिये की तरह रखिए और घुटनों को थोड़ा मोड़कर रखिए। [बुख़ारी]

सोने से पहले की दुआएं

सोने से पहले क़ुरान-ए-पाक की तिलावत
* सूरह अल-बक़रा (सूरह नंबर 2 – गाय) की आख़िरी दो आयतें पढ़िए

हज़रत अबू मसऊद अल-बद्री (रज़ियल्लाहु अन्हु) फ़रमाते हैं: मैंने हुज़ूर (ﷺ) को ये कहते हुए सुना, “जो शख़्स रात में सूरह अल-बक़रा के आख़िर में दो आयतें पढ़ता है, वो उसके लिए काफ़ी होंगी।” [अल- बुख़ारी और मुस्लिम]

हज़रत अन-नुमान बिन बशीर (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है: कि रसूल अल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: “बेशक अल्लाह तआला ने आसमान और ज़मीन बनाने से दो हज़ार साल पहले एक किताब में लिखा था, और उसमें से दो आयतें उतारीं जिन पर सूरह अल-बक़रा ख़त्म होती है। अगर इन आयतों को तीन रातों तक किसी घर में पढ़ा जाए, तो कोई भी शैतान उसके क़रीब नहीं आएगा।” [तिर्मिज़ी]

* क़ब्र के अज़ाब से हिफ़ाज़त के लिए सूरह अल-मुल्क (सूरह नंबर 67 – बादशाही) पढ़िए।

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हुज़ूर (ﷺ) ने फ़रमाया, “सूरह अल मुल्क क़ब्र के अज़ाब से बचाने वाली है” [सहीहुल जमीआ 1/680, हकीम 2/498 और नसाई]

रसूल अल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया, “क़ुरान-ए-पाक में एक सूरह है जो सिर्फ़ तीस आयतों की है। इसने जिसने भी इसे पढ़ा, उसकी हिफ़ाज़त की, यहाँ तक कि ये उसे जन्नत में पहुँचा देती है” यानी, सूरह अल मुल्क [फ़तह अल क़ादिर 5/257, सहीहुल जमीआ 1/680, अल-अव्सत में तबरानी और इब्न मर्दावैथ]

हज़रत जबीर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने कहा कि ये हुज़ूर (ﷺ) का मामूल था कि जब तक वो तबारकलladhi बियादिहिल मुल्क और अलिफ़ लाम मीम तंज़ील नहीं पढ़ लेते थे, तब तक वो सोते नहीं थे। [अहमद, तिर्मिज़ी और दारमी]

हज़रत अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने रसूलुल्लाह (ﷺ) से रिवायत की, “एक सूरह ऐसी है जो अपने पढ़ने वाले की सिफ़ारिश करेगी यहाँ तक कि उसे जन्नत में दाख़िल करवा देगी” (तबारकलladhi बियादिहिल मुल्क)। [तबरानी]

* सूरह अल-काफ़िरून (सूरह नंबर 109 – काफ़िर) पढ़िए

हज़रत नवल अल-अशजई (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है: अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने मुझसे फ़रमाया: “क़ुल या अय्युहल-काफ़िरून पढ़ो और फिर इसके ख़त्म होने के बाद सो जाओ, क्योंकि ये शिर्क से बरी होना है।” [अबू दाऊद और अल-तिर्मिज़ी]

* क़ुरान-ए-पाक की आख़िरी तीन सूरहें (क़ुल) (सूरह नंबर 112-114) पढ़िए

हज़रत आयशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है कि जब रसूल अल्लाह (ﷺ) हर रात बिस्तर पर जाते, तो वो अपने दोनों हाथों को मिलाकर उनमें फूंक मारते, और उनमें क़ुल हुवल्लाहु अहद, क़ुल औज़ु बि रब्बिल-फलक और क़ुल औज़ु बि रब्बिन-नास पढ़ते। फिर वो अपने सिर और चेहरे से शुरू करके, अपने जिस्म के जितने हिस्से पर मुमकिन होता, उन हाथों को फेर लेते, और ये तीन बार करते। [बुख़ारी]

कुछ और सूरतें पढ़ने की सिफ़ारिश:

* सूरह अल-इसरा (सूरह नंबर 17 – रात का सफ़र) पढ़िए
* सूरह अज़-ज़ुमर (सूरह नंबर 39 – गिरोह) पढ़िए
   हज़रत आयशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है: “रसूल अल्लाह (ﷺ) तब तक नहीं सोते थे जब तक वो बनी इस्राइल (सूरह अल-इसरा) और अल-ज़ुमर नहीं पढ़ लेते थे।” [अल-तिर्मिज़ी]

सोने से पहले की दुआएं
* अगर आप में से कोई अपने बिस्तर से उठे और फिर वापस उस पर आए तो उसे अपने लिबास के किनारे से उसे तीन बार झाड़ लेना चाहिए क्योंकि उसे नहीं मालूम कि उसकी ग़ैर-मौजूदगी में क्या हुआ है और जब वो लेट जाए तो उसे ये दुआ पढ़नी चाहिए:

Arabic: بِاسْمِكَ رَبِّي وَضَعْتُ جَنْبِي، وَبِكَ أَرْفَعُهُ، فَإِنْ أَمْسَكْتَ نَفْسِي فَارْحَمْهَا، وَإِنْ أَرْسَلْتَهَا فَاحْفَظْهَا بِمَا تَحْفَظُ بِهِ عِبَادَكَ الصَّالِحِينَ

बिसमिका रब्बी वदअ़तु जंबी, व बिका अरफऊहु, फ़ इन अम्सकता नफ़सी फ़रहमहा, व इन अरसल्तहा फ़हफ़ज़हा बिमा तहफ़ज़ बिही इबादकस्सालिहीन।
ऐ मेरे परवरदिगार! मैं तेरे नाम के साथ अपनी करवट (बिस्तर पर) रखता हूँ और तेरे ही नाम के साथ उसे उठाता हूँ। अगर तू मेरी रूह क़ब्ज़ कर ले तो उस पर रहम फ़रमा और अगर तू उसे वापस लौटा दे तो उसकी हिफ़ाज़त फ़रमा जिस तरह तू अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त फ़रमाता है। [बुख़ारी और मुस्लिम]

* सोने से पहले रसूल अल्लाह (ﷺ) अपना दाहिना हाथ अपने गाल के नीचे रखते और तीन बार ये दुआ पढ़ते:
   اللَّهُمَّ قِنِي عَذَابَكَ يَوْمَ تَبْعَثُ عِبَادَكَ
अल्लाहुम्मा क़िनी अज़ाबका यौम तबअसु इबादक।
ऐ अल्लाह, उस दिन मुझे अपने अज़ाब से बचा जिस दिन तू अपने बंदों को उठाएगा। [अबू दाऊद]

* ये दुआ भी पढ़िए:
   بِاسْمِكَ اللَّهُمَّ أَمُوتُ وَأَحْيَا
बिस्मिकल्लाहुम्मा अमूतु व अहया
ऐ अल्लाह, मैं तेरे नाम के साथ मरता हूँ और जीता हूँ [मुस्लिम]

* सोने में तकलीफ़ होने पर, हज़रत ज़ैद बिन साबित (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने रसूलुल्लाह (ﷺ) से शिकायत की कि कभी-कभी उन्हें नींद नहीं आती है, तो आप (ﷺ) ने उन्हें ये दुआ पढ़ने की सलाह दी:
   اللَّهُمَّ غَارَتِ النُّجُومُ وَهَدَأَتِ الْعُيُونُ وَأَنْتَ حَيٌّ قَيُّومٌ * لَا تَأْخُذُكَ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ أَهْدِئْ لَيْلِي وَأَنِمْ عَيْنِي
अल्लाहुम्मा ग़ारतिन्नजुमु व हदाअतिल उयूनु व अनत हय्युन क़य्युमुल्ला ताअख़ुज़ुका सिनातुवला नौमुन या हय्युन या क़य्युमु अहदे लैली व अनिम अयनी।
ऐ अल्लाह! तारे डूब गए हैं और आँखें शांत और ख़ामोश हो गई हैं और तू ज़िंदा और बाक़ी रहने वाला है, तुझे न ऊँघ आती है और न नींद। ऐ ज़िंदा और बाक़ी रहने वाले! मेरी रात को शांत कर दे और मेरी आँखों को नींद दे दे। [इब्न सुन्नी, हिसनुल हसीन]

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* अगर सोने से डर लग रहा हो या तन्हाई या उदासी महसूस हो रही हो तो ये दुआ पढ़िए:
   أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللهِ التَّامَّاتِ مِنْ غَضَبِهِ وَعِقَابِهِ، وَشَرِّ عِبَادِهِ، وَمِنْ هَمَزَاتِ الشَّيَاطِينِ وَأَنْ يَحْضُرُونِ
आऊज़ु बिकलिमातिल्लाहित-ताम्माति मिन ग़ज़बिही व इक़ाबिही, व शर्री इबादीही, व मिन हमज़ातिश-शयातीनी व अन यह्ज़ुरून।
मैं अल्लाह
के कामिल कलाम की पनाह माँगता हूँ उसके ग़ज़ब और उसकी सज़ा से, उसके बंदों की बुराई से, और शैतानों के वसवसों से और उनके हाज़िर होने से। [अबू दाऊद और तिर्मिज़ी]

* अगर रात में करवट बदलते वक़्त ये दुआ पढ़िए:
   لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ الْوَاحِدُ اْقَهَّارُ، رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا الْعَزِيزُ الْغَفَّارُ
ला इलाहा इल्लल्लाहुल-वाहिदुल-क़ह्हारु, रब्बुस-समावाति वल-अर्ज़ी व मा बैनहुमल-अज़ीज़ुल-ग़फ़्फ़ारु।
अल्लाह के सिवा कोई मा’बूद नहीं, वो वाहिद है, क़ाहिर है, आसमानों और ज़मीन और उनके दरमियान जो कुछ है उसका रब है, वो ग़ालिब है, बख़्शने वाला है। [अन-नसाई, अमलुल-यौम वल-लैल, और इब्न अस-सुन्नी]

* अगर सोने के बाद कोई ख़ुशनुमा ख़्वाब देखे तो आँख खुलने पर अल्हम्दुलिल्लाह (सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है) कहें। फिर उस ख़ुशनुमा ख़्वाब को सिर्फ़ भरोसेमंद और आलिम लोगों को ही बताना चाहिए ताकि ख़्वाब की सही ताबीर की जा सके।

* अगर कोई बुरा ख़्वाब देखे तो बाईं तरफ़ तीन बार थूकना चाहिए और फिर तीन बार ये पढ़ना चाहिए:
   आऊज़ु बिल्लाही मिनश-शैतानिर-रजीम
   (मैं शैतान की बुराई से अल्लाह की पनाह माँगता हूँ)
इसके अलावा अपनी करवट बदलकर दूसरी तरफ़ सो जाएं [मुस्लिम]। उस ख़्वाब को किसी को नहीं बताना चाहिए, फिर उससे उस शख़्स को कोई नुक़सान नहीं होगा [बुख़ारी, मुस्लिम]

* अल्लाह से माफ़ी मांगें (इस्तिग़फ़ार)। तीन बार ये दुआ पढ़िए:
   अस्तग़फ़िरुल्लाह हलladhi ला इलाहा इल्लल्लाहुवल हय्युल क़य्यूमु व अतूबु इलैह।
   मैं अल्लाह से माफ़ी माँगता हूँ जिसके सिवा कोई मा’बूद नहीं, वो ज़िंदा है, क़ायम है और मैं उसी की तरफ़ तौबा करता हूँ। [तिर्मिज़ी]

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* सोने से पहले वुज़ू करें जैसे आप नमाज़ के लिए करते हैं, फिर अपनी दाहिनी करवट लेट जाएं और ये दुआ पढ़िए:
   اللَّهُمَّ أَسْلَمْتُ نَفْسِي إِلَيْكَ، وَفَوَّضْتُ أَمْرِي إِلَيْكَ، وَوَجَّهْتُ وَجْهِي إِلَيْكَ، وَأَلْجَأْتُ ظَهْرِي إِلَيْكَ، رَغْبَةً وَرَهْبَةً إِلَيْكَ، لَا مَلْجَأَ وَلّا مَنْجَا مِنْكَ إِلَّا إِلَيْكَ، آمَنْتُ بِكِتَابِكَ وَبِنَبِيِّكَ الَّذِي أَرْسَلْتَ

Hindi Pronunciation:
अल्लाहुम्मा असलमतु नफ़सी इलयका, व फ़व्वद्तु अमरी इलयका, व वज्जह्तु वज्ही इलयका, व अल्जअ़तु ज़हरी इलयका, रग़्बतन व रह़बतन इलयका, ला मल्जअ़ व ला मंजा मिन्क इल्ला इलयका, आअ़मन्तु बिकिताबिका व बिनबिय्यिकल्लज़ी अर्सल्त
Hindi Translation:
ऐ अल्लाह,
मैंने अपने आप को तेरे हवाले कर दिया है, और मैंने अपना काम तेरे सुपुर्द कर दिया है, और मैंने अपना चेहरा तेरी ओर कर लिया है, और मैंने अपनी पीठ तेरे सहारे लगा दी है, तेरी चाहत और तेरे डर से, तेरे सिवा कोई पनाह नहीं और न ही कोई बचाव, सिवाय तेरे। मैंने तेरी किताब और तेरे भेजे हुए नबी पर ईमान लाया है।

इंशा अल्लाह। इन नेक, छोटे मगर असरदार अमल को करने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगेगा और एक बार जब ये आपकी आदत बन जाएगी तो आपको ये करने में लुत्फ़ आएगा, इंशा अल्लाह। याद रखिए, ये हमारे प्यारे नबी (ﷺ) की सुन्नतें हैं!


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इमरान सिद्दीकी

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