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हजरत जानुल्लाह शाह के दस्तरखान पर आज अकीदतमंद खोलेंगे २१ वा रोजा

* हजरत अली के विसाल के दिन  पर हजरत सभी को करवाते थे इफ्तार

* उर्स के मौके पर हजारों की संख्या में पहुंचेंगे अकीदतमंद

जालना: रमजान का महीना मुसलमानों में खास महत्व रखता है. ऐसे में जालना शहर में हजरत जानुल्लाह शाह बाबा  उनके दौर में हजरत अली के विसाल(शहदात) के दिन २१ रमजान को हजारों की संख्या में अकीदतमंदों को  इफ्तार करवाते थे  इस परंपरा को आगे बढाते हुए दरगाह खादिम और अकीदतमंद आज भी २१ वे रमजान पर विशेष इफ्तार का आयोजन करते है. हजरत के दस्तरखान पर एक साथ हजारों अकीदतमंद रोजा खोलते है.  इस बार भी सोमवार को दरगाह परिसर में हजारों की संख्या में अकीदतमंद पहुंच कर रोजा इफ्तार करेंगे.

* २१ वे रमजान को होता है खास उर्स

फोटो हजरत जानु्ललाह शाह बाबा के हाथ से लिखी कुरान और तफसील मजार शरीफ के पास कांच के लॉकर में आज भी महफूज है

हजरत जानुल्लाह शाह बाबा के दरबार में हर खास ओ आम के लिए लंगर का आयोजन नियमित होता था इसमें २१ वा रमजान बेहद खास होता था. इस दिन  हजरत के दस्तरखान पर  इफ्तार करने हजारों की संख्या में अकीदतमंद पहुंचते थे. इसमें एक और बात जो हजरत के विसाल के बाद देखने को मिली है वो यह की हजरत का विसाल भी २१ रमजान को हुआ था. जिस वजह से जालना में २१ वा रमजान खास उर्स का महत्व रखता है.

*  हजरत के हाथ से लिखी कुरान की भी करते है जियारत

गौरतलब है की २१ वे रमजान को दूर दराज से हजारों की संख्या में अकीदतमंद हजरत के दरबार में पहुंचते है तथा दरगाह की जियारत के साथ ही हजरत द्वारा हजरत द्वारा उनके हाथ से लिखी हुई कुरान शरीफ और तफसीर की जियारत भी करते है. यह कुरान आज भी हजरत की मजार शरीफ के पास कांच के लॉकर में महफूज है.

*दरगाह के खादिम और अकीदतमंद करते है इफ्तार और लंगर का इंतेजाम

फोटो दरगाह हजरत जानुल्ला शाह बाबा में सोमवार को २१ वे रमजान और उर्स के उपलक्ष्य में विशेष इफ्तार का आयोजन सोमवार को होगा

आज भी २१ वे रमजान के इफ्तार का खास महत्व है. इफ्तार के लिए लगने वाले सामान जैसे फल, फ्रूट, खजूर, मेवे, शरबत आदि और ठंडे पानी की व्यवस्था के साथ ही लंगर का इंतजाम भी दरगाह के खादिम और अकीदतमंद करते है जिससे २१ वे रमजान के इफ्तार का जालना की दरगाह में रुहानी नजारा सभी को देखने को मिलता है.

*ऐतिहासिक कुरान और तफसीर का उचित रखाव जरूरी

दरगाह के खादिम मोहम्मद जावेद मोहम्मद यूसुफ ने कहा की, पहले जमाने में उर्स पर हजरत के हाथों लिखी कुरान सभी को दिखाई भी जाती थी लेकिन आज यह लॉकर में महफूज रखी हुई है. इस ऐतिहासिक कुरान और तफसीर का खास महत्व है इसलिए वक्फ बोर्ड इसके उचित रखरखाव का प्रबंध करें. उनकी यह भी मांग है की इस कुरान को डिजिटलाइज्ड किया जाए ताकी हजरत द्वारा अपने हाथों से लिखी गई कुरान और उसकी तफसीर को पढने का मौका सभी को मिले.

* गुंबद और मीनारें की लाइट बंद लोगों में नाराजगी

गौरतलब है की पहले वक्फ बोर्ड उर्स के उपलक्ष्य में संपूर्ण दरगाह पर लाइटिंग लगाकर इसे रोशनी से सजाया करता था. लेकिन पिछले कुछ समय से  यह व्यवस्था नहीं की जा रही है. अलबत्ता दरगाह के गुंबद पर लगा विशेष लाइट तथा चारों मीनारों पर लगे लाइट हमेशा इस दरगाह की विशेष पहचान रहे है लेकिन इस बार यह लाइट बंद होने से लोगों में नाराजगी है. इफ्तार से पहले इन लाइटों को चालू करने की मांग की जा रही है.

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इमरान सिद्दीकी

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