Ramzan ke Roze ki Fazilat या Roze ki Fazilat जानना हर मोमिन के लिए जरूरी है; ताकि उसे रमजान की अहमियत का अंदाजा लग जाए और वह अल्लाह की इबादत की राह पर चलने लगे. रमजान में रोजा रखना फर्ज़ है, इस्लाम के पांच मीनारों में एक मीनार रोजा रखना भी है; अगर कोई शख्स बिना किसी जायज वजह के रमजान के रोजे छोड़ता है तो उस पर आजाब पड़ता है.
Table of Contents
- Ramzan Kya Hai
- रमजान में किन लोगों की बख्शीश नहीं होती
- Ramzan ke Roze ki Fazilat ki Hadees
- Ramzan Ke Roze Ki Fazilat क्या है
- रोज़े का बदला अल्लाह देगा
- दोज़ख की आग से हिफाजत होगी
- जन्नत नसीब होगी
- सेहत अच्छी होती है
- परहेजगारी पैदा होती है
- वजन कम होता है
- ईमान ताजा होता है
- बीमारियां दूर होती हैं
- खताओं का माफ होना
- मगफिरत अता होगी
- आज आपने क्या जाना?

Ramzan Kya Hai
नाज़रीन क्या आपने कभी इस बात पर गौर फरमाया है के रमज़ान क्या है या इसका मतलब क्या है , दोस्तों रमजान का मतलब है जो एक तरफ तो रोज़ा इंसान के बदन को जलाता है और दूसरी तरफ उसके तमाम पिछले गुनाहों को जलाकर राख कर देता है और जब रमज़ान की आखिरी रात आती है तो वो इंसान गुनाहों से ऐसे पाक हो जाता है। जैसे आज ही मां के पेट से पैदा हुआ हो।
रमजान में किन लोगों की बख्शीश नहीं होती
दोस्तों रमज़ान के महीने में अल्लाह तआला सिर्फ 4 लोगों को छोड़कर तमाम मुसलमानों को बख्श देते है और अगर वो अपने गुनाहों से सच्ची तौबा कर ले तो अल्लाह तआला अपने करम से उन्हे भी बख्श देते है । वो 4 आदमी या औरत कौन है ?
माँ-बाप की नाफरमानी करने वाला या उनके साथ बहुत बुरा सलूक करने वाला ।
शराब पीने वाला ।
रिश्तेदारों के साथ बुरा सलूक करने वाला या रिश्ते तोड़ने वाला या रिश्तों को आग लगाने वाला ।
कीना रखने वाला । (कीना का मतलब किसी से नफरत करना और उसे नुकसान पहुँचाना) और (बुगज़ का मतलब है किसी से नफरत करना) ।
अल्लाह हमें और आपको इन बुरे कामों से बचाए । और आने वाले रमजान में हर मुसलमान की मग़फिरत फरमाए । ये भी Ramzan Ke Roze Ki Fazilat है के अल्लाह सिर्फ 4 लोगों को छोड़कर तमाम को इस मुबारक महीने की बरकत से बख्श देते है ।
Ramzan ke Roze ki Fazilat ki Hadees
तमाम हदीसों में Ramzan ke roze ki fazilat भर भर कर बयान की गई है; आज हम आपको एक ऐसी फज़ीलत हदीस की रोशनी में बता रहे हैं, जिसे हमारे नबी ने फरमाया है.
रसूल अल्लाह सल्ल ० फरमाते है के क़यामत के दिन रोज़ा और कुरान सिफारिश करेंगे । रोज़ा अल्लाह से कहेगा कि ऐ अल्लाह इस बंदे ने मेरी खातिर भूक और प्यास की शिद्दत को बर्दाश्त किया और नफ़सानी ख्वाहिशों से बचा रहा तो आप मेरी सिफारिश इसके हक मे कुबूल फरमाइए। रसूल अल्लाह सल्ल ० फरमाते है के इसकी सिफारिश कुबूल की जाती है ।
इसी तरह कुरान भी रोज़े क़यामत उसके पढ़ने वाले की सिफारिश करेगा और अल्लाह से कहेगा कि ऐ अल्लाह इस बंदे ने रात में क़याम फरमाया और मेरी सूरतों को पढ़ा लिहाज़ा मेरी सिफारिश इसके हक में कुबूल फरमा , तो अल्लाह तआला कुरान की सिफारिश को कुबूल फरमाते है और उस शख्स को बख्श देते है। (मुसनद अहमद और तबरानी)
हज़रत अबु हुरैरा से रिवायत है के रसूल सल्ल ० से अल्लाह फरमाते है कि इबने आदम का हर अमल उसके लिए है सिवाये रोज़े के यानि आदम अलै ० की औलाद का हर अमल उसकी अपनी जात से है और रोज़ा खास मेरे लिए है तो और इसका अजर मै दूंगा।
फिर आगे रसूल अल्लाह सल्ल ० ने फरमाया रोज़ा आग से ढाल है यानि रोज़ा जहन्नुम की आग से बचाएगा और जिस दिन तुम रोज़े से रहो तो बुरी बातों , बुरे कामों से और लड़ाई झगड़े से बचो अगर तुम जहन्नुम की आग से बचना चाहते हो । ये भी Ramzan Ke Roze Ki Fazilat कितनी बड़ी है के क़यामत के रोज अल्लाह तआला रोजेदारों को खुद उसका बदला देंगे और दौजख की आग से बचाएंगे। (मुस्लिम)
रसूल अल्लाह सल्ल ० फरमाते है के रोजेदार के मुँह की हवा अल्लाह तआला को क़यामत के दिन मुश्क की खुशबू से भी ज्यादा महबूब होगी । रोजेदार के लिए दो खुशियां है , पहली जब वो इफ्तार करता है और दूसरी तब मिलेगी जब वो अल्लाह से मिलेगा । यानि क़यामत के रोज अल्लाह उसे ऐसा इनाम अता फरमाएंगे जिसे पाने के बाद वो शख्स बहुत खुश होगा । अल्लाह तआला ने रोजेदारों का बदला छिपाकर रखा है यानि ये नबी को भी नहीं बताया के रोजेदार का बदला क्या होगा । लेकिन उस शख्स के लिए बहुत ही खास होगा और वो बहुत ही खुश होगा। (मुस्लिम शरीफ)
Ramzan Ke Roze Ki Fazilat क्या है
- रोज़े का बदला अल्लाह देगा।
- दोज़ख की आग से हिफाजत होगी।
- जन्नत नसीब होगी।
- सेहत अच्छी होती है।
- परहेजगारी पैदा होती है।
- वज़न कम होता है।
- ईमान ताजा होता है।
- बीमारियां दूर होती हैं।
- खताओं का माफ होना।
- मगफिरत अता होगी।
- रोज़े का बदला अल्लाह देगा.
आहजरत सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरमाया हक़ ताला यानी अल्लाह रब्बुल इज्जत का इरशाद है; कि रोजा खास मेरे लिए है, और उसका बदला मैं खुद दूंगा.
आप आप रोजे की अहमियत को खुद ही समझ लीजिए कि इसका बदला खुद अल्लाह देगा; अब और क्या ही चाहिए एक सच्चे मोमिन को.
दोज़ख की आग से हिफाजत होगी
हम इंसान अपनी जिंदगी में सालों भर बहुत गुनाह करते हैं जिनका हमें खुद ही साथ नहीं होता लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि हमारे रग अल्लाह के पास पल पल का हिसाब है.
गुनाह करने से आजाब हासिल होता है, और दोजख की आग में गुनहगार को जलाया जाता है; लेकिन रमजान का महीना एक ऐसा महीना है, जिसमें रोजा रखने से बंदा दोज़ख की आग से बच जाता है.
जन्नत नसीब होगी
जन्नत जाने की तमन्ना हर के दिल में होती है लेकिन हर कोई जन्नत नहीं जा सकता जन्नत वही जाता है; जो उसके काबिल और जन्नत का हकदार होता है.
जो अपनी जिंदगी में अल्लाह को राजी करने में कामयाब हो जाता है, अल्लाह उसी को जन्नत में दाखिल करता है.
अल्लाह ने हमारे लिए रमजान का महीना भेजा है, ताकि हम इस महीने इबादत करके अल्लाह को राजी कर ले; और जन्नत जाना नसीब हो सके.
सेहत अच्छी होती है
रोजा रखने से सेहत अच्छी होती है, यह बात साइंटिफिक प्रोवेन भी है, क्योंकि हम इंसान सालों भर खूब खाते हैं; लेकिन खाने से सिर्फ सेहत बनती ही नहीं बल्कि बिगड़ भी जाती है.
इंसानों में ज्यादातर जो बीमारियां होती हैं, वह पेट से ही होती है, जब हम ज्यादा खाना खाते हैं; तो हमारा पेट उस खाने को आसानी से पचा नहीं पाता जिससे वह गंदगी के रूप में शरीर में जमा हो जाता है, जिससे हमें कई बीमारियों का सामना करना पड़ता.
रमजान का रोजा रखने से हमारा जिस्म इन गंदगियों को साफ कर देता है, और हम सेहतमंद हो जाते हैं.
परहेजगारी पैदा होती है
रोज़ा रखने का मकसद परहेजगारी करना है, हदीसों में आया है, अल्लाह फरमाता है; कि रोज़ा तुम पर इस कदर फर्ज जैसे तुमसे पहले आई उम्मतों पर था.
रोज़ा का मतलबी होता है, रुक जा यानी हर किस्म की गुनाह से फिर वह गुनाह चाहे आंखों का हो, नाक का हो, मुंह का हो; हाथ का हो या पैर का हो हर गुनाह से बचना रोज़ा कहलाता है.
जब कोई शख्स रोजा रखता है, तो उसको यह फिक्र होती है, कि मुझे यह गलत काम नहीं करना है; नहीं तो अल्लाह नाराज हो जाएगा – तो इसे ही हम परहेजगारी कहते हैं, जो हमें जिंदगी में काफी फायदा पहुंचाती है.
वज़न कम होता है
आज के समय में सबसे बड़ी बीमारी वजन का ज्यादा होना ही है; क्योंकि हम आजकल बिना कुछ सोचे समझे जैसा मर्जी वैसा खाना खाते रहते हैं.
जिससे हमारे शरीर में गलत खाने की चीजें भी चली जाती हैं, और वह हमारे जिस्म में गंदगी के रूप में जमा होती रहती हैं; जिससे हमारे शरीर को काफी नुकसान उठाना पड़ता है.
जब गंदगी जमा हो जाती है, तो वह मोटापा का रूप लेने लगती है, और जब कोई शख्स रोज़ा रखता है, तो वह भूखा होता है; जिस वजह से हमारा जिस्म उस गंदगी को खुद खाने लगता है, और हमारा जिस्म धीरे-धीरे साफ हो जाता है.
जिस्म के साफ होते ही हमारा वजन अपने आप ही कम होते रहता है, और हम सेहतमंद हो जाते हैं; और भी कई फायदे हमें हमारे जिस्म में देखने को मिलते हैं.
ईमान ताजा होता है
रमजान के महीने में हमारे चारों तरफ इबादत का माहौल होता है, हर कोई इबादत कर रहा होता है; और अपने रब को राज़ी करने की कोशिश कर रहा होता है.
ऐसे में उस इंसान का भी ईमान ताजा हो जाता है, जो पूरे साल इबादत नहीं करता लेकिन औरों को देखकर; रमजान की रहमतों को देखकर उसके दिलों में भी ईमान जागता है, और वह भी इबादत में लग जाता है.
और यही रमज़ान की खूबसूरती है, अल्लाह हम सभी को रमजान में इबादत करने की तौफीक अता फरमाए आमीन !
बीमारियां दूर होती हैं
जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया जिस्म में 90 % बीमारियां पेट से ही आती है; क्योंकि हम साल भर गलत चीजों का इस्तेमाल करते हैं, जिसका हमें खामियाजा आगे चलकर भुगतना पड़ता है.
ऐसे में रोजा रखने से हमारा जिस्म खुद को साफ करता है, और पहले जैसा मजबूत कर देता है; जिससे हम सेहतमंद हो जाते हैं, और बीमारियां हमसे दूर रहती हैं.
खताओं का माफ होना
हम आए दिन बहुत सी खताएं करते हैं, जिससे हमें दुनिया में तो दिक्कत का सामना करना ही पड़ता है; साथ ही आख़िरत के लिए भी वह परेशानी का सबब बन जाती है, ऐसे में हमें अपनी खताओं की माफ़ी हमेशा मांगते रहना चाहिए.
हदीस शरीफ में आया है, रमज़ान के महीने में अल्लाह ताआला मुसलमानों की तरफ मुतवज्जेह होता है; और खताओं को माफ फरमा देता है.
मगफिरत अता होगी
Ramzan ke roze ki fazilat में सबसे बड़ी फजीलत यह भी है कि इस महीने रोजा रखने से और अल्लाह की इबादत करने से मग फिरत हासिल होती है.
हदीसों में आया है, कि रमजान में तीन अशरे होते हैं, जिसमें दूसरे अशरे में मगफिरत नसीब होती है; इसलिए दूसरे अशरे में हमें मगफिरत की दुआ मांगनी चाहिए.
आज आपने क्या जाना?
रमजान का महीना काफी मुबारक महीना होता है, और इस महीने में खूब रहमतें नाज़िल होती हैं; आज किस पोस्ट में हमने आपको Ramzan ke roze ki fazilat बताई उम्मीद है! आपको आपके सवालों के जवाब मिल गए होंगे.
NOTE – दोस्तों आप से गुजारिश है, कि आप इस पोस्ट को अपने व्हाट्सएप, फेसबुक पर शेयर जरूर करें; ताकि तमाम मुसलमानों को Ramzan ke roze ki fazilat की मालूमात हो जाए और वह रोजा रखें.
आपको यह पोस्ट कैसी लगी और आप हमें क्या सलाह देना चाहते हैं? कमेंट में जरूर बताएं अल्लाह हाफिज !!!
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