* बाबरी मस्जिद की याद में सामूहिक दुआ संपन्न

जालना: रजा अकादमी द्वारा बुधवार की दोपहर ३.४० मिनट पर पुराना जालना के दुखी नगर स्थित केजीएन रोड पर बाबरी मस्जिद की याद में इज्तेमाई अजान और सामूहिक दुआ का आयोजन किया गया था. इस दौरान नागरिकों ने भारतीय तिरंगे लहराते हुए देश की एकता और अखंडता का नारा लगाया साथ ही आने वाली नस्लों को बाबरी मस्जिद की शहादत की घटना याद रहे इस उद्देश्य से इज्तेमाई अजान दी.इस समय लब्बैक लब्बैक या रसूल अल्लाह के नारों से संपूर्ण परिसर गूंज उठा.
रजा अकादमी के मराठवाड़ा अध्यक्ष सैय्यद जमील मौलाना के नेतृत्व में पिछले ३१ सालों से यह सिलसिला लगातार चला आ रहा है. जमील मौलाना ने कहा की 1992 में बाबरी मस्जिद को शहीद कर दिया गया था. रज़ा अकादमी 1993 से हर साल बाबरी मस्जिद की याद में इज्तेमाई अज़ान और दुआ का आयोजन करते आ रही हैं. पुरी मस्जिद 6 दिसंबर को दोपहर 3:40 बजे शहीद कर दी गई थी. अज़ान देने का मकसद यह है कि हम हमारी आने वाली नस्लों में ये बात मुंतकिल (पहुंचाना) करना चाहते हैं. ताकि हमारी नस्ल को याद रहे कि बाबरी मस्जिद हिंदुस्तान की धरती पर है और कयामत तक रहेगी. शरीयत का हुक्म है कि एक बार जिस जगह मस्जिद बना दी जाए तो वह जगह जमीन से लेकर आसमान तक कयामत तक मस्जिद ही रहती है.

इस अवसर पर एकबाल पाशा, शेख माजेद, मुनव्वर खान लाला, फिरोज बागवान, हाफिज अमजद, गुलाम महबूब, आदिल शेख, मौलाना नौशाद, मौलाना मसीहुद्दीन, नदीम शेख, मौलाना अब्दुल रज्जाक, कारी मुजाहिद, मौलाना तौफीक मिस्बाही, हाफिज रेहान, हाफिज मुनव्वर रजा, राजा खान, दादे खान, शाहेद रजा, अब्दुल कय्युम खान, शोएब बागवान, जोहेब अंसारी, अब्दुल्लाह रिजवी, हाफिज शाकेर, इरफान खान, मुख्तार खान, सैयद कलीम, शेख समीर, जावेद बागवान सहित बडी संख्या में नागरिक मौजूद थे.
फोटो: बुधवार दोपहर को दुखी नगर में बाबरी मस्जिद की याद में इज्तेमाई अजान और दुआ संपन्न हुई. इस समय इस्लामी झंडो के साथ ही भारतीय तिरंगे भी लहराए गए.

बुऱ्हाणनगर में भी दी गई इज्तेमाई अजान

जालना: बाबरी मस्जिद की याद में बुधवार को नया जालना के बुऱ्हाणनगर परिसर स्थित हसनिया मस्जिद में इज्तेमाई अजान और दुआ का आयोजन किया गया था.
इस समय मुफ्ती गुलाम नबी अमजदी ने कहा कि हम कभी भी बाबरी मस्जिद की शहादत को नहीं भुला सकते है इसलिए हम हर साल शहादत बाबरी मस्जिद के दिन अज़ान और दुआ का एहतमाम करते है ताकि बाबरी मस्जिद मुसलमान हमेशा याद करते रहे. इस समय फिल्म अल्लाह के बंदे को लेकर भी नाराजगी जताई और कहा गया है की इस फिल्म में कई गुस्ताखियां की गई है जो ना काबिले बदार्श्त है. सरकार से मांग की गई है की वो इस फिल्म को रिलीज ना होने दे. इस समय बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे.
Nayi Soch News-e-Hub से और जानें
नवीनतम पोस्ट अपने ईमेल पर प्राप्त करने के लिए सदस्यता लें।
































































































Leave a Reply