जमजम का पानी क्या है
इस्लामी रिवाजों के मुताबिक जमजम के कुएं को इब्राहिम अली सलाम की दूसरी बीवी हाजरा के जरिए खोजा गया था जो कि हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम की मां थी। इसकी शुरुआत तब हुई जब हजरत इस्माइल और उनकी मां को खुदा के हुक्म से हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने सफा और मरवा के बीच रेगिस्तान में छोड़ दिया अल्लाह ताला ने उनके ईमान और इम्तिहान के लिए ऐसा हुक्म दिया था जैसे-जैसे वक्त गुजरता गया और दिन चढ़ता गया गर्मी बढ़ती गई इस्माईल अलैहिस्सलाम की प्यास भी बढ़ती गई इस्माइल अलेह सलाम इतिहास की वजह से रोने लगे लेकिन उस रेगिस्तान में था भी क्या ना दूर तक कोई पेड़ और ना ही पानी का नामोनिशान। हजरत हाजरा परेशान हो गई वह चार बार सफा और 7 बार मरवा की पहाड़ियों पर पानी की तलाश में दौड़ी सातवी दौड़ में अचानक उन्हें जमीन से पानी निकलता नजर आया जब पानी बहने लगा तो उन्होंने कहा जमजम यानी बहना रुक जा और इसके साथ ही वह पानी बहना रुक गया और उसका नाम जमजम पड़ गया।
सैयदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजि अल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि रुई जमीन पर बेहतरीन पानी आवे जमजम है इसमें खाने की कूवत और बीमारी से शिफा है। (سلسلة الاحاديث الصحيحة : 1056)
इब्राहिम अलैहिस्सलाम की हाजरा और इस्माइल अलैहिस्सलाम के साथ हिजरत
हज़रत इब्ने अब्बास रजि अल्लाहु अन्हु कहते हैं कि हजरत मोहम्मद सल्ला वसल्लम के बताए वाक्ये के मुताबिक अल्लाह ताला ने अपने पैगंबर इब्राहीम अलैहिस्सलाम को उनकी दूसरी बीबी हाजरा और उनके नवजात शिशु इस्माईल अलैहिस्सलाम को निर्जन बंजर घाटी में छोड़ने का हुक्म दिया। वह सब सफर के लिए निकले और इतना चले की रेगिस्तान में पहुंच गए और एक ऐसी वादी और घाटी में आए जहां न तो पेड़ और ना ही खाना पानी; उस वादी में जिंदगी का कोई नामोनिशान नहीं था।
बीबी हाजरा ने पीछे चलते हुए इब्राहिम अलैहिस्सलाम से कहा “ऐ इब्राहिम तुम इस वादी में छोड़कर हमें कहां जा रहे हो, जहां ना तो कोई इंसान है जिसके साथ हम लुत्फअंदोज़ हो सकें और ना ही कुछ और ? हाजरा ने कई बार यह शब्द दोहराए लेकिन इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने पलट कर उनकी तरफ नहीं देखा, फिर बीबी हाजरा ने पूछा क्या अल्लाह ने तुम्हें ऐसा करने का हुक्म दिया है? इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने कहा! हां , हजरत हाजरा ने कहा फिर वह हमें नजरअंदाज नहीं करेगा और (अपने बच्चे के पास) वापस आ गई जबकि अब्राहिम अलैहिस्सलाम अपने रास्ते पर निकल गए। जब अब्राहिम अलैहिस्सलाम का सामना काबा से हुआ उन्होंने अपने दोनों हाथ उठा दिए अल्लाह से दरख्वास्त करते हुए दुआ मांगी “
ऐ हमारे रब ! मैंने अपनी औलादों को 1 बिन खेती की वादी में तेरी मोहतरम घर के पास बसाया है। ऐ हमारे रब ताकि वह नमाज कायम करें। तो तू लोगों के दिल उनकी तरफ मायल कर दे और उनको फलों की रोजी अता फरमा ताकि वह तेरा शुक्र अदा करें।
सफा और मरवा की दौड़
जब हाजरा के खाने पीने की चीजें खत्म हो गई तो उन्होंने देखा कि उनके नजदीक सफा पहाड़ मौजूद है वह उस पहाड़ पर खड़ी हो गई और मदद के लिए इधर-उधर देखने लगी फिर उसके बाद नीचे उतर आई और वादी को पार करते हुए नरवाना में पहाड़ पर पहुंच गए और वहां पर खड़े होकर दोबारा मदद के लिए देखने लगी कि शायद कोई आ जाए. उन्हें कोई नहीं दिखा और इस तरह उन्होंने सफा और मरवा के सात चक्कर लगा लिए।
और जब आखिरी बार हाजरा मरवा पर पहुंची तो उन्होंने एक आवाज सुनी उन्होंने देखा कि उस जगह से पानी बह रहा है जहां हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम मौजूद थे। हजरत हाजरा ने उसके आसपास पानी को रोकने के लिए बेसिन बनाना शुरू कर दिया और कहा जमजम और इसके साथ ही उस पानी का नाम जमजम पड़ गया।
जमजम के पानी ने मक्का की वादियों को जिंदगी दे दी। हजरत हाजरा ने सुना कि जिब्रील अलैहिस्सलाम उनसे कह रहे हैं कि ” अपने घर अंदाज किए जाने पर खौफजदा मत हो, ये अल्लाह का घर है जो इस बच्चे और इसके बाप के जरिए बनाया जाएगा और अल्लाह अपने लोगों को कभी नजरअंदाज नहीं करता है।
हजरत हाजरा वहां तब तक अकेली रहे जब तक ज़ुरहम कबीले के लोगों का वहां से गुजर नहीं हुआ। उन्होंने पूछा कि क्या हम लोग यहां तुम्हारे साथ रह सकते हैं? हजरत हाजरा ने जवाब दिया हां, लेकिन तुम्हारा इस पानी पर कोई हक नहीं होगा। हु इस बात पर राजी हो गए हजरत एक बेहतरीन सौदागर थी उन्होंने कारवां में आने वाले लोगों को सामान के बदले में पानी देना शुरू कर दिया। और इसकी वजह से प्राचीन मक्का शहर अरब का एक बेहतरीन व्यापारिक केंद्र बन गया।
काबा का निर्माण
सालों बाद जब इब्राहिम अलैहिस्सलाम अपने बेटे इस्माइल के पास वापस आए अल्लाह ने उन्हें हुक्म दिया कि वो इबादत के लिए एक घर का निर्माण करें तब इब्राहिम अलैहिस्सलाम और इस्माइल अलैहिस्सलाम ने मिलकर एक इबादतगाह का निर्माण किया जिसे काबा कहा जाता है।
“और जब इब्राहिम और इस्माइल इस घर की बुनियाद रख रहे थे तो इब्राहिम ने दुआ की कि ऐ हमारे रब हमें कबूल कर ले और तू तो सब की सुनने वाला और सब कुछ जानने वाला है” (Quran 2:127)
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब हमने इबराहीम के ज़रिये से इबरहीम के वास्ते ख़ानए काबा की जगह ज़ाहिर कर दी (और उनसे कहा कि) मेरे वास्ते किसी चीज़ को शरीक न बनाना और मेरे घर को तवाफ और क़याम और रूकू सुजूद करने वालों के वास्ते साफ सुथरा रखना (Quran 22:26)
बाद में मक्का हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो वाले वसल्लम की पैदाइश गाह भी बनी। अल्लाह ताला ने हजरत मुहम्मद सल्ल० को हुक्म दिया कि वो तमाम दुनिया के मुसलमानों के लिए काबा को सेंटर बनाएं।
ऐ रसूल क़िबला बदलने के वास्ते बेशक तुम्हारा बार बार आसमान की तरफ मुँह करना हम देख रहे हैं , तो हम जरूर तुम्हें ऐसे क़िबले की तरफ फेर देगें कि तुम निहाल हो जाओगे। अच्छा तो नमाज़ में तुम मस्ज़िद-ए-मोहतरम काबे की तरफ मुँह कर लो, और ऐ मुसलमानों तुम जहाँ कही भी हो उसी की सिम्त अपना मुँह कर लिया करो और जिन लोगों को किताब तौरेत वगैरह दी गयी है वो बख़ूबी जानते हैं कि ये किब्ले की तब्दीली बहुत बजा और दुरुस्त है और उस के परवरदिगार की तरफ़ से है, और जो कुछ वह लोग करते हैं उस से ख़ुदा बेख़बर नही (क़ुरआन 2:144)
खुदा ने क़ाबा को जो (उसका) मोहतरम घर है, और हुरमत वाले महीनों को और क़ुर्बानी को और उस जानवर को जिसके गले में (क़ुर्बानी के वास्ते) पट्टे डाल दिए गए हों, लोगों के अमन क़ायम रखने का सबब क़रार दिया। ये इसलिए कि तुम जान लो कि खुदा वह सब जानता है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है, ये भी (जान लो) कि बेशक ख़ुदा हर चीज़ से वाकिफ है (क़ुरआन 5:97)
जमजम के पानी की दोबारा खोज
जब मक्का के लोग अपने पाक जिंदगी से भटक गए और जुरहम कबीला मक्का छोड़कर चला गया और उन्होंने जाते हुए जमजम के पानी को और उसके कुएं को अच्छे तरीके से छुपा दिया ताकि मक्का के पथ भ्रष्ट लोग इसके फायदे से महरूम हो जाए वक्त बीतता गया और धीरे धीरे लोग यह भी भूल गए की जमजम का कुआं कहां पर स्थित था कई सदियां बीत गई यहां तक कि हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दादा अबू मुत्तलिब को खुदा की तरफ से एक पैगाम मिला जिसमें उन्हें जमजम के कुएं की जगह बताई गई।
जब तीन रातों तक अब्बू मुख्तलिफ को यह ख्वाब आया तो उन्होंने जम जम के पानी और उसके पुराने कुएं को खोजने की कोशिश शुरू कर दी और कामयाब रहे, और इस तरह उन्होंने उन लोगों को गलत साबित कर दिया जो उन पर शक कर रहे थे।
बहुत से मक्का के लोगों ने जमजम के पानी पर दावा करने की कोशिश की लेकिन अबू मुत्तलिब ने सब को नकार दिया जब मामला हद से ज्यादा बढ़ गया तो एक बुजुर्गों को इसमें दखल देना पड़ा। इसके बाद अबू तालिब को जमजम का कुआं दे दिया गया और उनका खानदान हाजियों को जमजम का पानी पिलाने लगा।
जम जम के दूसरे नाम
जमजम को दूसरी कई नामों से जाना जाता है कुछ नाम इसकी उपयोगिता और खुसूसियत को दर्शाते हैं और कुछ नाम इसकी जगह और इतिहास का वर्णन करते हैं। नीचे कुछ नाम दिए गए हैं लेकिन यह नाम पूरे नहीं।
जमजम, ज़मामु, जुमज़मू, ज़ुमाजमु, मख्तूमः, मदनुआह, शबाह, सुक़्या, अल-रवा, शिफा सक़म, तवामु तुम, शराब अल-अबरार, बिर्रा, तआम अल-अबरार, तैयबा, हाफिरा, अब्दुल मुत्तलिब, हज़मीतुल, जिब्रील, हज़्मतुल मलिक, हज़्मत, रख़्त
जमजम का कुआं हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दौर से
जम जम के कुएं के मोहम्मद को कई बार रिपेयर किया जा चुका है जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं।
- 28 शव्वाल 802 यानी 30 जून 1400 ईस्वी में मस्जिदे हराम में आग लगने की वजह से कुछ नुकसान हुआ जिसे ममलुक सल्तनत से ताल्लुक रखने वाले सुल्तान अल नासिर फ़राज़ इब्न बरकुक के जरिये पुनः निर्मित करवाया गया।
- जम जम के गुंबद का 1413 ईसवी में मक्का के जज जमालुद्दीन मोहम्मद इब्न अबू जाहिरा के जरिए पुनरुद्धार करवाया गया।
- 1479 सुई में सुल्तान अल अशरफ सैफुद्दीन कैत बे के जरिए जमजम के कुएं की साफ सफाई करवाई गई और उसका जीर्णोद्धार करवाया गया।
- सल्तनत उस्मानिया के दौर में मस्जिदे हराम में बहुत से बदलाव हुए उन्होंने इस मस्जिद कि कई बार मरम्मत करवाई और जमजम के कुएं को और बेहतर बनाया इन सब में उस्मानी सुल्तान सालिम द्वितीय (1566-1574 ) का किरदार काफी बेहतर रहा।
- सुल्तान अहमद चतुर्थ के जरिए 1600 ईस्वी में जमजम के गुंबद का जीर्णोद्धार करवाया गया और उसके बाद 1773 में अब्दुल हमीद प्रथम के जरिए इसे और बेहतर बनाया गया तत्पश्चात सुल्तान अब्दुल हमीद द्वितीय ने 1882 में इसमें और तब्दीलियां की और यह सभी काम मशहूर इंजीनियर अल सईद मोहम्मद सादिक के जरिए किए गए।

Discover more from Nayi Soch News-e-Hub
Subscribe to get the latest posts sent to your email.



![Female Scholarship In Islam A Living Legacy Part 1 - Nayi Soch News-e-Hub Female Scholarship In Islam: A Living Legacy [Part 1]](https://imranjalna.com/wp-content/uploads/mcp-images/mcp-14d8eddf7d99.jpg)




![Far Away Part 19 An Apple For Belly - Nayi Soch News-e-Hub Far Away [Part 19] – An Apple For Belly](https://imranjalna.com/wp-content/uploads/mcp-images/mcp-925a94580019.webp)




![Far Away Part 20 Among the Afghans - Nayi Soch News-e-Hub Far Away [Part 20] – Among the Afghans](https://imranjalna.com/wp-content/uploads/mcp-images/mcp-4264bb9f5dfa.jpg)


![Far Away Part 21 Opium - Nayi Soch News-e-Hub Far Away [Part 21] – Opium](https://imranjalna.com/wp-content/uploads/mcp-images/mcp-a4faff58bd1b.jpg)







































Leave a Reply