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सुन्नते इब्राहीमी की अफजलियत से रोका जाना शरीयत के लिहाज से जुर्म

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*इबादत और कुर्बानी में दिखावे की गुंजाइश नही – जमील मौलाना

जालना: जालना शहर स्थित मस्जिद दरगाह राजाबाग शेर सवार में ईद की नमाज के पहले मार्गदर्शन करते हुए सैयद जमील मौलाना ने कहा की इबादत और कुर्बानी सिर्फ अल्लाह के लिए होती है इसलिए इसमें दिखावा ना हो. जो लोग कुर्बानी के पहले जानवरों को सजाना या हार पहनाना जैसे काम करते है वो सही नहीं है इसमें शिर्क का शुबा पैदा होता है. 

* कुर्बानी की इबादत आलमगीर है

जमील मौलाना ने कहा की ईद का दिन कुर्बानी के लिए अफजल होता है. कुर्बानी की इबादत आलमगीर है यानी कि पूरी दुनिया में ईद के दिन कुर्बानी अदा की जाती है.  लोगों को सुन्नते इब्राहीमी की अफजलियत से रोका जाना वास्तव में शरीयत के लिहाज से जुर्म है तथा ऐसे लोगों पर तौबा लाजमी है. अफजल दिन पर कुर्बानी से लोगों को मना करना शरीयत में मदाखलत है. 

* इस समय जमील मौलाना ने लोगों से कहा की शरई मामलों में सिर्फ और सिर्फ उलेमा से ही राय मशवरा किया जाना चाहिए. उन्होंने उलेमाओं से भी अपील करते हुए कहा कि ऐसे नेताओं जिनको दीन की समझ नही है द्वारा पेश की गैर शरई बातों को उसी समय नकार दिया जाना चाहिए. जमील मौलाना ने लोगों से कहा की ईद की खुशियों में सभी को शामिल किया जाए ताकि गरीब परिवार के लोगों भी ईद पर खुशियां मना सके. 
जमील मौलाना

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इमरान सिद्दीकी

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