जिले में साहूकारों की संख्या बढ़ी !

पहले से ही 106 लाइसेंस प्राप्त साहूकार, आठ नए आवेदन.

जालना  बैंकों की अक्षमता के कारण,  किसानों या अन्य जरूरतमंद लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए साहूकारों के पास जाना पडता है.   पैसा उधार लेने से अस्थायी जरूरत पूरी हो जाती है, लेकिन बाद में पैसा चुकाने के दौरान कई तरह की प्रताड़ना से भी कर्जदारों को गुजरना पड़ता है. अधिक ब्याज देने, जमीन वापस नहीं करने सहित कई ववादि खडे हो जाते है.  किसानों को सूदखोरी से मुक्त कराने के लिए एक ओर सरकारी कार्यक्रम चल रहा है, दूसरी ओर लाइसेंसी साहूकारों की संख्या बढ़ी है, वहीं लाइसेंसधारी साहूकारों के साथ-साथ गैर लाइसेंसी साहूकारों की संख्या भी बड़ी है. इसलिए, किसानों या अन्य लोगों के साहूकारों से मुक्त होने की संभावना कम होती जा रही है।

कोरोना काल में जब सारे वित्तीय लेनदेन ठप पड़े थे तो लोग साहूकारों के पास जाने को मजबूर थे.  साहूकारों की दहलीज पर पहुंच उच्च ब्याज दरों पर पैसा उधार लेकर  आवश्यकता को पूरा किया था. हालांकि सरकार ने राहत के तौर पर  किसानों का कर्ज माफ कर दिया, लेकिन जिले के लिए स्वीकृत 29 लाख 44 हजार रुपये में से केवल पांच लाख रुपए की प्राप्त होने के कारण  किसानों का साहूकारों से छुटकारा पाना ऐसे से संभव नहीं. 

किसानों को साहूकारी कर्ज से मुक्त करने के लिए दो साल पहले लाइसेंसशुदा साहूकार से कर्ज लेने पर कर्ज माफ करने की घोषणा की गई थी. उस समय जालना जिले के 134 किसानों ने साहूकारों से कर्ज लेने के बारे में जानकारी देकर कर्ज माफी योजना का लाभ लेने की कोशिश की थी.  जालना तहसील के 126 कर्जदारों के 29 लाख और जाफराबाद के 8 किसानों के 44 हजार 463 रुपये माफ किए गए थे. इन किसानों का 29 लाख 44 हजार रुपये का कर्ज माफ कर दिया गया, लेकिन बताया गया कि सरकार की तरफ से उन्हें सिर्फ पांच लाख रुपये ही मिले. 

जिले में कुल 106 लाइसेंसी साहूकार हैं. अब पुन: वर्ष 2022-23 में आठ लोगों ने साहूकार के लाइसेंस के लिए आवेदन किया है और उनके आवेदन स्वीकृत भी हो गए हैं.  

जिले में साहूकारी अधिनियम के तहत कुल 95 शिकायतें जिला उप पंजीयक को प्राप्त हुई हैं. जिनमें से 64 प्रकरणों का निस्तारण किया जा चुका है जबकि 31 प्रकरण लंबित हैं. इनमें 20 मामले छह महीने के भीतर के हैं जबकि 7 मामले छह से एक साल के बीच के हैं और 4 मामले एक साल से लंबित हैं.